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राजस्थान में UCC पर जनता की परीक्षा! शादी, तलाक और संपत्ति से जुड़े 19 सवालों पर सुझाव मांग रही सरकार

Rajasthan UCC: राजस्थान समान नागरिक संहिता 2026 को लेकर जयपुर जिला कलक्ट्रेट में हुई बैठक में शामिल विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, अधिवक्ता, सामाजिक संगठनों के सदस्य और अन्य वर्गों के लोगों ने कई मुद्दों पर चर्चा की।
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Rajasthan Uniform Civil Code 2026

photo source- AI

Rajasthan UCC: राजस्थान समान नागरिक संहिता 2026 को लेकर जयपुर जिला कलक्ट्रेट में हुई बैठक में शामिल विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, अधिवक्ता, सामाजिक संगठनों के सदस्य और अन्य वर्गों के लोगों ने कई मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में शामिल हवामहल विधायक बाबा बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि सभी पक्षों को अपनी बात रखने का अवसर दिया गया है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि वह देशहित के मुद्दों का विरोध करती है।

चार पत्नी रखने का नहीं होगा समर्थन

भाजपा विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि क्या कुछ लोग शरिया कानून लागू करना चाहते हैं, उन्होंने कहा कि जब देश और दुनिया आगे बढ़ रहे हैं, तब ये चाहते हैं कि कोई चार पत्नी रखेगा। इस तरह की बात का कोई समर्थन नहीं होगा। हवामहल विधायक ने आगे कहा कि मैं प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद देना चाहता हूं कि उन्होंने तीन तलाक का कानून बनाया। इससे माता और बहनों के अधिकारों का संरक्षण हो रहा है।

कुछ लोगों की मंशा सही नहीं

उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज में मृत्यु भोज सबसे बड़ा रीति रिवाज को कुरीति माना गया और उसके खिलाफ कानून बना।
कानून को मानते हुए आज हिंदू समाज में मृत्यु भोज बंद कर किया गया है। विवाह में व्यर्थ के खर्चे होना, दान दहेज देने की प्रथा भी बंद होनी चाहिए। देश में कुछ लोग चाहते हैं, शरिया कानून बन जाए और समाज में प्रचलित प्रथाओं का चलन भी बना रहे, ऐसा नहीं होना चाहिए।

लिव-इन रिलेशनशिप की वैधता पर भी चर्चा

समिति के अध्यक्ष शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि बैठक में मुस्लिम और हिंदू पक्ष दोनों ने यह बात रखी कि लिविंग रिलेशनशिप को वैध नहीं करना चाहिए। लोगों ने यह भी कहा कि समाज में लव मैरिज माता-पिता की अनुमति से ही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि लगभग सभी लोग यूसीसी को लागू करने के पक्ष में हैं। हालांकि बैठक में मुस्लिम पक्ष की ओर से यह उनके फैमिली लॉ और पर्सनल लॉ को लेकर भी सुझाव सामने आए।

UCC पर नागरिकों से पूछे 19 सवाल

क्या वे संविधान के अनुच्छेद-44 में समान नागरिक संहिता के प्रावधान से परिचित हैं?
क्या वे राजस्थान में यूसीसी लागू करने के पक्ष में हैं?
क्या यूसीसी संविधान के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन किए बिना लागू की जा सकती है?
क्या विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, वसीयत और लिव-इन संबंधों को यूसीसी में शामिल किया जाए?
धर्म आधारित पारिवारिक कानूनों के कई प्रावधानों में पुरुषों एवं महिलाओं के अधिकारों के साथ अलग-अलग व्यवहार होता है। क्या आप सहमत हैं कि इस प्रकार के भेदभावपूर्ण व्यवहार को समाप्त किया जाना चाहिए?
क्या विवाह विच्छेद / तलाक का अनिवार्य पंजीकरण होना चाहिए?
क्या सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होने वाले विवाह विच्छेद /तलाक के एक जैसे आधार होने चाहिए?
क्या विवाह विच्छेद / तलाक की स्थिति में भरण-पोषण के लिए एक समान विधि होनी चाहिए?
क्या समान सिविल संहिता के प्रभावी होने से पारिवारिक विवादों में कमी आएगी तथा विधिक प्रक्रियाएं अधिक प्रभावी एवं सरल बनेंगी?
क्या समान सिविल संहिता के अन्तर्गत सभी समुदायों में पुरुषों एवं महिलाओं के लिए समान सम्पत्ति अधिकार सुनिश्चित होना चाहिए?
क्या समान सिविल संहिता में सहमति से लिव-इन संबंधों में रहने वाली महिलाओं एवं पुरुषों के अनिवार्य पंजीकरण का प्रावधान होना चाहिए?
क्या समान सिविल संहिता में लिव-इन संबंधों में रहने वाली महिलाओं एवं पुरुषों के रजिस्ट्रेशन से इनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी?
क्या लिव-इन संबंधों की समाप्ति पर विवाह विच्छेद के फलस्वरूप जो अधिकार निर्मित होते हैं, वैसे ही अधिकार निर्मित होने चाहिए?
क्या समान सिविल संहिता के अन्तर्गत लिव-इन संबंधों में रहने वाली महिलाओं एवं उनसे जनित संतानों के भरण-पोषण के प्रावधानों को सम्मिलित किया जाए?
क्या लिव-इन में रहने वालों के लिए उत्तराधिकार संबंधी प्रावधानों को सम्मिलित किया जाए?
क्या बहुविवाह प्रथा से महिला के अधिकार सुरक्षित नहीं रहते हैं?
क्या समान सिविल संहिता से समाज में प्रचलित रूढ़िवादी सामाजिक कुप्रथाओं को समाप्त किया जा सकेगा?
क्या स्वःअर्जित सम्पत्ति का वसीयत द्वारा निस्तारण करने हेतु एक जैसे प्रावधान होने चाहिए?
क्या उत्तराधिकार से सम्पत्ति के निस्तारण के समान प्रावधान होने चाहिए?