SI Recruitment-2021: जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस उपनिरीक्षक (एसआइ) भर्ती-2011 पेपरलीक एसओजी की गोपनीय रिपोर्ट लीक होने को गंभीर माना। कोर्ट ने अतिरिक्त महानिदेशक (SOG) विशाल बंसल से पूछा, गोपनीय रिपोर्ट किसने लीक की और एसओजी ने उस पर क्या कार्रवाई की? इस मामले में अब तक की जांच की जानकारी देने के लिए बंसल […]
SI Recruitment-2021: जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने पुलिस उपनिरीक्षक (एसआइ) भर्ती-2011 पेपरलीक एसओजी की गोपनीय रिपोर्ट लीक होने को गंभीर माना। कोर्ट ने अतिरिक्त महानिदेशक (SOG) विशाल बंसल से पूछा, गोपनीय रिपोर्ट किसने लीक की और एसओजी ने उस पर क्या कार्रवाई की?
इस मामले में अब तक की जांच की जानकारी देने के लिए बंसल को 2 फरवरी को फिर तलब किया। इस दौरान महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने एसआइ भर्ती पेपरलीक पर एसओजी जांच की तथ्यात्मक रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश की। उधर, एसआइ भर्ती परीक्षा के भविष्य को लेकर सोमवार को सुनवाई पूरी की जा चुकी है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा व न्यायाधीश संगीता शर्मा की खंडपीठ ने मंगलवार को इस मामले में राज्य सरकार व अन्य की अपीलों पर सुनवाई की। इस दौरान भर्ती रद्द करने की मांग कर रहे अभ्यर्थियों की ओर से अधिवक्ता हरेन्द्र नील ने एसओजी की तथ्यात्मक रिपोर्ट बंद लिफाफे में पेश करने का विरोध करते हुए इस रिपोर्ट की कॉपी दिलाने की मांग की।
नील ने कहा कि बंद लिफाफे में रिपोर्ट पेश करने को सुप्रीम कोर्ट ने भी सही नहीं माना हैं। इस पर कोर्ट ने उनसे पूछा कि भर्ती रद्द करने की सिफारिश वाली 13 अगस्त 2024 की एसओजी की गोपनीय रिपोर्ट आपके पक्षकारों को कहां से मिली। कोर्ट ने रिपोर्ट लीक होने पर सख्ती दिखाते हुए कहा कि हम उन लोगों पर भी कार्रवाई करेंगे, जिन्होंने गोपनीय दस्तावेज लीक किए।
कोर्ट ने अदालत कक्ष में मौजूद एडीजी विशाल बंसल से पूछा कि आपके कार्यालय से गोपनीय दस्तावेज लीक हुए, क्या आपको जानकारी है? इस पर एडीजी ने स्वीकार किया, तो कोर्ट ने कहा कि आपका ऑफिस इसमें मिला हुआ है। आपके ऑफिस में पदस्थापित एक कांस्टेबल इस मामले में याचिकाकर्ता है, क्या उसने दस्तावेज लीक किए?
इस पर एडीजी बंसल ने कहा कि यह कांस्टेबल एसओजी में है, लेकिन वह जांच का हिस्सा नहीं हैं। रिपोर्ट हमारे ऑफिस से लीक नहीं हुई, लेकिन हम इसकी जांच करेंगे। इस पर कोर्ट ने कहा, पंजाब-हरियाणा में तो इसी तरह के मामले में एसपी-आइजी रैंक के अधिकारियों को निलंबित किया गया था।