
Jaipur: पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी।
जयपुर। पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने कहा कि आगामी 50 वर्षों तक समाचार पत्र उद्योग को कोई खतरा नहीं है। मीडिया में सबसे अधिक विश्वसनीय माध्यम आज भी अखबार हैं और यही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। जितना अधिक विश्वसनीय अखबार होगा, वह उतना ही परिवारों की जरूरत बनकर आगे बढ़ेगा। कोठारी शुक्रवार को जवाहर सर्किल स्थित होटल मैरियट में भारतीय पल्प एवं पेपर टेक्निकल एसोसिएशन (आईपीपीटीए) के दो दिवसीय जोनल सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। 'पॉलिसी, सस्टेनेबिलिटी एंड टेक्नोलॉजी कन्वर्जेंस' विषय पर आयोजित सेमिनार में कागज उद्योग के भविष्य, नई तकनीकों और नीतिगत चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। इस दौरान गुलाब कोठारी का सम्मान किया गया तथा आईपीपीटीए जर्नल के नवीनतम अंक को लांच भी किया गया।
गुलाब कोठारी ने कहा कि सरकार ने कुछ नीतियां बनाईं और कुछ छोटे पेपर मिल यहां स्थापित हुए। आज सब बंद हो चुके हैं। तकनीक के दौर में आज दुनिया इतनी बदल चुकी है। आगे अब हमारी शिक्षा का स्तर बहुत बढ़ेगा। अखबार का संबंध केवल प्रौद्योगिकी से नहीं, बल्कि ज्ञान और संस्कृति से है। यह समाज का सबसे विश्वसनीय वाहक है। उन्होंने कहा कि कागज आज केवल एक उत्पाद नहीं, बल्कि शिक्षा और ज्ञान का आधार है। भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी शक्ति रही है, लेकिन वर्तमान शिक्षा व्यवस्था ने उस शक्ति को नष्ट कर दिया है।
कोठारी ने कहा कि आज की शिक्षा व्यवस्था ने रोजगार के अवसर तो बढ़ाए हैं, लेकिन इंसान को केवल 'ह्यूमन रिसोर्स' बनाकर छोड़ दिया है। एआइ के दौर में अब हम उस गति से बदल पाएंगे या नहीं सोचने का विषय है। आज जो पेपर उद्योग टिक रही है, वह भी अपने मुनाफे के लिए काम नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि उद्योगों को भी समय के साथ बदलना होगा। कागज उद्योग में भविष्य में उत्पादन प्रक्रिया, गुणवत्ता और प्रदूषण नियंत्रण के क्षेत्र में बड़े बदलाव होंगे। भारतीय श्रम प्रबंधन की सबसे बड़ी ताकत उसकी मानवीय सोच है, जहां कर्मचारियों के सुख-दुख का भी ध्यान रखा जाता है।
आईपीपीटीए के अध्यक्ष एस.वी.आर. कृष्णन ने कागज उद्योग में सर्कुलर इकोनॉमी, कार्बन उत्सर्जन में कमी, संसाधनों के कुशल उपयोग और डिजिटल तकनीकों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारतीय कागज उद्योग की वार्षिक उत्पादन क्षमता करीब तीन करोड़ टन है तथा इसमें कृषि अवशेष, लकड़ी और रिसाइकल फाइबर का व्यापक उपयोग हो रहा है। प्रतिभागियों को उद्योग की नवीनतम तकनीकों, सरकारी नीतियों, शोध एवं नवाचारों की जानकारी मिली। साथ ही स्टॉल्स पर उत्पाद प्रदर्शन और उद्योगों के बीच नेटवर्किंग के अवसर भी उपलब्ध हुए। पूर्व अध्यक्ष अनिल कुमार सहित अन्य आईपीपीटीए के पदाधिकारियों ने विचार रखें।
सेमिनार में अलग-अलग उद्योग जगत, तकनीकी विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधकर्ता और नीति-निर्माताओं ने अलग-अलग सेशन पर एक मंच पर आकर विचार-विमर्श किया। सेमिनार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग, जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता पर भी तकनीकी सत्र हुए।
Updated on:
10 Jul 2026 10:48 pm
Published on:
10 Jul 2026 10:32 pm
