राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को अब स्कूल में चेस के गुर सीखने सिखाने का मौका मिलेगा। शिक्षा विभाग स्कूलों में 'नो बैग डे' के दौरान हर तीसरे शनिवार को स्कूलों में बच्चों को शतरंज खेला जाएगा। 'चेस इन स्कूल' कार्यक्रम के तहत इसकी शुरुआत की जा रही है।
राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों को अब स्कूल में चेस के गुर सीखने सिखाने का मौका मिलेगा। शिक्षा विभाग स्कूलों में 'नो बैग डे' के दौरान हर तीसरे शनिवार को स्कूलों में बच्चों को शतरंज खेला जाएगा। 'चेस इन स्कूल' कार्यक्रम के तहत इसकी शुरुआत की जा रही है।। शिक्षामंत्री डा. बीडी कल्ला ने इसकी पहल की है। गुरुवार यानी आज बीकानेर में शिक्षामंत्री एक राज्य स्तरीय समारोह में इसका औपचारिक आगाज किया जा रहा है। बीकानेर के रवींद्र मंच पर शिविरा पंचाग के तहत निर्धारित तीसरे शनिवार से पूर्व प्रेक्टिस एक्टिविटी के तहत इसका आगाज किया जा रहा है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक गौरव गोयल ने इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।
सभी जिला मुख्यालयों पर होगा आयोजन
शिक्षा निदेशक की ओर से दिए गए निर्देशों के तहत राजस्थान राज्य शतरंज संघ और जिला शतरंज संघ के सहयोग से स्टूडेंट्स को पहले शतरंज खेलने की प्रेक्टिस करवाई जाएगी। प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर स्थित हर स्कूल से कम से कम 20 स्टूडेंट्स को यह प्रेक्टिस करवाई जाएगी। इसके बाद इसी माह के तीसरे शनिवार यानी पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी की जयंती के अवसर प्रदेश के 60 हजार से अधिक स्कूलों में बच्चे स्कूल में शतरंज खेलेंगे।
राजस्थान पहला राज्य
देशभर में पहली बार राजस्थान में यह पहल होने जा रही है। इसके तहत प्रदेश के 60 हजार से अधिक स्कूलों में खेल ग्रांट से चेस बोर्ड अन्य आवश्यक सामग्री खरीदी जाएगी और बच्चों को शतरंज में पारंगत किया जाएगा। इतना ही नहीं शतरंज की जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। प्रतियोगिता दस और चौदह आयु वर्ग यह प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।
इसलिए लिया गया शतरंज खिलवाने का निर्णय
स्कूली बच्चों को शतरंज खिलाने का निर्णय उनके मस्तिष्क के समुचित विकास के लिए लिया गया है। इतना ही नहीं सरकार की मंशा है कि अधिक से अधिक बच्चे ग्रैंड मास्टर बनें। टीवी, मोबाइल और वीडियो गेम के जाल में फंसते जा रहे बच्चों का मानसिक विकास के लिए और विद्यार्थियों में सकारात्मक प्रतिस्पर्धा की भावना पैदा करने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
स्थाई लोक अदालत के अध्यक्ष महेश शर्मा ने कहा कि शतरंज खेल को प्रोत्साहित करने में चेस इन स्कूल देश का सबसे बघ माध्यम बनेगा। उन्होंने 10 और 14 वर्ष आयु वर्ग में भी यह प्रतियोगिताएं आयोजित करने की बात कही।