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जयपुर में रितुराज लोहार मौत मामले में बड़ा अपडेट, सांप के डसने की कहानी पर उठे सवाल; पूर्व मंत्री ने लगाए गंभीर आरोप

राजधानी जयपुर में 19 साल के रितुराज लोहार की मौत के बाद मुहाना थाना पुलिस पर अवैध हिरासत में मारपीट का आरोप लगा है। परिवार का दावा है कि पुलिस ने सांप काटने की बात कहकर मामला छिपाने की कोशिश की। मानवाधिकार आयोग ने पुलिस कमिश्नर और कलेक्टर से रिपोर्ट मांगी है।
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जयपुर

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Arvind Rao

•

Oct 07, 2026

jaipur rituraj lohar death case

मृतक रितुराज (फोटो पत्रिका नेटवर्क)

Jaipur Rituraj Lohar Death Case: जयपुर में रितुराज लोहार (19) की मौत के बाद मुहाना थाना पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठे हैं। परिजनों ने आरोप लगाया है कि रितुराज को पुलिस ने कथित तौर पर अवैध हिरासत में रखा और उसके साथ मारपीट की। परिवार का दावा है कि हालत बिगड़ने के बाद वह कोमा में चला गया और करीब 13 दिन तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद सोमवार को उसकी मौत हो गई।

परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने घटना की वास्तविकता छिपाने के लिए उन्हें रितुराज को सांप के काटने की जानकारी दी। अस्पताल में उसे एंटी-वेनम के करीब 10 इंजेक्शन भी लगाए गए। हालांकि, नारायणा अस्पताल और सवाई मान सिंह अस्पताल में हुए सीटी स्कैन में सिर में चोट सामने आने की बात परिवार ने कही है। मामले में पुलिस की ओर से अभी इन आरोपों पर कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

17 सितंबर को दुबई से जयपुर आए थे रितुराज के पिता

रितुराज के पिता प्रकाश लोहार मंदसौर के रहने वाले हैं और दुबई में काम करते हैं। परिवार के अनुसार, प्रकाश 17 सितंबर को दुबई से जयपुर लौटे थे। उनका आरोप है कि एयरपोर्ट के बाहर तीन पुलिसकर्मियों ने खुद को क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताकर उन्हें रोका और सामान की तलाशी ली।

प्रकाश के मुताबिक, दुबई में काम करने वाले मनोज नाम के व्यक्ति ने उन्हें सोने की चेन लाने के लिए पैसे भेजे थे। इसी रकम को लेकर विवाद हुआ। प्रकाश का आरोप है कि पुलिसकर्मी उन्हें एक होटल ले गए, जहां भी तलाशी लेने के साथ उनके साथ मारपीट की गई। बेटे रितुराज को इसकी जानकारी मिली तो वह मंदसौर से जयपुर पहुंचा और इसके बाद वह भी पुलिस के संपर्क में आया।

22 सितंबर को रितुराज को थाने लाने का दावा

परिवार के मुताबिक, 22 सितंबर को भीलवाड़ा निवासी मनोज ने मुहाना थाने में प्रकाश लोहार के खिलाफ शिकायत दी थी। शिकायत में प्रकाश पर दुबई से सस्ता सोना लाने के नाम पर 22 लाख रुपए लेने का आरोप लगाया गया था। परिजनों के अनुसार, इसी शिकायत के सिलसिले में पुलिस ने सुबह करीब 10:30 बजे कुछ लोगों को थाने बुलाया। दोपहर करीब 12 बजे रीतुराज को भी थाने लाया गया। परिवार का आरोप है कि वहां उसके साथ मारपीट की गई। करीब साढ़े तीन बजे एक संतरी की नजर रितुराज पर पड़ी तो वह बेसुध हालत में था। इसके बाद पुलिस उसे इलाज के लिए अस्पताल लेकर गई।

पहले लकी, फिर नारायणा अस्पताल ले जाने का आरोप

रितुराज को सबसे पहले मुहाना स्थित लकी अस्पताल ले जाने की बात सामने आई। उसकी हालत गंभीर होने पर उसे सरकारी अस्पताल ले जाने के बजाय नारायणा अस्पताल ले जाया गया। वहां हालत बिगड़ने के बाद उसे वेंटिलेटर पर रखा गया। बाद में नारायणा अस्पताल ने उसे सवाई मान सिंह अस्पताल रेफर कर दिया। रितुराज करीब 13 दिन तक जिंदगी और मौत से जूझता रहा। सोमवार को उसकी मौत हो गई। परिवार के मुताबिक, दोनों निजी अस्पतालों में इलाज पर करीब 98,500 रुपए खर्च हुए, जिसका भुगतान पुलिस की ओर से किया गया।

