
Terracotta Artist Chandra Shekhar Sain: कला को ही मैंने अपना जीवन मान लिया है। कला मेरा पहला प्यार है और मैं इसे जीता हूं। अगर आप अपने मन के भावों और संवेदनाओं को अभिव्यक्त करना चाहते हैं, तो मिट्टी एक बेहतरीन माध्यम है। यह इंसान को संवेदनशील बनाती है। कभी मिट्टी को छूते ही अपने आप आकृतियां बनने लगती हैं, तो कभी किसी विचार या विषय को लेकर काम शुरू किया जाता है। यह कहना है टेराकोटा कलाकारचंद्र शेखर सैन का। इनकी कलाकृति ‘माय एंटायर वल्र्ड-1’ का चयन राष्ट्रीय ललित कला अकादमी पुरस्कार के लिए हुआ है।
पत्रिका से खास बातचीत में चन्द्र शेखर ने कहा कि कलाकृति तैयार करते समय मिट्टी को आकार देने से लेकर उसे सुखाने और पकाने तक की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण होती है। इस पूरी प्रक्रिया में 30 प्रतिशत काम टूटने या खराब होने के कारण खत्म हो जाता है।
जब पुरस्कार मिलने की सूचना मिली तो बहुत खुश हुआ और उन लोगों को याद करने लगा, जिनकी वजह से मेरे जीवन में सकारात्मक बदलाव आए। पिछले 20 साल से इस पुरस्कार के लिए आवेदन कर रहा था। छह हजार से अधिक कलाकृतियों में से मेरी कलाकृति को पुरस्कार के लिए चुना जाना गर्व की बात है।
यह कलाकृति मनुष्य के भीतर के संसार को दर्शाती है। इसमें मानव शरीर, पशु-पक्षी, प्रकृति और मेरे आसपास की दुनिया से जुड़े कई पहलुओं को शामिल किया गया है। इसमें योग की विभिन्न मुद्राओं को भी दर्शाया है। जिन चीजों रोज देखता हूं, उन्हीं से प्रेरित होकर ये कलाकृति तैयार की है। इस टेराकोटा कलाकृति को बनाने में दो साल लगे। इसमें 50 पीस शामिल हैं। इस कलाकृति को पकाते समय मेरा हाथ भी जल गया था, लेकिन मैंने काम जारी रखा।
बिल्कुल, मिट्टी को 900 डिग्री तक पकाने पर रंग कुछ अलग रहता है और इससे अधिक तापमान पर रंग बदलने लगता है। मेरी कलाकृति में चॉकलेटी गुलाबी रंग उभरकर आया, जो जयपुर के गुलाबी रंग के आसपास का आभास देता है।
कलाकार को जुनून और लगन के साथ काम करना चाहिए। जो भी काम करे, उसमें अपना 100 प्रतिशत समय और समर्पण देना चाहिए। कलाकार को अपने काम को केवल पेशे के रूप में नहीं, बल्कि जीवन के हिस्से के रूप में जीना चाहिए।
Ai कलाकारों के लिए काफी मददगार है। पहले मुझे अंग्रेजी अच्छी तरह समझ नहीं आती थी। फिर मैं Ai का उपयोग करने लगा। फिर मुझे पढऩे और कला को समझने में काफी आसानी हुई। एआइ से अन्य कलाकारों की कला को समझने में मदद मिलती है।