
Hanuman Beniwal VS Prem Chand Bairwa
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) सुप्रीमो और नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल एक बार फिर अपने पुराने, आक्रामक और कड़क अंदाज़ में नज़र आने वाले हैं। इस बार उन्होंने किसी सामान्य मुद्दे पर नहीं, बल्कि सीधे तौर पर राजस्थान के उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के गृह क्षेत्र और सियासी 'गढ़' दूदू में सीधे सेंध लगाने की व्यूहरचना तैयार की है। आगामी 27 मई 2026 को दूदू के मौजमाबाद (बिचून) के पावन 'दादू पालका भैराणा धाम' में बुलाई गई जन-महापंचायत को लेकर इंटेलिजेंस एजेंसियां और राजनीतिक समीक्षक हैरान हैं। इसे केवल एक स्थानीय भूमि आंदोलन नहीं माना जा रहा है, बल्कि यह सीधे तौर पर हनुमान बेनीवाल का जयपुर और अजमेर संभाग के ग्रामीण वोट बैंक को साधने का एक 'शक्ति प्रदर्शन' भी माना जा रहा है।
इस पूरे महा-विवाद के केंद्र में है दूदू का 'दादू पालका भैराणा धाम' और उसके आसपास फैली सैकड़ों बीघा गोचर भूमि। दरअसल, राजस्थान सरकार और रीको (RIICO) द्वारा इस क्षेत्र में एक विशाल औद्योगिक परियोजना के लिए बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है, जिसका स्थानीय ग्रामीण और संत समाज पिछले कई हफ्तों से पुरजोर विरोध कर रहे हैं।
इस आंदोलन के पीछे तीन बड़ी वजह हैं:
हजारों हरे पेड़ों की बेरहम कटाई: प्रस्तावित रीको (RIICO) इंडस्ट्रियल एरिया को विकसित करने के लिए इस पवित्र क्षेत्र में पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाते हुए हजारों की संख्या में पुराने पेड़ों को काटने की योजना है, जिससे स्थानीय पर्यावरण पूरी तरह तबाह हो जाएगा।
गौमाता की गोचर भूमि पर संकट: यह पूरी जमीन सदियों से स्थानीय मवेशियों और गौवंश के चरने के लिए 'गोचर भूमि' के रूप में आरक्षित रही है। औद्योगिक फैक्ट्रियां लगने से गौमाता के सामने चारे का बड़ा संकट खड़ा होने वाला है।
45 डिग्री की गर्मी में संतों का 'अग्नितप': दादू पंथ की आस्था के इस बहुत बड़े केंद्र पर साधु-संत पिछले कई दिनों से चिलचिलाती धूप और भीषण लू के बीच जंगलों को बचाने के लिए धूनी रमाकर, 'अग्नितप' और अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। संतों के इसी मार्मिक आह्वान पर अब हनुमान बेनीवाल ने अपनी पूरी राजनीतिक ताकत झोंक दी है।
राजनीतिक समीक्षक और स्थानीय लोग इसे हनुमान बेनीवाल का बड़ा 'शक्ति प्रदर्शन'मान रहे हैं। इसके पीछे कई मुख्य कारण हैं:
सरकार पर दबाव बनाना: रीको (RIICO) औद्योगिक क्षेत्र के भूमि अधिग्रहण को रुकवाने के लिए इतनी बड़ी भीड़ जुटाना सरकार पर सीधा दबाव बनाने की रणनीति है, जो एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन है।
दूदू में राजनीतिक जमीन मजबूत करना: दूदू विधानसभा क्षेत्र लंबे समय से बाबूलाल नागर (पूर्व मंत्री/विधायक) और प्रेमचंद बैरवा (वर्तमान उपमुख्यमंत्री) का गढ़ रहा है। इस क्षेत्र में इतनी बड़ी महापंचायत करके बेनीवाल अपनी पार्टी (RLP) की पकड़ मजबूत करना चाहते हैं।
2028 विधानसभा चुनावों की तैयारी: यह आंदोलन केवल एक धार्मिक या पर्यावरण का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसके जरिए बेनीवाल जयपुर और अजमेर संभाग के ग्रामीण इलाकों में अपने वोट बैंक को एकजुट कर रहे हैं।
