
जयपुर
स्वस्थ रहने के लिए स्वच्छ रहने के साथ ही स्वच्छ खान पान भी बेहद जरूरी है। इसके अभाव में हेपेटाईटिस की बीमारी शरीर में घर करने की पूरी आशंका रहती है। यह ऐसी बीमारी है जिसमें हेपेटाईटिस बी और सी से संक्रमित करीब 90 फीसदी लोगों को सामान्य लक्षण होने के कारण इस बीमारी का पता ही नहीं चलता है। ऐसे में हेपेटाईटिस के वायरस सीधे ही लिवर को नुकसान पहुंचाकर जानलेवा बन जाते हैं। हेपेटाईटिस अभी दुनिया में सबसे खतरनाक बीमारी के रूप में सामने आ रही है। अपंगता बढ़ाने के साथ ही यह जानलेवा भी बन रही है। संक्रामक होने के कारण यह एक व्यक्ति से दूसरे में फैल भी जाती है।
विशेषज्ञ डॉ. अमित सांघी का कहना है कि हेपेटाइटिस बी और सी सबसे खतरनाक होता है। शराब पीने के कारण हेपेटाईटिस सी का खतरा रहता है। चिकित्सकों के मुताबिक इस बीमारी का प्रारंभिक अवस्था में ही जांच करवा कर इलाज करवाकर इससे बचा जा सकता है। गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. मनोहरलाल शर्मा का कहना है कि हेपेटाइटिस सी का वायरस संक्रमित खून चढ़ाए जाने से भी शरीर में पहुंच जाता है। इसके अलावा नशा, असुरक्षित यौन संबंध से भी यह रोग फैलता है।
यह होता है हेपेटाईटिस
हेपेटाईटिस प्रमुख रुप से ए,बी,सी और ई प्रकार के होते हैं। वरिष्ठ पेट आंत एवं लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ साकेत अग्रवाल का कहना है कि हेपेटाइटिस एक प्रकार का सक्रंमण है। शुरूआती तौर पर इसका पता नहीं लगने पर यह आगे चलकर एक्यूट लीवर फेलीयर या लीवर सिरायसिस के रूप में बदल जाता है जो कई बार लाईलाज बन जाता है।
हेपेटाईटिस के लक्षण
वरिष्ठ पेट ऑत एवं लिवर रोग विशेषज्ञ डॉ मनोहर लाल शर्मा का कहना है कि भूख का नहीं लगना, चमड़ी और आंखों में पीलापन होना, पेट दर्द रहना, हमेशा हल्का बुखार बना रहना इस बीमारी के शुरूआती लक्षण हैं। जिन्हें नजरअंदाज नहीं कर उपचार लेना चाहिए।
हेपेटाईटिस के कारण
हेपेटाईटिस ए और ई का मुख्य कारण संक्रमित भोजन करना, स्वच्छ पानी का इस्तेमाल नहीं करना,
हाथों को सही से नहीं धोना, हेपेटाईटिस बी और सी के मुख्य कारणों में माता पिता के संक्रमित होने, असुरक्षित यौन संबंध, रक्त आधान, संक्रमित इंजेक्शन का इस्तेमाल समेत अन्य कारण होते हैं।
ये बचाव और उपचार
हेपेटाईटिस ए व ई का तो बचाव ही उपचार है। हेपेटाईटिस बी का टीकाकरण कराने से भी इसका बचाव संभव है। चीफ ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ अंकुर अटल गुप्ता का कहना है इस बीमारी की रोकथाम क लिए सरकारी स्तर पर टीकाकरण भी करवाए जाते हैं। ऐसे में हेपेटाईटिस बी का जरूर लगवाना चाहिए।