
जयपुर. फेसबुक पर दोस्ती हुई तो भरोसा बढ़ाने के लिए कंपनी दिखाई गई, दस्तावेज भेजे गए और वीडियो कॉल पर फैक्टरी का 'लाइव दर्शन' भी करा दिया गया। 53 वर्षीय व्यक्ति को लगा कि कपड़ा निर्यात का कारोबार हाथ लग गया है। छह माह में रकम दोगुनी करने के लालच में उसने एक-दो बार नहीं, करीब दस माह तक अलग-अलग बैंक खातों में पैसा भेजा। रकम बढ़ते-बढ़ते 2.12 करोड़ रुपए हो गई। इसके बाद भी ठगी का लालच खत्म नहीं हुआ। करीब दस माह बाद जब महिला ने 12 लाख रुपए और मांगे तथा पीड़ित ने भुगतान से इनकार कर दिया तो उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया गया। तब समझ आया कि फेसबुक की दोस्ती, कंपनी के कागज और फैक्टरी की वीडियो कॉल... सब ठगी के लिए भरोसा जीतने की पटकथा थी। इसके बाद ठगी का खुलासा हुआ और सोमवार को मामला दर्ज किया गया है।
1. फेसबुक से शुरुआत- जून 2025 में महिला ने फेसबुक पर पीड़ित से संपर्क किया। उसने खुद को बेंगलूरु स्थित एक 'डिजाइन स्टूडियो' की संचालिका बताया और दावा किया कि उसकी बड़ी कंपनी है।
2. वीसी पर विश्वास- महिला ने बताया कि कंपनी तैयार कपड़ों की आपूर्ति तथा निर्यात करती है। वीडियो कॉल (वीसी) पर फैक्टरी जैसी जगह, कंपनी की गतिविधियां भी दिखाई, दस्तावेज भेजे।
3. खाते में भेजी रकम- कारोबारी साझेदारी और निवेश के नाम पर पीड़ित ने महिला और साथियों के बताए बैंक खातों में रकम भेजी। 21 जून 2025 से 25 अप्रैल 2026 के बीच 2 करोड़ 12 लाख रुपए।
4. पहले संदेह नहीं- महिला लगातार इसे कारोबारी निवेश बताती रही, जिससे पीड़ित को लंबे समय तक किसी फर्जीवाड़े का संदेह नहीं हुआ। बाद में पूरा चिट्ठा खुलने के बाद पीड़ित थाने पहुंचा।
रिपोर्ट में आरोप है कि आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और कारोबारी पहचान का इस्तेमाल कर संगठित तरीके से साइबर ठगी की। पीड़ित ने फेसबुक प्रोफाइल, वीडियो कॉल रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर, कारोबारी दस्तावेज और बैंक लेन-देन से जुड़े साक्ष्य पुलिस को उपलब्ध कराए हैं। शिकायत के अनुसार महिला ने गारमेंट निर्यात कारोबार में निवेश करने पर छह माह में रकम दोगुनी करने का प्रलोभन दिया। पुलिस जांच कर रही है।