
SOG ASP Mukesh Kumar Soni Suspended (Patrika Photo)
SOG ASP Mukesh Kumar Soni Suspended: जयपुर: राज्य सरकार ने उदयपुर से जुड़े दो करोड़ रुपए के कथित रिश्वत प्रकरण में गिरफ्तार एसओजी के एएसपी मुकेश कुमार सोनी को निलंबित कर दिया है। एसीबी की रिपोर्ट के आधार पर यह कार्रवाई की गई।
बता दें कि एएसपी मुकेश कुमार सोनी पर उदयपुर के 272 भूखंडों से जुड़े मामले में आरोपियों को राहत देने के बदले रिश्वत मांगने का आरोप है। एसीबी ने 26 सितंबर को कथित बिचौलिये सज्जन सिंह जैन उर्फ टाटला को दो करोड़ रुपए लेते गिरफ्तार किया था। इसके अगले दिन एसीबी ने एएसपी मुकेश सोनी को भी गिरफ्तार कर लिया था। मामले में जांच जारी है।
बताते चलें कि जांच आगे बढ़ने के साथ एसीबी की टीम दलाल सज्जन सिंह को लेकर मुकेश सोनी के घर भी पहुंची थी। जांच अधिकारी महावीर सिंह शेखावत के नेतृत्व में टीम ने यहां मौका तस्दीक कराई थी। जांच में सामने आया था कि सज्जन सिंह का सोनी के घर आना-जाना था और रिश्वत प्रकरण के दौरान भी वह वहां जाकर मिला था। एसीबी ने दलाल से मिले इनपुट के आधार पर यह कार्रवाई की।
जांच में यह भी सामने आया था कि 23 सितंबर को रानी रोड पर मुलाकात के लिए मुकेश सोनी ने तीन बार समय बदला था। पहले सुबह 10 बजे मिलने की बात कही। इसके बाद समय दोपहर 1 बजे और फिर शाम 5 बजे किया गया था। तय समय के बाद भी सोनी करीब डेढ़ घंटे की देरी से शाम 6.30 बजे मौके पर पहुंचा।
दलाल सज्जन सिंह, परिवादी निरंजन मोगरा को लेकर महाकालेश्वर मंदिर के पास पहुंचा था। कुछ देर बाद सोनी अपनी कार से वहां पहुंचा और दोनों को कार में बुलाया था। करीब चार मिनट तक तीनों के बीच बातचीत हुई थी। इस दौरान सोनी ने रिश्वत की रकम को लेकर सीधे बातचीत करने के बजाय अपने मोबाइल पर लिखकर बात रखी थी।
एसीबी के अनुसार, शिकायत मिलने के बाद तीन दिन तक डिजिटल रिकॉर्डिंग के जरिए रिश्वत की मांग का सत्यापन किया गया था। सत्यापन के दौरान दो करोड़ रुपए की मांग किए जाने की पुष्टि हुई। दलाल ने परिवादी की दो बार मुकेश सोनी से वॉट्सएप कॉल पर बातचीत भी कराई थी।
रानी रोड पर हुई मुलाकात के दौरान सोनी ने अपने मोबाइल की स्क्रीन पर ‘सज्जन जो कहे, वो कर लेना और इसके बाद 30 तक चार्जशीट पेश करूंगा’ लिखा था। एसीबी ने इस पूरी बातचीत और प्रक्रिया की डिजिटल रिकॉर्डिंग सुरक्षित की थी।
जांच के दौरान एसीबी को मुकेश सोनी के कार्यालय से नगर निगम से संबंधित 41 भूखंडों की फाइलें भी मिली थीं। इनमें कई दस्तावेजों पर यूडीए की सील और हस्ताक्षर पाए गए थे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर नगर निगम में आवंटन पत्र और पट्टे जारी किए गए थे।
एसीबी यह भी जांच कर रही है कि यूडीए की सील-साइन वाले दस्तावेज वास्तविक थे या फर्जी तरीके से तैयार किए गए थे। कुछ मामलों में भूखंडों की मूल फाइलों के बाद बदले हुए नंबरों वाली फाइलें सामने आने की बात भी जांच में आई थी। इससे फाइलों में हेरफेर और भूखंडों के नंबर बदलने की भूमिका भी जांच के दायरे में आई थी।
मामला उदयपुर के 272 प्लॉट प्रकरण से जुड़ा है। आरोप है कि खाली और निरस्त भूखंडों के फर्जी दस्तावेज और लीज डीड तैयार कर उनके नामांतरण कराए गए और बाद में इन भूखंडों को बेच दिया गया। वर्ष 2022 में सूरजपोल थाने में इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी। जांच के बाद नगर निगम ने 48 पट्टे निरस्त किए थे।
इसी मामले में एसओजी ने पूर्व जिला अल्पसंख्यक अधिकारी हेमलता कांकरिया और उनके पति निरंजन मोगरा को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान उनके घर से करीब दो किलो सोने के जेवर और 11 लाख रुपए बरामद किए गए थे। आरोप था कि मामले में एफआर लगाने और जब्त सामान वापस दिलाने के बदले दो करोड़ रुपए की रिश्वत मांगी गई थी।
Updated on:
06 Oct 2026 09:01 am
Published on:
06 Oct 2026 08:42 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
