जयपुर

चिमनपुरा जमीन विवाद: जेडीए के 90-बी आदेश पर रोक, 22 सितंबर को सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि निर्देशों का उल्लंघन होने पर संबंधित पीठासीन अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार और जवाबदेह होंगे। कोर्ट की सख्ती उन मामलों की पृष्ठभूमि में आई थी, जहां अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ जेडीए की कार्रवाई अंतरिम आदेशों के कारण लंबे समय तक अटकी रहने की बात सामने आई थी। कोर्ट ने ऐसी स्थिति को चौंकाने वाला बताया था।
2 min read
Sep 08, 2026
jaipur jda office
जयपुर जेडीए परिसर (File Photo)

जयपुर। जयपुर में चिमनपुरा गांव में एक जमीन विवादित मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इसी बीच 19 अगस्त को अपील संख्या 877/2025 में जेडीए जोन-2 के 16 सितंबर 2005 के आदेश के प्रभाव पर जयपुर संभागीय आयुक्त वी. सरवाना ने हाल ही अंतरिम रोक लगा दी। मामला 90-बी की कार्रवाई से जुड़ा है। मामले की अगली सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में 22 सितंबर को होगी। अपीलकर्ताओं का आरोप है कि मूल 90-बी की कार्रवाई बिना नोटिस दिए की गई थी। हालांकि इस अंतरिम आदेश का समय इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट जयपुर विकास प्राधिकरण मामलों में लंबे समय तक जारी रहने वाले स्टे को लेकर गंभीर चिंता जता चुका है।

सुप्रीम कोर्ट ने निपटारे के दिए थे निर्देश

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त को लोगनाथन मामले की सुनवाई के दौरान जेडीए से जुड़े मामलों में अपीलीय अधिकारियों की ओर से दिए जाने वाले अंतरिम आदेशों और उनके लंबे समय तक जारी रहने पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने संबंधित अपीलीय प्राधिकारी को ऐसे मामलों का अंतिम फैसला दो सप्ताह में करने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि निर्देशों का उल्लंघन होने पर संबंधित पीठासीन अधिकारी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार और जवाबदेह होंगे। कोर्ट की सख्ती उन मामलों की पृष्ठभूमि में आई थी, जहां अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ जेडीए की कार्रवाई अंतरिम आदेशों के कारण लंबे समय तक अटकी रहने की बात सामने आई थी। कोर्ट ने ऐसी स्थिति को चौंकाने वाला बताया था।

अब नए स्टे के असर पर उठे सवाल

ऐसे में 19 अगस्त को जारी अंतरिम रोक का दायरा महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में यह आदेश सिर्फ विवादित जमीन पर पक्षकारों के अधिकारों को अंतिम निर्णय तक सुरक्षित रखता है या इसका असर जेडीए की प्रवर्तन कार्रवाई पर भी पड़ता है। इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त के आदेश को संबंधित पीठासीन अधिकारी तक तत्काल पहुंचाने और जेडीए आयुक्त को अनुपालन के संबंध में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए थे। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि चिमनपुरा में दिया गया स्टे जेडीए को कथित अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई से रोकता है या नहीं।

मामला सिर्फ जमीन का नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने 20 मई की सुनवाई में भी न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद संरचनाओं के बने रहने पर चिंता जताई थी और अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए थे। अब 22 सितंबर की सुनवाई में यह देखना अहम होगा कि चिमनपुरा मामले में अंतरिम संरक्षण किस सीमा तक लागू रहता है। सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्देशों का इस मामले पर क्या असर पड़ता है।

Updated on:
08 Sept 2026 05:49 pm
Published on:
08 Sept 2026 05:49 pm