Panchayat-Nagar Nikay Election: पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार आमने-सामने हो गए हैं।
जयपुर। पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के चुनाव को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग और राज्य सरकार आमने-सामने हो गए हैं। हाईकोर्ट के पंचायत चुनाव शीघ्र कराने के आदेश के बाद राज्य आयोग ने बुधवार को जिला निर्वाचन अधिकारियों (कलक्टरों) को दिशा-निर्देश जारी करने की प्रक्रिया तेज कर दी। इधर, स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा है कि सरकार की मंशा स्पष्ट है एक राज्य, एक चुनाव के तहत दिसम्बर में नगरीय निकायों के चुनाव कराए जाएंगे।
राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों को गुरुवार को दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी कर ली है। बुधवार को इसके ड्राफ्ट पर मशक्कत हुई और यह अंतिम चरण में पहुंच गया है।
राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता ने बुधवार को बताया कि कलक्टर्स को भेजे जाने वाले दिशा-निर्देश लगभग तैयार हो गए हैं। उन्होंने मंगलवार को स्पष्ट किया था कि बिना संविधान संशोधन एक राज्य, एक चुनाव संभव नहीं है। उन्होंने एक-दो दिन में पंचायत-निकाय चुनाव की प्रक्रिया शुरू करने की घोषणा करने का इरादा जाहिर किया था।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना में पंचायतों व निकायों में ओबीसी आरक्षण के लिए गठित आयोग ने भी प्रक्रिया तेज कर दी है। आयोग 25 से 29 सितम्बर तक राजनीतिक दलों से संवाद करने की तैयारी कर रहा है। इस बीच आयोग का कार्यकाल करीब दो सप्ताह पहले पूरा हो चुका है।
स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा है कि सरकार की मंशा स्पष्ट है कि एक राज्य-एक चुनाव के तहत दिसम्बर में सभी नगरीय निकायों के चुनाव कराएंगे। इसी आधार पर तैयारी कर ली गई है। निकायों व वार्डों के परिसीमन की अधिसूचना भी जल्द जारी होगी। इस संबंध में मुख्यमंत्री से भी चर्चा की जा रही है। राज्य निर्वाचन आयुक्त मधुकर गुप्ता के 'कार्यकाल पूरा होने वाले निकायों-पंचायतों के चुनाव की घोषणा एक-दो दिन में करने' से जुड़े बयान के बाद मंत्री खरों ने सरकार की मंशा स्पष्ट की। खर्रा की अध्यक्षता में मंत्रिमण्डलीय उप समिति सूची को अंतिम रूप दे चुकी है। हालांकि, खर्रा ने हाइकोर्ट के आदेश का अध्ययन करने के बाद उचित कदम उठाने की बात भी कहीं है।
पूर्ववर्ती कीस सरकार में वर्ष 2019 में वार्डों का पुनर्गठन हुआ था। उस समय 196 निकाय थे। छह साल में ही 113 नए निकायों का गठन कर दिया गया, जहां पहली बार चुनाव होंगे। इस तरह अब 309 निकाय हो गए। प्रदेश में पहली बार 134 निकायों में शहरी सरकार नहीं है, इनकी कमान प्रशासक के हाथ में दी हुई है।