वडोदरा की एमएस यूनिवर्सिटी के फूड रिसर्चर्स का दावा
नई दिल्ली. भारतीय घरों में एल्युमिनियम के बर्तनों में खाना बनाना आम बात है। लेकिन, एमएस यूनिवर्सिटी, वडोदरा की रिसर्च टीम का दावा है कि एल्युमिनियम बर्तनों में खाना पकाने से अल्जाइमर रोग का खतरा बढ़ सकता है। एल्युमिनियम कड़ाही में विशेष रूप से डीप फ्राई करने से हमारे भोजन के साथ एल्युमिनियम के सूक्ष्म कणों की एक बड़ी संख्या की खपत हो सकती है। इससे अल्जाइमर के साथ-साथ ऑस्टियोपोरोसिस, किडनी फेल होना और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो सकती हैं।
एल्युमिनियम छोड़ें, इन बर्तनों में पकाएं
शोधकर्ताओं ने एल्युमिनियम के कुकवेयर का उपयोग नहीं करने और इसे स्टेनलेस स्टील या ओवन-फ्रेंडली ग्लास कुकवेयर से बदलने की सलाह दी है। लोहे की कड़ाही भी एक बेहतर विकल्प है। ये किसी भी सिंथेटिक या हानिकारक सामग्री के साथ लेपित नहीं होते हैं। एल्युमिनियम की खपत के विपरीत भोजन में आयरन की मात्रा भी बढ़ाते हैं जो स्वस्थ और फायदेमंद है।
मिस्र की यूनिवर्सिटी ने भी किया था यही दावा
मिस्र की ऐन शम्स यूनिवर्सिटी की द कन्वर्सेशन केमिस्ट्री की प्रोफेसर घडा बसियोनी ने भी अपने शोध के बाद 2016 में कहा था कि खाना पकाने और भोजन तैयार करने के लिए एल्युमिनियम का उपयोग करने के संभावित दुष्प्रभाव हैं। एल्युमिनियम का एक सुरक्षित स्तर है, जिसे मनुष्य अपने रक्त में सहन कर सकते हैं, उससे ज्यादा होने पर नुकसान शुरू हो जाता है। शोध में अल्जाइमर रोग के रोगियों के मस्तिष्क के ऊतकों में एल्युमिनियम की उच्च सांद्रता का पता चला।
तंत्रिका विकास का बढ़ता है खतरा
एमएस यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एल्युमिनियम कुकवेयर और अल्जाइमर के बीच एक संबंध पाया, जो तंत्रिका संबंधी विकार है। इसके कारण मस्तिष्क सिकुड़ जाता है और उसकी कोशिकाएं मर जाती हैं। एल्युमिनियम बर्तनों में जब खाद्य पदार्थ डीप फ्राई करके तैयार किए जाते हैं या उन्हें लगातार हिलाया जाता है तो बर्तनों से एल्युमिनियम की मात्रा उच्च तापमान पर पिघलने लगती है। इससे धातु भोजन के साथ मिल जाती है, जिसे खाने से हमारे पाचन तंत्र को नुकसान पहुंचता है।