जयपुर

लम्बे समय बाद भाजपा में दिखी कार्यकर्ताओं की भारी भीड़, नेताओं के चेहरों पर लौटी खुशी

कार्यकताओं ने जमकर नारेबाजी कर दिखाया जोश
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Updated: 12 Mar 2018, 6:13 PM IST
jaipur

अरविन्द सिंह शक्तावत / जयपुर। राज्यसभा का नामांकन दाखिल करने गए भाजपा के तीनों राज्यसभा उम्मीदवारों के समर्थन में आई भीड़ ने भाजपा नेताओं के चेहरों पर खुशी ला दी। लम्बे समय बाद भाजपा कार्यालय में इतनी भीड़ थी कि कार्यालय से लेकर सड़क तक जनता ही नजर आ रही थी। कार्यकताओं ने जमकर नारेबाजी कर जोश दिखाया।

भाजपा कार्यकर्ता सोमवार सुबह से ही कार्यालय में आना शुरू हो गए। सुबह करीब ग्यारह बजे ढोल-नगाड़ों के साथ रैली के साथ किरोड़ी लाल मीना, भूपेन्द्र यादव व मदन लाल सैनी भाजपा कार्यालय से विधानसभा को रवाना हुए। इससे पूर्व उनका तिलक लगाकर अभिनन्दन किया गया। सैकड़ों की संख्या मेें कार्यकर्ता रैली में शामिल थे। बाद में तीनों उम्मीदवारों ने विधानसभा में नामांकन भरा। नामांकन भरने के बाद किरोडी लाल मीना पैदल ही विधानसभा से चल दिए। उनके साथ सैकड़ों की संख्या में कार्यकर्ता थे। वे सीधे भाजपा कार्यालय पहुंचे। कार्यालय में आते ही कार्यकताओं ने किरोड़ी को फूल-मालाओं से लाद दिया। किरोड़ी के साथ गोलमा देवी भी थी। कुछ देर बाद मदन लाल सैनी का कारवां भी कार्यालय में पहुंचा। इस दौरान मीना व सैनी ने कहा कि वह जनता की आवाज को राज्यसभा में रखेंगे। दोनों राजस्थान से जुड़ी हुई समस्याओं को विधानसभा में उठाएंगे।

बाबा साहब का लिया आशीर्वाद

कार्यालय से रैली विधानसभा को रवाना हुई तो अम्बेड़कर सर्किल पर रैली पर रूकी। यहां पर किरोड़ी लाल मीना, भूपेन्द्र यादव व मदन लाल सैनी ने बाबा साहब भीम राव अम्बेडकर की मूर्ति पर मालार्पण व पुष्प अर्पित किए। इस दौरान उनके साथ भाजपा प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी भी मौजूद थे।

51 किलो की पहनाई माला

कार्यकताओं ने मीना को 51 किलों की माला पहना कर स्वागत किया। माला को ढोल नगाड़ों के साथ कार्यकर्ता लाए और उन्हें पहनाई।

हैज को पहुंचाया नुकसान
उम्मीदवारों के नामांकन का कार्य तो पूरा हो गया, लेकिन इसका हर्जाना भाजपा कार्यलय में लगी हैज का भुगतना पड़ा। जैसे ही मीना रैली के रूप में कार्यालय पहुंचे कार्यकर्ता कार्यालय के सर्किल में लगी जालियों पर मीना को देखने व नारेबाजी करने पहुंच गए। जालियों के पास हैज व गुलाब के कई पौधे लगे हुए थे। मीना को देखने का हजुम व धक्का-मुक्की के कारण कई बार कार्यकार्ता हैज पर गिरे, जिससे हैज व गुलाव के पौधों को नुकसान पहुंचा।

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