अलहाज अमीर अब्दुल्ला खान उर्फ मस्तान बाबा के सालाना 20वें उर्स मुबारक में दूरदराज से आए जायरीनों ने बाबा की मजार पर अकीदत के फूल पेश किए और मुल्क की तरक्की के साथ अमन, चैन और खुशहाली की दुआ मांगी।
जयपुर। अलहाज अमीर अब्दुल्ला खान उर्फ मस्तान बाबा के सालाना 20वें उर्स मुबारक में दूरदराज से आए जायरीनों ने बाबा की मजार पर अकीदत के फूल पेश किए और मुल्क की तरक्की के साथ अमन, चैन और खुशहाली की दुआ मांगी। तीन दिवसीय उर्स के दूसरे दिन दिल्ली रोड स्थित चुंगी नाका के पास दरगाह परिसर में पीर फकीरों व मलंगों ने भी चादर शरीफ पेश की। इस मौके पर सईद साबरी, सआदत सिद्दीक, अख़्तर जियाई, हमीद साबरी सहित कई क़व्वाल पार्टियों ने महफिल-ए-समा में कौल, नात, मनकबत आदि पेशकर सूफी कलामों से आध्यात्मिक माहौल बनाया। इसी दिन फूर्टा-खुर्रा स्थित लाल हवेली से मजार शरीफ पर चादर शरीफ पेश की गई। जहां पर भारी तादाद में मैसूर से आए जायरीनों ने अकीदत के साथ उर्स की रस्मों में हिस्सा लिया।
दरगाह खादिम करीम शेख़ ने बताया कि उर्स का झंडा चढ़ने के साथ ही दरगाह में दूरदराज से जायरीनों का आना शुरू हो गया। उर्स में कर्नाटक के मैसूर, महाराष्ट्र, दिल्ली, मुंबई, सीकर, चूरू सहित अन्य जिलों से भी चादर पेश की गई। उर्स के समापन पर तीसरे दिन यहां घोड़ा निकास रोड स्थित डागर हाउस से मस्तान बाबा के आस्ताने पर चादर शरीफ पेश की गई। इस दौरान डागर हाउस में आयोजित महफिल-ए-समा में अनवार हुसैन जियाई क़व्वाल पार्टी ने क़व्वाली पेश की।
दिल्ली के अकीदतमंद वासिफउद्दीन डागर के सानिध्य में दरगाह पर भारी तादाद में उपस्थित जायरीनों के बीच मजार पर चादर चढ़ाई गई। असर की नमाज के बाद कुल की रस्म के साथ उर्स का समापन हुआ। इससे पहले सुबह 10 बजे लंगर में भारी संख्या में जायरीनों ने लंगर चखा और जरूरतमंदों को दरगाह का तबर्रुक बांटा गया।