युवाओं और संतों का बड़ा समर्थन: आंदोलन में संतों के साथ-साथ हनुमान बेनीवाल की ताकत यानी 'युवा वर्ग' भारी संख्या में जुट रहा है। भीड़ की यह संख्या सीधे तौर पर सरकार को उनकी राजनीतिक ताकत का अहसास कराएगी।
27 मई की इस महापंचायत को ऐतिहासिक और अब तक की सबसे बड़ी भीड़ वाली रैली बनाने के लिए हनुमान बेनीवाल ने अपनी पूरी संगठनात्मक मशीनरी को एक्टिव कर दिया है।
जयपुर में पार्टी पदाधिकारियों की बड़ी बैठक: महापंचायत की तैयारियों और रूट मैप की समीक्षा करने के लिए हनुमान बेनीवाल ने आज 25 मई 2026 को अपने जयपुर स्थित जालूपुरा सरकारी आवास पर अजमेर और जयपुर संभाग के सभी पार्टी पदाधिकारियों, पूर्व विधायकों, और कोर कार्यकर्ताओं की एक बेहद महत्वपूर्ण और आपातकालीन बैठक बुलाई है।
गांव-गांव में पीले चावल बांटकर महा-न्योता: दूदू विधानसभा क्षेत्र के चप्पे-चप्पे पर आरएलपी के कार्यकर्ता एक्टिव हैं। बिजोलाव, जैकमपुरा, पवालिया, हटुपुरा, बिचून और मौजमाबाद जैसे दर्जनों बड़े गांवों में कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर जाकर पारंपरिक रूप से 'पीले चावल' बांटे जा रहे हैं और ग्रामीणों को अपनी माटी व गोचर भूमि की रक्षा के लिए इस महापंचायत में शामिल होने का संकल्प दिलाया जा रहा है।
यह आंदोलन मूल रूप से बिचून के संतों के आह्वान पर शुरू हुआ है, इसलिए 27 मई को मंच पर एक बेहद अनूठा और प्रभावशाली दृश्य देखने को मिलेगा। मंच पर दादू पंथ के प्रमुख आचार्यों, स्थानीय अखाड़ों के महामंडलेश्वरों और साधु-संतों की भारी मौजूदगी रहेगी। ये वही संत हैं जो अपनी धूनी और 'अग्नितप' के कारण पिछले कई दिनों से सुर्खियों में बने हुए हैं।
नेताओं की बात करें तो मुख्य वक्ता स्वयं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल होंगे। उनके साथ आरएलपी के प्रदेश प्रभारी दिलीप चौधरी, किसान नेता रामदयाल ओला और हाल ही में खींवसर उपचुनावों के दौरान चर्चा में रहीं कनिका बेनीवाल भी इस महापंचायत को संबोधित करेंगी। इसके अलावा जयपुर, नागौर, अजमेर, सीकर, टोंक और डीडवाना-कुचामन जिलों से सैकड़ों किसान नेता और सामाजिक कार्यकर्ता भी अपनी पूरी फौज के साथ दूदू पहुंचने की तैयारी कर चुके हैं।
हनुमान बेनीवाल को करीब से जानने वाले लोग बखूबी जानते हैं कि वे अपनी मांगों को मनवाने के लिए किसी भी हद तक जाने वाले और आंदोलनों को महीनों तक जिंदा रखने वाले नेता हैं। सूत्रों के मुताबिक, 27 मई की इस महापंचायत के मंच से भजनलाल सरकार को एक बेहद कड़ा और सीमित समय का अल्टीमेटम दिया जाएगा।
यदि सरकार ने बिचून रीको (RIICO) औद्योगिक क्षेत्र के भूमि अधिग्रहण और पेड़ों की कटाई के फैसले को तुरंत निरस्त नहीं किया, तो बेनीवाल की अगली रणनीतियां इस प्रकार हो सकती हैं:
दूसरी तरफ, उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा का यह निर्वाचन क्षेत्र होने के कारण भाजपा के स्थानीय नेता इस समय 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में हैं। वहीं कांग्रेस भी इस 'अकेले' शक्ति प्रदर्शन के कारण पूरी तरह बैकफुट पर है, हालांकि जाट और किसान पृष्ठभूमि के कई कांग्रेसी नेता अंदरूनी तौर पर हनुमान बेनीवाल के इस मोर्चे को हवा दे रहे हैं ताकि वर्तमान भाजपा सरकार को तगड़ा झटका दिया जा सके।
Updated on:
25 May 2026 08:57 am
Published on:
25 May 2026 08:57 am
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