
Choti Diwali 2026: जयपुर: भारतीय संस्कृति में त्योहार केवल उत्सव मनाने के अवसर नहीं होते, बल्कि वे जीवन को नई दिशा देने और समाज को सकारात्मक संदेश देने का माध्यम भी हैं। दीपावली से एक दिन पूर्व मनाया जाने वाला छोटी दीपावली का पर्व, जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है, इसी आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक है। छोटी दीपावली का धार्मिक महत्व भगवान श्रीकृष्ण द्वारा नरकासुर के वध से जुड़ा हुआ है।
पौराणिक मान्यता के अनुसार, नरकासुर नामक अत्याचारी असुर ने देवताओं और सामान्य जनजीवन को परेशान कर रखा था। भगवान श्रीकृष्ण ने उसका अंत कर लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई। इसी विजय की स्मृति में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है। यह पर्व हमें संदेश देता है कि अन्याय और अत्याचार चाहे कितने ही शक्तिशाली क्यों न हों, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है।
इस दिन प्रातःकाल अभ्यंग स्नान, दीपदान और घर-आंगन की स्वच्छता का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन दीप जलाने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है। घरों में दीपक सजाए जाते हैं और दीपावली के मुख्य पर्व की तैयारियाँ उत्साह के साथ पूरी की जाती हैं।
राजस्थान में छोटी दीपावली का अपना विशिष्ट सांस्कृतिक रंग दिखाई देता है। यहां घरों की सफाई, रंगोली, पारंपरिक सजावट, मिट्टी के दीपकों और पूजन की तैयारियों के साथ उत्सव का वातावरण बन जाता है। बाजारों में रौनक दिखाई देती है और परिवार के सदस्य मिलकर त्योहार की खुशियां बांटते हैं। मिट्टी के दीपक हमारी लोकपरंपरा, कुम्हारों के श्रम और स्वदेशी भावना से भी जुड़े हुए हैं।
आज के बदलते समय में छोटी दीपावली का संदेश और भी प्रासंगिक हो गया है। हम अपने घरों और आसपास की सफाई तो करते हैं, लेकिन क्या कभी अपने मन के भीतर झाँककर भी देखते हैं? क्या हमारे भीतर ईर्ष्या, द्वेष, क्रोध, अहंकार और कटुता जैसी नकारात्मक भावनाएँ तो नहीं हैं? वास्तव में छोटी दीपावली हमें इन बुराइयों को समाप्त करने और जीवन में प्रेम, करुणा, सहयोग तथा सद्भाव का प्रकाश फैलाने की प्रेरणा देती है।
वर्तमान समय में पर्यावरण संरक्षण भी हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है। त्योहार की खुशियाँ मनाते समय हमें ध्वनि और वायु प्रदूषण से बचना चाहिए। मिट्टी के दीपक जलाने, स्थानीय कारीगरों से खरीदारी करने और जरूरतमंद परिवारों के साथ खुशियाँ बाँटने से त्योहार का आनंद और अधिक सार्थक बन सकता है।
छोटी दीपावली का वास्तविक अर्थ केवल दीप जलाना नहीं, बल्कि अपने विचारों और व्यवहार में उजाला लाना है। यदि हम किसी दुखी व्यक्ति के चेहरे पर मुस्कान ला सकें, किसी जरूरतमंद की सहायता कर सकें और अपने संबंधों में प्रेम तथा विश्वास बनाए रख सकें, तो यही इस पर्व की सच्ची सार्थकता होगी।
आइए, नरक चतुर्दशी के पावन अवसर पर हम संकल्प लें कि अपने जीवन से अज्ञान, अहंकार, ईर्ष्या और वैमनस्य के अंधकार को दूर करेंगे तथा ज्ञान, सद्भाव, मानवता और सकारात्मकता के दीप प्रज्वलित करेंगे। क्योंकि सच्ची दीपावली वही है, जिसमें केवल घर ही नहीं, बल्कि हर मन भी प्रकाश से आलोकित हो।
रिपोर्ट: डॉ. लीलाधर दोचानिया