जयपुर

स्टाम्प की किल्लत बता जनता से लूट, 180 रुपए में दे रहे 100 का स्टाम्प, विक्रेता बाेला- माेदी जी को बोलो, हम क्या करें

स्टाम्प की किल्लत बताकर राजधानी में जनता को जमकर लूटा जा रहा है। राजस्थान पत्रिका ने पड़ताल की तो 'किल्लत' का सच खुद सामने आ खड़ा हुआ।

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Oct 06, 2017

मुकेश शर्मा/जयपुर। स्टाम्प की किल्लत बताकर राजधानी में जनता को जमकर लूटा जा रहा है। जेडीए हो या आरटीओ कार्यालय, कलक्ट्रेट हो या कोर्ट, इन दफ्तरों के परिसर और बाहर ज्यादातर स्टाम्प विक्रेता 180 रुपए तक अधिक वसूल रहे हैं। राजस्थान पत्रिका ने गुरुवार को पड़ताल की तो 'किल्लत' का सच खुद सामने आ खड़ा हुआ।

पड़ताल में सामने आया कि स्टाम्प भरपूर उपलब्ध होने के बावजूद जान-बूझकर किल्लत का राग अलापा जा रहा है। पैसा ऐंठने के लिए लोगों को पहले मना किया जाता है, फिर 100 की बजाय 500 रुपए वाला स्टाम्प लेने का दबाव बनाया जाता है। बाद में अधिक राशि देने पर 100 रुपए वाला स्टाम्प उपलब्ध करा दिया जाता है।

लोग मजबूर, जिम्मेदार बेफिक्र
छोटे-बड़े ज्यादातर सरकारी कामों में स्टाम्प की अनिवार्यता और समय की कमी के कारण लोग लुटने को मजबूर हो रहे हैं। लेकिन, बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि कई औपचारिकताओं में 100 की जगह 500 रुपए वाला स्टाम्प लगा होने के बावजूद अफसरों का ध्यान इस ओर क्यों नहीं गया? लम्बे समय से लूट चलने के बावजूद यह क्यों नहीं सोचा गया कि लोग 400 रुपए ज्यादा का स्टाम्प क्यों लगा रहे हैं।

आरटीओ...
मोदीजी को बोलो, हम क्या करें
कैसे हो रही मनमानी... इन विके्रताओं से सामने आया सच
क्त रिपोर्टर : 100 रुपए का स्टाम्प चाहिए
विक्रेता : नहीं है, 500 सौ का ले लो
क्त रिपोर्टर : 500 का कितने में मिलेगा
विक्रेता : 650 रुपए में
रिपोर्टर : स्टाम्प लेने कलक्ट्रेट से यहां आया हूं, देखो कहीं 100 रुपए वाला मिल जाए तो
विक्रेता : ऐसा है... 100 रुपए वाले 3 स्टाम्प बचाकर रखे हैं, तुम्हें लेना है तो एक स्टाम्प के 170 रुपए लूंगा
रिपोर्टर : 150 रुपए ले लो.. इतनी दूर से आया हूं.. पेट्रोल भी लग गया
विक्रेता : मोदीजी को बोलो.. स्टाम्प जारी क्यों नहीं कर रहे.. किल्लत इतनी है फिर भी दे रहा हूं.. रुपए तो 170 ही लूंगा। (रिपोर्टर से 170 रुपए लिए और 100 रुपए वाला स्टाम्प दे दिया)


जेडीए...
मैं तो इतने का ही दूंगा
रिपोर्टर : 100 रुपए का स्टाम्प चाहिए
विक्रेता : किसलिए चाहिए?
रिपोर्टर : कार का एक्सिडेंट हो गया.. वकील ने मंगवाया है
विक्रेता : पहले इनकार कर दिया, फिर कहा 150 रुपए लूंगा
क्त रिपोर्टर : यह तो 130 रुपए में आता है.. फिर 150 रुपए क्यों?
विक्रेता : मैं तो 150 रुपए में ही दूंगा.. 130 रुपए में चाहिए तो सरकारी दफ्तर में चले जाओ


सेशन न्यायालय परिसर...
10-50 मत देखना, जो मांगे दे देना

जेडीए...
अन्य विक्रेता ने 180 रुपए में दिया
रिपोर्टर : अन्य स्टाम्प विक्रेता से 100 रुपए का स्टाम्प मांगा
विक्रेता : 500 का है, वो ले लो
रिपोर्टर : 100 रु.का चाहिए, 500 वाले का क्या करूंगा?
विक्रेता : किल्लत बहुत है, 100 का भी दे दूंगा लेकिन 180 रुपए लगेंगे
क्त रिपोर्टर : 100 रुपए वाला तो 130 में आता है.. फिर 180 रुपए किस बात के?
विक्रेता : कह दिया ना.. किल्लत है.. आगे से ही स्टाम्प नहीं मिल रहे हैं.. किसके नाम से बनाना है?
(विक्रेता ने 100 रुपए का स्टांप 180 रुपए में दिया)

कलक्ट्रेट...
ग्रामीणों को दिए, रिपोर्टर को मना
रिपोर्टर : 100 रुपए का स्टाम्प देना
विक्रेता : नहीं है.. तभी उसके पास स्टाम्प ले रहे दो लोगों ने कहा, हमें तो 150 रुपए में दे रहे हैं
रिपोर्टर : इनको दे रहे हो.. मुझे भी दे दो
विक्रेता : नही है.. इनको 50 रुपए वाले दे रहा हूं
रिपोर्टर : मुझे भी 50 रुपए वाला दे दो
विक्रेता : वो भी नहीं है
(लोगों ने 100 वाले स्टाम्प दिखाए, जो 150 में लिए थे)

रिपोर्टर यहां चार विक्रेताओं के पास पहुंचा लेकिन उन्हें शायद आशंका हो गई और सभी ने स्टाम्प देने से मना कर दिया। एक महिला विक्रेता ने जरूर दूसरे विक्रेता के पास भेजते हुए कहा, वह जो मांगे जो दे देना, दस-पांच रुपए मत देखना। हालांकि वहां एक विक्रेता ने कहा, 100 रुपए वाले स्टाम्प की बहुत किल्लत है, 3 बजे बाद आना, दे दूंगा।

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Updated on:
06 Oct 2017 10:36 am
Published on:
06 Oct 2017 10:28 am
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