फर्जी प्रमाण पत्र से अप्रशिक्षित चालक किए जा रहे हैं तैयार

राजधानी से लेकर प्रदेश के ड्राइविंग स्कूलों में फर्जी कागजात लगाकर धड़ल्ले से व्यवसायिक ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जा रहे हैं। जो प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को बढ़ा रहे हैं

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Mar 15, 2016
Jaipur news
आनंदमणि त्रिपाठी

जयपुर. राजधानी से लेकर प्रदेश के ड्राइविंग स्कूलों में फर्जी कागजात लगाकर धड़ल्ले से व्यवसायिक ड्राइविंग लाइसेंस बनाए जा रहे हैं। जो प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं को बढ़ा रहे हैं। चालक जयपुर का है लेकिन उसकी आठवीं कक्षा की डिग्री उड़ीसा के केंद्रपाड़ा की है। वहीं का स्थानांतरण प्रमाण पत्र भी दस्तावेज के बतौर लगाया है। सड़क सुरक्षा विशेषज्ञ कमलजीत सोई के शब्दों में कहें तो यह सड़क पर आतंकवाद फैलाने वाले लोग हैं। फर्जीवाड़े का एेसा ही एक मामला प्रादेशिक परिवहन कार्यालय जयपुर में भी सामने आया है। यह गड़बड़ी तुलसी मोटर ड्राइविंग के रिकॉर्ड में पाई गई हैं। प्रदेश के कई स्कूलों में इस तरह की गड़बडि़यां हैं।

24 में 23 हजार हादसे चालक की गलती से
आंकड़ों के अनुसार 2014 में कुल 24,628 सड़क हादसे हुए। चालक की गलती से 23 हजार 637 हादसे हुए। 2015 में सड़क हादसों में बढ़ोतरी, नवंबर 2015 तक 9800 मौतें सड़क हादसों में हुई। प्रदेश में 7 लाख व्यवसायिक वाहन सड़क हादसों में मौत की बड़ी वजह हैं। 7.4 फीसदी सड़क दुर्घटनाओं के साथ देश में सातवें स्थान पर है।

एेसे कर रहे फर्जीवाड़ा
जन्म प्रमाणपत्र : महेश कुमार नाम के आवेदक ने अपने हाथों से ही जन्मतिथि बदल दी। इसे लाइसेंस बनवाने को अनिवार्य दस्तावेज के लिए लगाया। यह प्रमाणपत्र निगम द्वारा जारी किया था।

स्थानांतरण प्रमाण पत्र : इसमें यह पाया गया है कि एक ही स्कूल की एक ही नामांकण संख्या पर अलग-अलग समय में यह प्रमाण पत्र जारी किया गया है लेकिन बुक नंबर किसी में भी नहीं है। यह प्रमाण पत्र जगतपुरा में स्थित माधव शिशु शिक्षा निकेतन स्कूल का है। नामांकण संख्या 35 पर ही नारायण दास को फिर लालचंद बैरवा को और फिर पप्पूराम मीणा को यह प्रमाणपत्र जारी किया गया है।

अंकतालिका फर्जी : दलालों ने अंकतालिका ही बदल दी। नैनूराम मीणा की अंकतालिका पर छपाई का वर्ष 2000 दर्ज है लेकिन 1990 की दिखा दिया।

मेडिकल जांच की फर्जी : ड्राइविंग स्कूलों में फर्जी मेडिकल या फिर बिना मेडिकल के ही लाइसेंस धड़ल्ले से बनाए जा रहे हैं। सेंटर का संचालक इस पर हस्ताक्षर ही नहीं करता है। सद्दाम हुसैन नाम के एक आवेदक की फाइल में गड़बड़ी को देखा जा सकता है।

एलआईसी बांड में फर्जीवाड़ा : दो साल पुराना एलआईसी बांड मान्य लेकिन फर्जीवाड़ा करने के लिए जमा कराए गए बांड में जन्मतिथि को ही बदल दिया है।

उड़ीसा, हरियाणा और केरल के प्रमाणपत्र : चालक जयपुर का और पढ़ाई उड़ीसा, हरियाणा और केरल में की। इन्हें उड़ीसा स्थित केंद्रापाड़ा जिले से बनवाया गया है।

जिम्मेदार अफसरों के अपने-अपने तर्क
कॉमर्शियल ड्राइवर का पढ़ा-लिखा होना जरूरी है। जाहिर है कि पढऩे-लिखने से समझ बढ़ती है और इसका फायदा केवल सड़क पर लगे संकेतकों को समझने में ही नहीं मिलता है। ड्राइवर का देशी-विदेशी नागरिकों से वास्ता पड़ता है। यह नियम 20 सालों से लागू है। विजयपाल सिंह, आरटीआे, जयपुर

आठवीं पास होने से कोई समझदारी पैदा हो जाए, एेसा जरूरी नहीं है। आज भी गरीबी के चलते बहुत लोग पढ़-लिख नहीं पाते हैं। वाहन चलाना रोजी-रोटी का आसान जरिया है। एेसे में लोग ड्राइवरी सीख कर रोटी कमाने लगते हैं।
अमर सिंह, अध्यक्ष, पिंक सिटी ऑटो चालक यूनियन
Published on:
15 Mar 2016 12:45 am
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