जयपुर

राष्ट्रमंडल देशों के स्पीकर व पीठासीन अधिकारियों की पत्रिका समूह के प्रधान संपादक से हुई चर्चा, कहा- भारत का ताकतवर बनना जरूरी

Commonwealth Countries : राष्ट्रमंडल देशों के संसदों के स्पीकर व पीठासीन अधिकारियों ने शनिवार को पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी से मुलाकात की। राष्ट्रमंडल देशों की भारत से अपेक्षाओं व उसके साथ रिश्तों पर चर्चा की।

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पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी से जयपुर में उनके निवास पर शनिवार को चर्चा करते राष्ट्रमंडल देशों की संसदों के अध्यक्ष और पीठासीन अधिकारी। फोटो पत्रिका

Commonwealth Countries : राष्ट्रमंडल देशों के संसद अध्यक्षों व पीठासीन अधिकारियों ने वैश्विक परिदृश्य में भारत के ताकतवर होने की आवश्यकता जताई, वहीं यहां राजनीति में महिला भागीदारी को लेकर किए गए प्रयासों की सराहना की। स्पीकरों व व पीठासीन अधिकारियों ने शनिवार को पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी से चर्चा में यह विचार व्यक्त किए। प्रतिनिधियों ने राष्ट्रमंडल देशों की भारत से अपेक्षाएं व उसके साथ रिश्तों पर चर्चा की। उन्होंने आर्टिफिसियल इंटेलीजेंस (एआइ) से जुड़े पहलुओं पर बात करते हुए तकनीक के जरिए लोकतंत्र की मजबूती के विषय की ओर भी ध्यान खींचा। इस दौरान गुलाब कोठारी ने कहा कि जीवनशैली, दुनिया और तकनीक में तेजी से बदलाव आ रहा है, इसे दुनिया कैसे देख रही है इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

ये प्रतिनिधि दिल्ली में राष्ट्रमंडल देशों के स्पीकरों व पीठासीन अधिकारियों के सम्मेलन (सीएसपीओसी) में शामिल होने के बाद जयपुर आए थे। उन्होंने गुलाब कोठारी के निवास पहुंचकर मुलाकात की। प्रतिनिधियों ने कहा कि भारतीय संस्कृति में ऐसी ताकत है, जो सामाजिक बदलाव को मुमकिन बनाती है, तो आवश्यक होने पर उसे रोकती भी है। इस दौरान सीएसपीओसी के महासचिव इयान मैकाडॉनाल्ड भी मौजूद रहे।

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दुनिया में बदलाव पर पैनी नजर जरूरी : गुलाब कोठारी

श्रीलंगा, त्रिनिदाद व टोबैगो, बहामास, मलावी, ग्रेनाटा व ग्वेर्नसे की संसदीय संस्थाओं के प्रमुखों से चर्चा में पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी ने कहा कि तेजी से बदलाव आ रहा है, जीवनशैली तेजी से बदल रही है और तकनीक भी तेजी से बदल रही है। ऐसे में हम दुनिया को कैसे बढ़ता और बदलता देख रहे हैं, इस पर पैनी नजर रखते हुए विचार किया जाना आवश्यक है। उन्होंने प्रतिनिधियों से जानना चाहा कि उनके यहां आध्यात्म को लोग कैसे देख रहे हैं।

बाहरी सोच हमेशा अंदरूनी सच्चाई नहीं दिखाती

वैश्विक परिदृश्य में भारत को अक्सर ठीक से नहीं दिखाया जाता, क्योंकि बाहरी सोच हमेशा अंदरूनी सच्चाई को नहीं दिखाती। यहां सॉफ्ट पावर में क्रिकेट, फिल्म व संगीत का काफी योगदान है। एआइ में मानवीय पहलुओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
जगदेव सिंह, अध्यक्ष, लोकसभा, त्रिनिदाद व टोबैगो

मानव विज्ञान को एआइ से जोड़ा जाए

हमने आध्यात्मिक व सांस्कृतिक कूटनीति पर भरोसा किया। मानव विज्ञान को एआइ से जोड़ा जाए। जिससे टेक्नोलॉजी का सामाजिक पहलुओं से जुड़ाव पक्का हो सके।
डॉ. जगथ विक्रमरत्ने, अध्यक्ष, संसद, श्रीलंका

लैंगिक समानता बड़ा मुद्दा

दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र भारत की आदर सत्कार के लिए पहचान है। यहां लैंगिक समानता भी एक बड़ा मुद्दा है।
लाशेल एडर्ली, प्रेसीडेंट, सीनेट, बहामास

महिला भागीदारी से राजनीति अधिक लोकतांत्रिक बनाएं

राजनीति में महिला भागीदारी प्रतीकात्मक न रहे, बल्कि इससे राजनीति अधिक लोकतांत्रिक व मानवीय बनाएं।
डॉ. डेस्सिमा मार्गेट विलियम्स, प्रेसीडेंट, ग्रेनाड़ा सीनेट

नियामक प्रावधान जरूरी

लोकप्रिय होने की प्रवृत्ति लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर बुरा असर डालती है और बिना नियंत्रण वाली तकनीक इस खतरे को बढ़ा सकती है। नियामक प्रावधान जरूरी है।
सर रिचर्ड मैकमोहन, अध्यक्ष ग्वेर्नसे संसद

एआइ के साथ रोजगार के पहलू को भी ध्यान में रखें

एआइ से सभी जगह के लिए एकसमान जवाब मिलता है। एआइ के प्रयोग की एक सीमा है जैसे खाद्यान्न उत्पादन बढ़ाने में इसका बेहतर उपयोग हो सकता है। एआइ के साथ रोजगार के पहलू को भी ध्यान में रखें।
समीर गफ्फार सुलेमान, अध्यक्ष, नेशनल एसेम्बली, मलावी

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Updated on:
18 Jan 2026 11:40 am
Published on:
18 Jan 2026 11:37 am
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