सेंसिटाइजेशन वर्कशॉप
जयपुर। राजस्थान में रोजाना 3000 नए लोग तंबाकू उपयोग शुरू करते हैं। इसकी ई-सिगरेट से शुरू करके सक्रिय धूम्रपान की तरफ उनके जाने की संभावना रहती है। यह बात मंगलवार को आयोजित मीडिया सेंसिटाइजेशन वर्कशॉप में संतोकबा दुर्लभजी अस्पताल के तंबाकू निवारण कंसल्टेंट विशेषज्ञ डॉक्टर राकेश गुप्ता ने कही। गुप्ता ने कहा कि ई सिगरेट युवा पीढ़ी के स्वास्थ्य और राजस्थान में तंबाकू नियंत्रण के लिए सबसे बड़ा खतरा है। ऐसे में नीति निर्माताओं की ओर से इस पर रोक लगाने की प्रक्रिया में तेजी लाने में मीडिया सबसे प्रभावशाली भूमिका निभा सकता है। ई-सिगरेट में निकोटीन, लिक्विड रूप में मौजूद रहता है। इसके अलावा इसमें ग्लाइकॉन, ग्लिसरॉल और हैवी मेटल्स भी पाए जाते हैं जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हैं। ग्लोबल एडल्ट तंबाकू सर्वे-2 के मुताबिक प्रदेश में धूम्रपान छोडने वालों के आंकड़े उत्साहजनक नहीं हैं। सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के संयुक्त निदेशक गोविंद पारीक ने बताया कि सरकार ने राजस्थान में तंबाकू मिश्रित गुटखा पर रोक लगाई थी। हाल ही में हुई ई-सिगरेट के खतरों पर रिपोर्टिंग के बाद स्वास्थ्य विभाग की ओर से एक पांच सदस्यीय कमेटी बनाई गई है जो ई-सिगरेट के खतरों पर अपनी रिपोर्ट 15 जून को देगी। वर्कशॉप में ई-सिगरेट पर बैन के साथ ही प्रदेश में तंबाकू नियंत्रण के लिए मीडिया रिपोर्टिंग के महत्व, जिम्मेदारी और चुनौतियों पर चर्चा की गई।
सरकार को करना चाहिए ई-सिगरेट को बैन
वाग्धारा के सचिव जयेश जोशी ने बताया कि 31 मई को वल्र्ड नो टोबॉको डे के मौके पर सरकार को ई-सिगरेट को राज्य में बैन करने की घोषणा करनी चाहिए। वर्कशॉप में वाग्धारा की ओर से कोटा और जयपुर में ई-सिगरेट की उपलब्धता को लेकर कराए गए सर्वे से संबधित आंकड़े भी रखे गए। नोहर से बीजेपी के विधायक और वाग्धारा के तंबाकू मुक्त राजस्थान कैंपेन के ब्रांड एंबेसेडर अभिषेक मटोरिया ने कहा कि वह सरकार से ई-सिगरेट राजस्थान में भी बैन हो इसको लेकर प्रयास कर रहे हैं।