परिवार को सांप के काटने की जानकारी देने का आरोप

परिजनों का कहना है कि जब उन्हें अस्पताल बुलाया गया तो पुलिस ने बताया कि रितुराज को सांप ने काट लिया है। इसी आधार पर अस्पताल में एंटी-वेनम के करीब 10 इंजेक्शन लगाए गए। बाद में नारायणा अस्पताल और सवाई मान सिंह अस्पताल में हुए सीटी स्कैन में सिर में चोट सामने आने की बात कही गई। इसके बाद परिवार ने पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए। पोस्टमॉर्टम के बाद मंगलवार को रितुराज का शव परिजनों को सौंप दिया गया। इसके बाद परिवार शव लेकर मंदसौर रवाना हो गया।

पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने एक्स पर लिखा…

मामले को लेकर पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने एक्स पर लिखा, भजनलाल शर्मा जी, आपकी सरकार और आपकी पुलिस से मेरा सीधा सवाल है, एक युवक की जान चली गई, फिर भी दोषियों को बचाने और सच्चाई दबाने की कोशिश क्यों की गई? जयपुर के मुहाना थाने में युवक की अवैध हिरासत, टॉर्चर और उसके बाद हुई मौत का मामला बेहद गंभीर और शर्मनाक है। युवक को गंभीर चोट लगने के बाद पहले दो निजी अस्पतालों में ले जाया गया, फिर SMS अस्पताल पहुंचाया गया और पूरे मामले को छिपाने के लिए सांप के डसने की झूठी कहानी तक गढ़ी गई। यहां तक कि 10 एंटीवेनम इंजेक्शन लगवाए गए और ₹96 हजार का बिल भी भरा गया।

पूर्व मंत्री ने आगे लिखा, 22 सितंबर की इस घटना के बाद 5 अक्टूबर को युवक की मौत हो गई। सवाल यह है कि आखिर पुलिस और भाजपा सरकार ने इतने दिनों तक सच्चाई छिपाने की कोशिश क्यों की? भजनलाल शर्मा जी, आपकी सरकार और आपकी पुलिस से मेरा सीधा सवाल है, एक युवक की जान चली गई, फिर भी दोषियों को बचाने और सच्चाई दबाने की कोशिश क्यों की गई?

इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। जो भी पुलिसकर्मी या अधिकारी दोषी हैं, उनके खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई की जाए। पीड़ित परिवार को न्याय मिले और सच्चाई जनता के सामने लाई जाए। अगर सरकार ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं की, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। हम सड़क पर उतरकर पीड़ित परिवार के न्याय के लिए संघर्ष करेंगे।

मां का आरोप- 10 लाख रुपए लेकर समझौते का दबाव

रितुराज की मां हेमा ने आरोप लगाया कि अस्पताल में पुलिसकर्मी उन पर समझौता करने का दबाव बनाने पहुंचे थे। उनके मुताबिक, पुलिस ने 10 लाख रुपए लेकर मामला खत्म करने की बात कही। हेमा का यह भी आरोप है कि दबाव बनाकर उनसे एक एफआईआर पर हस्ताक्षर करवाए गए। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मियों ने धमकी दी कि अगर उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए तो उनके बेटे जैसी हालत उनकी भी कर दी जाएगी।

मानवाधिकार आयोग ने पुलिस कमिश्नर और कलेक्टर से मांगी रिपोर्ट

रितुराज की मौत का मामला अब राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने जयपुर पुलिस कमिश्नर और जयपुर जिला कलेक्टर को नोटिस जारी कर मामले में रिपोर्ट मांगी है। आयोग की ओर से पूरे प्रकरण की जांच किसी आईपीएस अधिकारी से कराने की बात भी कही गई है। ऐसे में अब रितुराज की मौत से जुड़े आरोपों और पुलिस की कार्रवाई की जांच की मांग तेज हो गई है।