
Shahpura News: शाहपुरा शहर के राजकीय उपजिला अस्पताल में एनीमिया मुक्त भारत और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य को लेकर स्वास्थ्य विभाग के जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ बैठक आयोजित हुई। जिसमें गर्भवती महिलाओं में एनीमिया (खून की कमी) के प्रभावी इलाज और जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर चर्चा की गई।
पीएमओ डॉ. विनोद योगी ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (2019-21) के आंकड़ों के अनुसार भारत में प्रजनन आयु (15-49 वर्ष) की करीब 52.2 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से प्रभावित है। एनीमिया के कारण गर्भवती महिलाओं में थकान, सांस फूलना, छाती में दर्द, अनियमित हृदय गति, सिरदर्द और पैरों में बायटे आने जैसे लक्षण दिखाई देते है। एनीमिया की वजह से गर्भपात, समय से पूर्व प्रसव, बच्चे का कम वजन और प्रसव के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, संक्रमण की संभावना बनी रहती है।
आरसीएचओ डॉ.आशा मीणा ने बताया कि पहले महिलाओं में खून की कमी को दूर करने के लिए आयरन सुक्रोज के चार इंजेक्शन लगाए जाते थे, लेकिन अब एफसीएम (फेरिक कार्बोक्सी माल्टोज) इंजेक्शन के माध्यम से केवल एक ही डोज में एनीमिया को दूर किया जा सकता है। इससे गर्भवती महिलाओं को बार-बार अस्पताल के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी।
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. गिरधारी पलसानिया ने बताया कि एनीमिया को रोकने के लिए गर्भवती महिलाओं को अपने आहार में प्राकृतिक चीजों को शामिल करना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से गुड़, दाल, चना, पालक, मैथी, पुदीना और अरबी का साग जैसी प्राकृतिक चीजों का सेवन करना चाहिए।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक अखिलेश ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से एनीमिया को दूर करने के लिए एफसीएम इंजेक्शन लगाया जा रहा है। जिससे शिशु एवं मातृ मृत्युदर में कमी आएगी। स्त्रीरोग विशेषज्ञ डॉ. भोमराज कुमावत, डॉ. दिनेश पाल यादव, बीपीएम अर्जुन जाट, गायनिक प्रभारी जुगल शर्मा, मोतीलाल वर्मा उपस्थित रहे।