kitchen Politics Jaipur: क्या पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव से जयपुर के कई इलाकों से सीधा कोई कनेक्शन है? जवाब होगा नहीं, लेकिन हकीकत एकदम उलट है। जैसे-जैसे ममता बनर्जी के गढ़ पश्चिम बंगाल में चुनावी रंगत परवान चढ़ रही है वैसे-वैसे खातीपुरा में भी पारा हाई हो रहा है। घर-घर बर्तन बज रहे है।
kitchen Politics Jaipur: क्या पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव से जयपुर के कई इलाकों से सीधा कोई कनेक्शन है? जवाब होगा नहीं, लेकिन हकीकत एकदम उलट है। जैसे-जैसे ममता बनर्जी के गढ़ पश्चिम बंगाल में चुनावी रंगत परवान चढ़ रही है वैसे-वैसे खातीपुरा में भी पारा हाई हो रहा है। घर-घर बर्तन बज रहे है। चूल्हे चौके का मिजाज भी बदल गया है।
अलसुबह हलचल शुरू हो जाती है, जो देर तक कायम रहती है। जिन पतियों को किचन से कोई सरोकार नहीं था, वे भी धमक के आगे हाथ बंटाने को विवश हो गए है। सच मानिए चुनाव वहां है और तनाव यहां।
दरअसल जयपुर में खातीपुरा और वैशाली नगर सहित अन्य इलाकों के घरों में काम करने वाली बाइयां लंबी छुट्टी लेकर पश्चिम बंगाल के चुनाव में वोट डालने चली गई है या फिर जाने वाली हैं। ज्यादातर ने एक से दो माह तक की छुट्टी ली है। खास बात यह है कि मतदान के लिए वहां से भी नेताओं-रिश्तेदारों के खूब कॉल आ रहे हैं। एक तरफ दबाव दूसरी ओर जमीन जायदाद हड़पने का डर उन्हें गाहे- बगाहे वोट डालने के लिए मजबूर कर रहा है। ऐसे में ये बाइयां परिवार के साथ लौट रहीं है। एकाएक बाइयों के जाने से घरों में डस्टिंग झाडू-पोछा बर्तन मांझने जैसे काम प्रभावित होने लगे हैं।
फुलवारी सुखने लगी है। छोटे बच्चों को लाने-ले जाने में पसीने छूट रहे हैं। यहां तक कि दुधमुंहों का भी अपनी बंगाली 'धाय' के जाने से रो-रोकर बुरा हाल है। कुछेक घरों में बुजुर्गों की दवा सेवा सब गड़बड़ा गए हैं। गृहिणियों की बस यही तमन्ना है कि जल्द से जल्द से बाइयां लौटें।