Venkateshwara Temple : परकोटा स्थित वैंकेटेश्वर मंदिर की संपत्ति विवाद को लेकर गुरुवार को दिनभर गहमा-गहमी रही।
Jaipur News: परकोटा स्थित वैंकेटेश्वर मंदिर की संपत्ति विवाद को लेकर गुरुवार को दिनभर गहमा-गहमी रही। पहले मंदिर महंत वेणुगोपाल ने पत्रकार वार्ता कर सवाई मानसिंह द्वितीय म्यूजियम ट्रस्ट पर ठाकुरजी की बगीची पर कब्जा करने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया। इसके बाद ट्रस्ट के पदाधिकारी सक्रिय हुए। उन्होंने अपना पक्ष रखा। शाम होते-होते ट्रस्ट ने बयान जारी किया। इस बयान में लिखा कि दोनों पक्षों में समझौता हो गया है। जिस जमीन को लेकर विवाद था, वह हमेशा खाली रहेगी और उस पर दोनों पक्ष कभी भी कोई निर्माण नहीं करेंगे। उपभोग की अस्थायी स्वीकृति दे दी। बाकी पूर्व दिशा में स्थित सम्पूर्ण जमीन पहले की तरह ही ट्रस्ट के कब्जे और मालिकाना हक में रहेगी। सुलह को लेकर जब मंदिर महंत से राजस्थान पत्रिका ने बातचीत की तो उन्होंने कहा कि ट्रस्ट से किसी भी तरह का कोई समझौता नहीं हुआ है।
महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय म्यूजियम ट्रस्ट ने मंदिर लक्ष्मणद्वारा की सम्पत्ति को ट्रस्ट की सम्पत्ति बताया है। सिटी पैलेस के प्रशासक प्रमोद यादव का कहना है कि यह संपत्ति ट्रस्ट की थी। कोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला दिया है। उन्होंने बताया कि पूर्व जयपुर रियासत के राजस्थान में विलीनीकरण के समय महाराजा सवाई मानसिंह (द्वितीय) और केन्द्र सरकार के बीच 30 मार्च,1949 को एक कोविनेन्ट निष्पादित किया गया था। इसमें सिटी पैलेस का मालिक उन्हें दर्शाया गया है। इस कोविनेन्ट के पश्चात 16 अप्रेल, 1959 और 30 जुलाई 1972 के प्रलेखों से गठित महाराजा सवाई मानसिंह द्वितीय म्यूजियम ट्रस्ट, सिटी पैलेस में अन्य सम्पत्तियों के अलावा मंदिर लक्ष्मणद्वारा की संपत्ति भी ट्रस्ट की सम्पत्ति है।
महंत वेणुगोपाल का कहना है कि उनके पास राजपरिवार की ओर से संवत 1826 का दिया हुआ पट्टा मौजूद है। महंत ने आरोप लगाया कि 6 मई रात 11.20 बजे 15 से 20 लोग जेसीबी के साथ आए और ठाकुरजी की बगीची पर पक्की बाउंड्री तोड़ दी और पेड़ों को उखाड़ दिया। इसकी शिकायत सात मई को माणक चौक थाने में की। उन्होंने कहा कि गुरुवार तड़के 3.30 बजे ट्रस्ट के गार्ड और करीब 200 लोगों ने आकर ठाकुरजी की बगीची पर कब्जा करने प्रयास किया। बगीची में तोड़फोड़ कर गाड़ियां खड़ी कर दीं। महंत ने बताया कि उन्हें सेशन कोर्ट में भी अपील करने का समय नहीं दिया।