
नई दिल्ली.
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) की अदालतों के दीवानी फैसले अब भारत में भी लागू होंगे। केंद्र सरकार ने इस संबंध में अधिूसचना जारी कर दी है। इस घोषणा के साथ केंद्र ने कहा कि कोड ऑफ सिविल प्रोसीजर (सीपीसी) की धारा 44 ए के अधीन संयुक्त अरब अमीरात को पारस्परिक क्षेत्र (रेसिप्रोकेटिंग टेरेटरी) का दर्जा दिया गया है। इसका मतलब यह हुआ कि यूएई की चयनित अदालतों के फैसले अब भारत में भी वैसे ही लागू होंगे जैसे भारत के स्थानीय अदालतों के फैसले लागू होते हैं।
यूएई की इन आदालतों के फैसले भारत में भी लागू होंगे
(1) संघीय न्यायालय
-संघीय सुप्रीम कोर्ट
-अबू धाबी, शारजाह, अजमान, उम अल क्वेन और फुजैरा की संघीय, प्रथम दृष्ट्या और अपीली अदालत
(2) स्थानीय न्यायालय
-अबू धाबी न्यायिक विभाग
-दुबई की अदालतें
-रास अल खैमा के न्यायिक विभाग
-अबू धाबी वैश्विक बाजार के न्यायालय
-दुबई अंतरराष्ट्रीयय वित्तीय केंद्र की अदालतें
ये है कानूनी प्रावधान
विदेशी अदालतों के फैसले का साक्ष्यात्मक मूल्य भारतीय अदालतों में तब तक नहीं है जब तक कि उन्हें पारस्परिक क्षेत्र (देश) नहीं घोषित किया जाता है जो सीपीसी की धारा 44ए के तहत भारतीय अदालतों के फैसलों को लागू करने की घोषणा करते हैं। हालांकि, यह बात सिर्फ दीवानी फैसलों पर ही लागू होगी।
20 साल बाद संधि पूर्ण
1999 में भारत और यूएई के बीच दीवानी और वित्त संबंधी सहयोग की संधि हुई थी। लेकिन पारस्परिक क्षेत्र का दर्जा नहीं देने के कारण ये लागू नहीं हो पाई।
ये होगा असर
- वित्तीय मामलों में सहायक साबित होगी
- लोन डिफॉल्टर और चेक बांउस कर भारत भाग जाने वाले लोगों पर कानूनी कार्रवाई में आसानी होगी
- तलाक के मामलों में यूएई की अदालतों के फैसले भारत में लागू होंगे
- दोषियों पर भारत में नए सिरे से मामला दर्ज करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी
भारत- यूएई संबंध
-हिंदी है आबूधाबी की अदालतों में इस्तेमाल होने वाली तीसरी आधिकारिक भाषा। फरवरी, 2019 में अरबी और अंग्रेजी के बाद मिला दर्जा
-30 प्रतिशत भारतीय प्रवासी हैं यूएई की कुल जनसंख्या का हिस्सा
-1,076 उड़ानें हैं प्रति सप्ताह भारत और यूएई के बीच
- यूएई ने भारतीयों के लिए वीजानियमों में भी कई तरह की छूट दे रखी है
-भारत ने भी 2015 से यूएई के नागरिकों के लिए ई-वीजा की सुविधा दी है
- चीन और अमरीका के बाद भारत यूएई का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेड पार्टनर है