जयपुर

Rajasthan Cabinet Expansion: राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार पर BJP प्रभारी का बड़ा बयान, जानिए क्या बोले?

Rajasthan Politics: भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने कहा कि राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों का निर्णय केवल मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत फैसला नहीं होगा।
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Apr 08, 2026
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भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल और सीएम भजनलाल शर्मा। पत्रिका फाइल फोटो

जयपुर। भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने मंगलवार को भाजपा प्रदेश कार्यालय में पदाधिकारियों की बैठक ली और पिछले तीन महीनों के कार्यों की समीक्षा की। बैठक के बाद अग्रवाल ने पत्रकारों से कहा कि राजस्थान में मंत्रिमंडल विस्तार और राजनीतिक नियुक्तियों का निर्णय केवल मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत फैसला नहीं होगा, बल्कि संगठन और राष्ट्रीय अध्यक्ष से चर्चा के बाद ही अंतिम रूप लिया जाएगा।

प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने पूर्व सीएम वसुंधरा राजे के उस बयान का भी समर्थन किया, जिसमें उन्होंने राजनीतिक नियुक्तियों और संगठन दायित्व में पार्टी के मूल कार्यकर्ता को प्राथमिकता देने की बात कही। अग्रवाल ने कहा कि पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ता सुनवाई फिर से शुरू होगी। मंत्रियों के साथ अब पदाधिकारी भी अलग से कार्यकर्ता सुनवाई करेंगे।

हमारे यहां मुख्यमंत्री नहीं लेते सारे निर्णय

राधामोहन दास अग्रवाल ने कहा कि आप लोग हमेशा पूछते हैं कि मंत्रिमंडल विस्तार कब होगा, लेकिन अगर हम संतुष्ट होंगे तो किसी को क्यों बदलेंगे, क्यों विस्तार करेंगे। मुख्यमंत्री अपने मंत्रियों के कामों की लगातार समीक्षा कर रहे है। जब समय आएगा तो वे राष्ट्रीय अध्यक्ष से कहेंगे। उन्होंने साफ कहा कि हमारे यहां मुख्यमंत्री सारे निर्णय नहीं लेते है। जब महसूस करेंगे तो राष्ट्रीय अध्यक्ष से उन नामों पर चर्चा करेंगे।

संगठन के जिलों का पुनर्गठन जल्द

प्रशासनिक जिलों के अनुरूप संगठन के जिलों का पुनर्गठन किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश अध्यक्ष को अधिकृत कर दिया गया है और जल्द ही इसकी घोषणा भी होगी। पंचायत निकाय चुनाव में हो रही देरी के सवाल पर उन्होंने कहा कि उसमें पार्टी का कोई हस्तक्षेप नहीं होता।

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर कसा तंज

भाजपा के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत पर तंज कसते हुए कहा कि उनका ‘इंतजार शास्त्र’ अपने ही नेताओं पर निशाना साधता है। उनकी सरकार थी तो क्या था? उनके तत्कालीन डिप्टी सीएम ही उनकी सरकार का बट्टा बैठाने में लगे रहते थे। अंत में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने अपने ही तत्कालीन डिप्टी सीएम पर क्या-क्या टिप्पणियां कर दी और उन्हें उनके दायित्व से मुक्त कर दिया था।