पुलिस आयुक्त, उपायुक्त यातायात कोर्ट में हुए पेश, फटकार के बाद जेएलएन पर एक तरफा यातायात हुआ शुरूशाम साढ़े चार बजे पुलिस उपायुक्त यातायात ने यातायात डायवर्जन का आदेश, अखबारों में छपी खबरें और नियम किए पेश
जयपुर। आईटी जॉब फेयर की वजह से जेएलएन रोड बंद करने के मामले पर राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रसंज्ञान लिया। कोर्ट ने पुलिस आयुक्त और गांधीनगर थानाधिकारी को दोपहर दो बजे तलब किया। दोपहर दो बजे पुलिस आयुक्त आनंद श्रीवास्तव, यातायात पुलिस उपायुक्त प्रहलाद कृिष्णयां और गांधी नगर एसएचओ कोर्ट में हाजिर हुए। न्यायाधीश समीर जैन ने जेएलएन रोड पर यातायात बंद किए जाने पर नाराजगी जाहिर की। कोर्ट ने पूछा कि, बच्चों की परीक्षा के दौरान व्यस्त रोड को किस की परमिशन और किन नियमों से बंद किया गया। जेएलएन रोड हॉस्पिटल ,एयरपोर्ट और कई स्कूलों को जोड़ता है, जिसको बंद क्यों किया। इस पर आयुक्त श्रीवास्तव ने रोड खोलने का आवश्वासन दिया। कोर्ट ने इस संबंध में सभी जानकारियों शाम तक पेश करने के आदेश दिए। जिस शाम साढ़े चार बजे पुलिस उपायुक्त यातायात प्रहलाद कृिष्णयां आवश्यक दस्तावेजों के साथ कोर्ट पहुंचे। इससे पहले करीब तीन बजे जेएलएन मार्ग पर एक तरफा यातायात को शुरू कर दिया गया।
मेगा आईटी जॉब फेयर के कारण पिछले दो दिनों से जेएलएन मार्ग दो दिनों से बंद है। मुख्य सड़क को बंद करते आयोजन पर न्यायाधीश समीर जैन ने सुबह 10.30 बजे स्वप्रेरित प्रसंज्ञान ले लिया। पुलिस आयुक्त आनंद श्रीवास्तव व डीसीपी ट्रैफिक प्रहलाद कृष्णिया व अन्य अधिकारी कोर्ट में हाजिर हुए। कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व राज्यपाल के लिए ही रास्ते को बंद किया जा सकता है। ऐसे में जेएलएन मार्ग को किसकी परमिशन से बंद किया है। बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं इसलिए इन हालातों में रास्ते को बंद नहीं कर सकते। जिस पर पुलिस अफसरों ने कहा कि उन्होंने रास्ता बंद नहीं किया है बल्कि ट्रैफिक को डायवर्ट किया है। जिस पर कोर्ट ने शाम तक इस संबंध में संपूर्ण जानकारी एवं दस्तावेज पेश करने के आदेश दिए। शाम को कोर्ट आदेश पर पुलिस उपायुक्त ने बताया कि ट्रैफिक व्यवस्था के संंबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर आमजन को सूचित भी कर दिया था। वहीं पुलिस एक्ट 2007 के तहत पुलिस एसपी ट्रैफिक का मैनेजमेंट कर सकता है। इसी के साथ जेएलएन मार्ग पर ट्रैफिक बहाल करने की जानकारी भी रखी। जिस पर कोर्ट ने मामले को जनहित याचिका के तौर पर दर्ज करने के आदेश देते हुए दस्तावेज मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दी।