निवेश और रोजगार बढ़ाने के लिए औद्योगिक संगठनों ने प्रदेश सरकार से डंप कचरे के निस्तारण की नीति बनाने की मांग की है।
निवेश और रोजगार बढ़ाने के लिए औद्योगिक संगठनों ने प्रदेश सरकार से डंप कचरे के निस्तारण की नीति बनाने की मांग की है। उद्योग संगठन आल राज. ट्रेड एंड इंडस्ट्रीज एसोसिएशन यानि आरतिया का कहना है कि सही नीति नहीं होने से प्रदेश की पर्यावरण रैंकिंग न्यूनतम स्तर आ गई है। इसमें सुधार के लिए व्यवहारिक नीति की जरूरत है। आरतिया के अध्यक्ष विष्णु भूत ने सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की ताजा रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रदेश में केवल 4 फीसदी कचरे का निस्तारण हो रहा है। 96 फीसदी डंप कचरा स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए चिंताजनक है।
राजस्थान को 10 में से 2.75 नंबर ही मिले
सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरमेंट की रिपोर्ट में राजस्थान को 10 में से 2.75 अंक ही दिए गए हैं। जन- स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रदेश की रैंकिंग 24वीं और सार्वजनिक ढांचा व मानव विकास क्षेत्र में 27वीं है। संगठन के मुताबिक पर्यावरण में सुधार के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय की निगरानी में कार्यबल बनाना चाहिए, जो भागीदारों तथा कारोबारी संगठनों से बातचीत कर समस्या का समाधान निकाले। पुर्नचक्रण के जरिए कचरे का उपयोग होना चाहिए। इसके लिए प्रस्ताव लिए जाए। फल-सब्जी मंडियों में प्रतिदिन हजारों टन अपशिष्ट एकत्र होता है। इससे लैंड फिलिंग और नजदीकी इलाकों का पर्यावरण दूषित हो रहा है।