
जयपुर।
राजस्थान भाजपा के नए अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर पिछले दो माह से फैसला नहीं हो पाने के बीच संगठन महामंत्री चंद्रशेखर की बढ़ी हुई सक्रियता ने सवाल खड़े कर दिए हैं। पूछा जाने लगा है कि क्या भाजपा आलाकमान ने नए प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति का मामला ही ठंडे बस्ते में डाल दिया है?
दरअसल, नए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष की नियुक्ति कोे लेकर दिल्ली में कई दिनों से चल रही माथा पच्ची के बाद भी कोई फैसला नहीं हो सका है। वहीं नाम को लेकर बन रहे गतिरोध के बीच संगठन महामंत्री चन्द्रशेखर ने पार्टी कामकाज की कमान सम्भाल ली है। वे भाजपा के प्रदेश मुख्यालय में नियमित रूप से न सिर्फ जा रहे हैं, बल्कि अघोषित रूप से वे सभी काम भी कर रहे हैं जो प्रदेशाध्यक्ष के जिम्मे होते हैं।
हालांकि नई नियुक्तियां वगैरह तो वे नहीं कर रहे, लेकिन प्रदेश कार्यालय में होने वाली बैठकों की अध्यक्षता तक चंद्रशेखर कर रहे हैं। चुनावी साल में बूथ पुननिर्माण मैनेजमेंट जैसे पार्टी के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट की निगरानी से लेकर मोर्चों व प्रकोष्ठों की बैठकें तक संगठन महामंत्री चंद्रशेखर लेने लगे हैं। इतना ही नहीं प्रदेश कार्यालय आने वाले कार्यकर्ता और पदाधिकारी भी किसी दूसरे नेता से मिलने की जगह संगठन महामंत्री को ही महत्व देते हुए दिखाई दे रहे हैं।
पिछले तीन दिन से उनकी सक्रियता से कई प्रमुख प्रांतीय नेता भी हतप्रभ हैं। हालांकि कोई मुंह तो नहीं खोल रहा, लेकिन अंदर ही अंदर चंद्रशेखर की सक्रियता को लेकर सवाल जरूर उठने लगे हैं। कहा जा रहा है कि शायद अब प्रदेशाध्यक्ष का फैसला विवाद ठंडा पड़ने के बाद ही होगा।
कई लोग तो यह भी कह रहे हैं कि यदि चंद्रशेखर से ही काम चल सकता है तो प्रदेशाध्यक्ष का मुद्दा छोड़ ही देना चाहिए। दूसरी ओर, कई नेता मान रहे हैं कि चंद्रशेखर की इस सक्रियता से पार्टी के भीतर रार और बढ़ सकती है।
गौरतलब है कि भाजपा की प्रदेश इकाई में संगठन महामंत्री का दायित्व संघ के किसी प्रचारक को दिया जाता है या वो संघ के कोटे से ही आता है। संगठन महामंत्री चंद्रशेखर भी यूपी से आए हैं वो भी लगभग नौ साल बाद। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से 2008 में विधानसभा चुनाव के दौरान हुए कथित विवाद के बाद तत्कालीन संगठन महामंत्री प्रकाश चंद्र ने इस्तीफा दे दिया था। संघ ने भी इसे गम्भीरता से लिया और नौ साल तक संगठन महामंत्री के लिए किसी प्रचारक को राजस्थान नहीं भेजा।
हालांकि इस साल होने वाले चुनावों के मद्देनजर गत वर्ष 17 जुलाई को चंद्रशेखर को राजस्थान भेजा गया था। राजस्थान भाजपा में किसी जमाने में संगठन महामंत्री का दबदबा ऐसा होता था कि सत्ता व संगठन में बिना उसकी राय के पत्ता भी नहीं हिलता, लेकिन पिछले करीब एक दशक से परिस्थितयां ऐसी बदली है कि संगठन महामंत्री अव्वल तो कोई बना ही नहीं और चंद्रशेखर भी एक साल बाद जाकर कहीं सक्रिय होते दिख रहे हैं। उनकी यह सक्रियता मुख्यमंत्री राजे का खेमा कितना पचा पाएगा, ये तो वक्त बताएगा। फिलहाल नए प्रदेशाध्यक्ष की गैर मौजूदगी में चंद्रशेखर की सक्रियता नए सवाल खड़े कर रही है।