
जयपुर। राजधानी जयपुर के बगरू विधानसभा क्षेत्र में कॉकरोच जनता पार्टी की टीम और ग्रामीणों के बीच हुए जमकर हंगामे के बाद सियासत गरमाई हुई है। इसी बीच सीजेपी प्रवक्ता आशुतोष रांका की एक पुरानी तस्वीर वायरल हो रही है। जिसमें वो कांग्रेसी नेताओं के साथ नजर आ रहे हैं। यह तस्वीर सामने आने के बाद आशुतोष रांका ने सफाई दी। साथ ही यह भी बताया कि यह तस्वीर कब की है? वहीं, सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आशुतोष रांका और उनकी टीम पर हुए हमले के बाद जयपुर के कंवरापुरा स्कूल के बाहर दिल्ली के जंतर-मंतर की तर्ज पर धरना देने का एलान किया है।
अंशुल सक्सेना नाम के यूजर्स ने आशुतोष रांका की फोटो एक्स पर अपलोड करते हुए लिखा कि अशोक गहलोत के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के दौरान राजस्थान में बार-बार पेपर लीक की घटनाएं हुईं। उस समय, 2018 से 2023 के बीच हुई 19 से 23 पेपर लीक की घटनाओं को लेकर राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाने की जहमत भी आशुतोष रांका ने नहीं उठाई। इसके बजाय उन्हें कांग्रेस नेताओं के साथ घूमते हुए देखा गया। लेकिन अब स्कूलों का दौरा करना और उन्हें राजनीतिक मंच में बदलना अचानक प्राथमिकता बन गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही फोटो में आशुतोष रांका कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के साथ नजर आ रहे है।
कांग्रेस नेताओं के साथ फोटो वायरल होने के बाद आशुतोष रांका ने सफाई दी। उन्होंने एक्स पर लिखा कि इस तस्वीर से पुरानी यादें ताजा हो गईं। साथ ही यह भी बताया की यह फोटो कब की है। उन्होंने कहा कि यह फोटो 'डोल का बाध' आंदोलन से जुड़ी है। जब हम जयपुर में 100 एकड़ के शहरी जंगल को बचाने के लिए लड़ रहे थे। लंदन से लौटने के बाद यह मेरा पहला आंदोलन था। इस जंगल में प्रवासी पक्षियों समेत 70 से ज़्यादा तरह के पक्षी पाए जाते हैं। आंदोलन के दौरान टीकाराम जूली और गोविंद सिंह डोटासरा अपना समर्थन देने आए थे। उस दौरान सचिन पायलट भी आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि राजस्थान सरकार जंगल को खत्म करके वहां एक मॉल बनाना चाहती थी। जंगल का 20 प्रतिशत हिस्सा पहले ही खत्म हो चुका है। 80 प्रतिशत अभी भी बचा हुआ है। हम इसके लिए आगे भी लड़ते रहेंगे।
बता दें कि बगरू विधानसभा क्षेत्र के रामपुरा-कंवरपुरा गांव स्थित राजकीय प्राथमिक स्कूल की बदहाल स्थिति का शुक्रवार को जायजा लेने पहुंची सीजेपी टीम और ग्रामीणों के बीच जमकर हंगामा हुआ था। मामूली कहासुनी धक्का-मुक्की और फिर मारपीट में बदल गई थी। कुछ लोगों ने सीजेपी कार्यकर्ताओं को दौड़ाकर पीटा। सीजेपी ने भाजपा समर्थकों पर हमले का आरोप लगाया था। जबकि ग्रामीणों ने राजनीतिक दखलअंदाजी का विरोध करते हुए कहा कि वे स्कूल की मरम्मत खुद करा लेंगे। मारपीट के मामले को लेकर आशुतोष रांका ने सरकार में 48 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर आरोपियों को गिरफ्तार नहीं किया तो प्रदेशभर में आंदोलन होगा। इस मामले को लेकर कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जूली सहित कई कांग्रेस नेताओं भी बीजेपी पर निशाना साधा था।