सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस अब 'बैक टू बेसिक्स' की राह पर चलते हुए सीधे गांवों और वार्डों तक अपनी जड़ें मजबूत करने निकल पड़ी है। इसी के तहत आज से संगठन बढ़ाओ लोकतंत्र बचाओ अभियान का शंखनाद हो गया है।
राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने भाजपा सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए ''संगठन बढ़ाओ लोकतंत्र बचाओ'' अभियान का आगाज किया है। यह केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि कांग्रेस का वह 'ब्रह्मास्त्र' माना जा रहा है जिसके जरिए पार्टी आगामी स्थानीय चुनावों और 2028 की तैयारी अभी से शुरू कर रही है। पार्टी का लक्ष्य 1 महीने के भीतर प्रदेश भर में 5.5 लाख नए पदाधिकारी तैयार करना है।
कांग्रेस के इस महत्वाकांक्षी अभियान का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा इसकी जमीनी संरचना है। अगले 30 दिनों के भीतर पार्टी निम्नलिखित लक्ष्यों को पूरा करने जा रही है:
कांग्रेस ने इस अभियान को तीन सुव्यवस्थित चरणों में बांटा है ताकि कोई भी कोना छूट न जाए:
इस अभियान का नाम 'लोकतंत्र बचाओ' रखने के पीछे कांग्रेस की एक सोची-समझी रणनीति है। गोविन्द सिंह डोटासरा ने भाजपा सरकार को 'पर्ची सरकार' करार देते हुए आरोप लगाया है कि सरकार ने पंचायत और निकाय चुनाव टालकर लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर किया है।
पिछले कुछ समय से सुस्त पड़े संगठन को सक्रिय करने के लिए डोटासरा ने पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं को फिर से मुख्यधारा में लाने का निर्णय लिया है। उन्होंने आह्वान किया है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए अब कार्यकर्ताओं को अपनी स्थानीय स्तर की शक्ति को पहचानना होगा। ग्राम पंचायत और वार्ड स्तर पर सक्रिय लोगों को सीधे संगठन से जोड़ना भाजपा के पन्ना प्रमुख मॉडल का जवाब माना जा रहा है।
इस अभियान के तहत कांग्रेस के बड़े नेता, विधायक और पूर्व मंत्री भी अब एसी कमरों से निकलकर धूल भरे रास्तों पर नजर आएंगे। 'संगठन बढ़ाओ' अभियान का सीधा असर राजस्थान की ग्रामीण राजनीति पर पड़ने वाला है। भाजपा के गढ़ों में सेंध लगाने के लिए कांग्रेस अब धरातल पर अपनी संरचना को मजबूत कर रही है।