
अलवर। राजस्थान में हाल के दिनों में सामने आए चिकित्सा संबंधी मामलों को लेकर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सोमवार को भजनलाल सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और लगातार सामने आ रही घटनाएं सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। अलवर में मीडिया से बातचीत करते हुए टीकाराम जूली ने कहा कि राजस्थान की स्वास्थ्य व्यवस्था वेंटिलेटर पर पहुंच चुकी है।
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उन्होंने कोटा, टोंक, बीकानेर और जोधपुर में सामने आए मामलों का जिक्र करते हुए कहा कि प्रसूताओं और नवजातों की मौत, किडनी फेल होने जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन सरकार इनसे कोई सबक नहीं ले रही है। जूली ने कहा कि कोटा में प्रसूताओं की मौत हुई, टोंक में नवजात की जान गई, बीकानेर में कई महिलाओं की किडनी फेल होने के मामले सामने आए और दो प्रसूताओं की मौत हो गई। अब जोधपुर से भी इसी तरह की खबरें सामने आ रही हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर सरकार इन घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है। नेता प्रतिपक्ष ने नकली और घटिया दवाइयों की आशंका जताते हुए कहा कि प्रदेश में दवाओं की गुणवत्ता की जांच व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को केवल लापरवाही मानकर नहीं छोड़ा जा सकता। यदि किसी की जान जाती है तो दोषियों के खिलाफ हत्या जैसी गंभीर धाराओं में कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि यह पता लगाया जाए कि दवाइयों की खरीद कौन कर रहा है, उनकी जांच की जिम्मेदारी किसकी है और बिना पर्याप्त परीक्षण के मरीजों को दवाइयां कैसे उपलब्ध कराई जा रही हैं।
उन्होंने कहा कि कई बार डॉक्टरों पर कार्रवाई कर दी जाती है, लेकिन बाद में सामने आता है कि समस्या दवाइयों या अन्य चिकित्सा सामग्री में थी। इसलिए पूरे तंत्र की जवाबदेही तय की जानी चाहिए। टीकाराम जूली ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राइट टू हेल्थ, चिरंजीवी योजना और आरजीएचएस जैसी योजनाओं ने राजस्थान को देशभर में अलग पहचान दिलाई थी।
प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों का विस्तार किया जा रहा था, लेकिन वर्तमान सरकार ने उन योजनाओं को कमजोर कर दिया है। उन्होंने 108 एंबुलेंस सेवा, 104 हेल्थ हेल्पलाइन, अस्पतालों में दवाओं की उपलब्धता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। जूली ने कहा कि यदि अस्पतालों में संक्रमण फैल रहा है तो यह साफ संकेत है कि कहीं न कहीं गंभीर लापरवाही और स्वच्छता संबंधी खामियां मौजूद हैं।
उन्होंने कहा कि कभी संक्रमण के मामले सामने आते हैं, कभी गलत दवा या ग्लूकोज को लेकर सवाल उठते हैं, तो कभी ऑक्सीजन और अन्य सुविधाओं को लेकर शिकायतें मिलती हैं। ऐसी स्थिति में आम लोगों का सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं से भरोसा कमजोर होता है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की मांग की।