
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश के अफसरों के साथ ढाई घंटे तक वीसी के माध्यम से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से जनता की समस्याओं का समय पर निदान करने के निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने यह भी कह दिया कि हम से नहीं तो कम से कम भगवान से तो डरें। हम तक आपकी कोई बात नहीं आएगी, हम भले ही उसे नहीं देख पाएं, लेकिन एक ऐसी शक्ति तो सब कुछ देख ही रही है। इसलिए कम से कम उस शक्ति का तो ख्याल रखें। भगवान से कुछ नहीं छिपा है।
सीएम ने प्रदेशभर के वरिष्ठ आइएएस अफसर, जिला कलक्टर, एसपी, उपखंड अधिकारियों के साथ चर्चा की। यह बैठक शाम छह बजे शुरू हुई, जो रात्रि साढ़े आठ बजे तक चली। इस दौरान उन्होंने बिजली, पानी, अवैध खनन पर ज्यादा फोकस रखा। उन्होंने कहा कि यदि लोगों की शिकायतें उपखंड-जिला स्तर पर ही दूर हो जाएं, तो उन्हें जयपुर आना ही नहीं पड़े। मेरे पास प्रतिदिन जनसुनवाई में दूर-दूर से लोग अपनी शिकायत लेकर आ रहे हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए।
अधिकारियों ने टोका
वीसी के दौरान नागौर कलक्टर से कृषि के लिए बिजली देने का समय पूछा तो छह की जगह वे 9 घंटे बोल गए। सीएम ने कहा कि आपको ध्यान नहीं है। सीएस ने भी कलक्टर को टोका और कहा कि ठीक से पता करें कितने घंटे बिजली आ रही है। झालावाड़ कलक्टर से भी कई मुद्दों पर मुख्यमंत्री की बात हुई।
ये भी दिए निर्देश
- सभी अधिकारी समय पर कार्यालय आएं और पूरे दिन कार्यालय में रहें।
- अवैध खनन माफियाओं पर कार्रवाई रुकनी नहीं चाहिए।
- अपराधियों पर सख्ती हो, जिससे भयमुक्त माहौल बने।
- भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाएं।
- हर घर नल से जल प्राथमिकता, जल जीवन मिशन को गति दें।
- राजस्व से संबंधित लंबित मामलों को जल्द सुलझाने के प्रयास करें।
- लंबित मामलों की सूची बनाकर उनकी नियमित मॉनिटङ्क्षरग करें।
- कलक्ट्रेट, उपखंड कार्यालयों, तहसील कार्यालयों और नगरपालिकाओं में ई-फाइल प्रणाली को क्रियान्वित करें।
- किसानों को रबी सीजन में सुचारू रूप से बिजली की उपलब्धता रहे।
- चिकित्सालयों व विद्यालयों का औचक निरीक्षण हो।
- निरक्षरता को घटाने का प्रयास करें तथा शिक्षा की गुणवत्ता की समीक्षा करें।
- नियमित रूप से श्रीअन्नपूर्णा रसोई का औचक निरीक्षण करें।
- नियमित रूप से जनसुनवाई सुनिश्चित करें।
- पानी की चोरी तथा अवैध कनेक्शन के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।
- आमजन को त्वरित न्याय मिले और सुगमता से उसकी एफआइआर दर्ज हो।
- थानों में पीडि़त लोगों के लिए सकारात्मक वातावरण बनें।
- सोशल मीडिया की वजह से उत्पन्न होने वाली अप्रिय स्थिति को रोकने पर ध्यान केंद्रित करें।
- महिलाओं और बच्चों के प्रति होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने के लिए मुस्तैदी बरतें जाए।
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- लंबे समय से जमे अधिकारियों को हटाएं।
- पुलिस की कार्यशैली को आधुनिक, पब्लिक फ्रेंडली एवं प्रो-एक्टिव बनाएं।
- जिला पुलिस अधीक्षक थानों का निरीक्षण करें तथा नियमित रूप से सीएलजी की बैठक करें।