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Road Infrastructure: औद्योगिक कनेक्टिविटी को बूस्ट, 290 करोड़ से 205 किमी सड़कों का होगा कायाकल्प

Industrial Areas: रीको–पीडब्ल्यूडी की साझेदारी: 36 इंडस्ट्रियल एरिया की सड़कें होंगी मजबूत। उद्योगों को रफ्तार देने की तैयारी: राज्यभर में एप्रोच रोड्स का बड़ा नेटवर्क तैयार।

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जयपुर

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Rajesh Dixit

May 06, 2026

RIICO Projects

Photo AI

Rajasthan Industrial Development: जयपुर. राजस्थान में औद्योगिक विकास को नई गति देने के लिए राज्य सरकार ने एक अहम पहल शुरू की है। राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (रीको) और सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मिलकर औद्योगिक क्षेत्रों की एप्रोच सड़कों का व्यापक विकास करेंगे। इस योजना के तहत करीब 290 करोड़ रुपए की लागत से 38 सड़कों का निर्माण, चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।

राज्य के 36 औद्योगिक क्षेत्रों की उन सड़कों की पहचान की गई है, जो सीधे राज्य राजमार्गों से जुड़ी हुई हैं और जहां उद्योगों के लिए कच्चे माल और तैयार उत्पादों का आवागमन होता है। इन सड़कों की कुल लंबाई लगभग 205 किलोमीटर है। लंबे समय से इन मार्गों के सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी, जिससे परिवहन में होने वाली देरी और लागत को कम किया जा सके।

50 प्रतिशत हिस्सा रीको और शेष 50 प्रतिशत पीडब्ल्यूडी

इस परियोजना की खास बात यह है कि इसे कोस्ट-शेयरिंग मॉडल पर लागू किया जाएगा, जिसमें कुल लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा रीको और शेष 50 प्रतिशत पीडब्ल्यूडी द्वारा वहन किया जाएगा। निर्माण कार्य की जिम्मेदारी सार्वजनिक निर्माण विभाग के पास रहेगी, जिससे कार्य गुणवत्ता और समयबद्धता सुनिश्चित हो सके।

इन औद्योगिक क्षेत्रों की सुधरेगी सड़कें

इस पहल से आबूरोड, अजमेर, बालोतरा, बांसवाड़ा, भरतपुर, भीलवाड़ा, चूरू, दौसा, जयपुर, जालौर, झालावाड़, कोटा, नीमराना, सवाई माधोपुर, श्रीगंगानगर और उदयपुर जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। बेहतर सड़कों के माध्यम से उद्योगों को कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी और निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

औद्योगिक विकास को नई रफ्तार देने वाला कदम

रीको और पीडब्ल्यूडी की यह संयुक्त पहल राजस्थान के औद्योगिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव ला सकती है। बेहतर सड़कों से न केवल उद्योगों की कनेक्टिविटी मजबूत होगी, बल्कि परिवहन लागत और समय में भी कमी आएगी। इससे निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और नए उद्योग स्थापित होने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी। खास बात यह है कि कोस्ट-शेयरिंग मॉडल से सरकार के संसाधनों का संतुलित उपयोग होगा। यदि यह परियोजना समयबद्ध और गुणवत्ता के साथ पूरी होती है, तो यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाई देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।