जयपुर

लीड : सीएम विजय ने सर्वदलीय बैठक की मांग ठुकराई, ‘राज्य के हित के लिए अपमान सहने को भी तैयार’

Aug 08, 2026
Rajasthan

चेन्नई. कावेरी जल विवाद और कर्नाटक की प्रस्तावित मेकेडाटू बांध परियोजना को लेकर शुक्रवार को तमिलनाडु विधानसभा में तीखी बहस देखने को मिली। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने कर्नाटक के साथ सीधे बातचीत के अपने प्रस्ताव का बचाव करते हुए कहा कि अगर संवाद के किसी प्रयास से राज्य के हितों की रक्षा हो सकती है, तो वे अपमान सहने के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं। विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन के साथ हुई बहस के दौरान मुख्यमंत्री ने सर्वदलीय बैठक बुलाने की विपक्ष की मांग को स्पष्ट रूप से खारिज कर दिया।
मुख्यमंत्री विजय ने विपक्षी दलों से इस अंतरराज्यीय विवाद को राजनीतिक रंग न देने की अपील की। उन्होंने सदन में कहा कि मेकेडाटू बांध के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की कोई आवश्यकता नहीं है और इस विषय पर ओछी राजनीति नहीं की जानी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार कावेरी के पानी पर तमिलनाडु के कानूनी अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगी। सरकार ने इस मुद्दे पर जनता के भावनात्मक जुड़ाव को ध्यान में रखते हुए अपना रुख पहले ही स्पष्ट कर दिया है।
बहस के दौरान मुख्यमंत्री ने बताया कि मेकेडाटू बांध के खिलाफ सर्वसम्मत प्रस्ताव पारित करने के बाद राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपना पक्ष स्पष्ट किया था। पत्र में कावेरी जल विवाद ट्रिब्यूनल के अंतिम फैसले और कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए केंद्र सरकार से कर्नाटक को इस परियोजना की अनुमति न देने का आग्रह किया गया था।

राज्य का रुख हमेशा वार्ता का रहा है
विजय ने 1969 से अब तक विधानसभा में हुए विचार-विमर्श का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य का रुख हमेशा बातचीत और कानूनी विकल्पों के समन्वय पर आधारित रहा है, लेकिन वे पुरानी बातों को उठाकर राजनीतिक लाभ हासिल नहीं करना चाहते।

Bउदयनिधि ने उठाए सवालB
दूसरी ओर, विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब कर्नाटक सरकार मेकेडाटू बांध के निर्माण के लिए एकजुट होकर कदम उठा रही है, तो तमिलनाडु सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाने से क्यों हिचकिचा रही है? उन्होंने मांग की कि तमिलनाडु के सभी राजनीतिक दलों को एक मंच पर आकर इस परियोजना का विरोध दर्ज कराना चाहिए। इसके साथ ही उदयनिधि ने मुख्यमंत्री की प्रस्तावित कर्नाटक यात्रा को लेकर मंत्रियों के परस्पर विरोधी बयानों पर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
सदन में यह टकराव केवल कावेरी जल विवाद तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि राहत पैकेज और अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर भी दोनों पक्षों में जुबानी जंग हुई। मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तंज कसते हुए कहा कि अखबार पढ़ने वालों को पता होता है कि राहत पैकेज बांटा जा रहा है। इसका पलटवार करते हुए उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि 134 करोड़ रुपए के विशेष पैकेज और सूखा राहत कोष के वास्तविक वितरण का ब्योरा देना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने चुनाव के दौरान टीवीके द्वारा किए गए कृषि ऋण माफी के वादे को पूरा करने के लिए निश्चित समय-सीमा तय करने की भी मांग की।

Updated on:
08 Aug 2026 06:01 am
Published on:
08 Aug 2026 06:01 am