जयपुर

Jaipur Literature Festival- आजादी से पहले गुलाबीनगर में हुआ था पहला लिटरेचर फेस्टिवल

गुलाबीनगर में Literature Festival नई बात नहीं है। आजादी के पहले अक्टूबर, 1945 में अन्तरराष्ट्रीय स्तर का फेस्टिवल यहां हुआ था।

2 min read
Jan 25, 2018

जितेन्द्र सिंह शेखावत

गुलाबीनगर में Literature Festival नई बात नहीं है। आजादी के पहले अक्टूबर, 1945 में अन्तरराष्ट्रीय स्तर का फेस्टिवल यहां हुआ था। इसमें जवाहर लाल नेहरु, सर्वपल्ली डॉ.राधाकृष्णन्, सरोजनी नायडू के अलावा विश्व प्रसिद्ध उपन्यासकार ई.एम.फास्टर जैसे महान विद्वान आए। सवाई मानसिंह टाउन हॉल में आयोजित तीन दिवसीय फेस्टिवल में देश विदेश के करीब एक हजार सााहित्यकार, कथाकार, इतिहासकार, सम्पादक, कवि, उपन्यासकार, पत्रकार आदि अनेक ख्यातिनाम विद्वानों ने भाग लिया। आयोजन 1934 में गठित ऑल इंडिया सेंटर ऑफ पेन नामक संस्था से जुड़ी ऑल इंडिया रॉयटर्स कांफ्रेंस की सोच का नतीजा था। जयपुर रियासत के प्रधानमंत्री सर मिर्जा इस्माइल ने आयोजन में मुख्य भूमिका निभाई। जयपुर फाउंडेशन के सियाशरण लश्करी के पास मौजूद रिकार्ड के मुताबिक जवाहर लाल नेहरू, सरोजनी नायडू और फास्टर के आगमन से विद्वानों की जयपुर में भीड़ उमड़ पड़ी थी।

ये भी पढ़ें

JLF 2018 : करणी सेना की धमकी, राजस्‍थान में नहीं होगी प्रसून जोशी की एंट्री

भाषा की मजबूती पर चिंतन
फेस्टिवल में विवादित विषयों के बजाय साहित्य की भूमिका में देश प्रेम जैसे विषय पर मंथन हुआ था। भाषा को मजबूत बनाने और 'भारतीय साहित्य का संसार में प्रभाव' विषय पर चिंतन हुआ था। आजादी के पहले भारत का यह संभवत पहला साहित्य उत्सव रहा, जिसमें भाषा ज्ञान को समृद्ध बनाने का ठोस प्रयास हुुआ।

तीन दिन कुछ ऐसे चले सत्र

20 अक्टूबर 1945
प्रथम सत्र की अध्यक्षता सरोजनी नायडू ने की। सर मिर्जा व शिक्षा निदेशक जेसी रोलो ने साहित्य सम्मेलन की भूमिका पर प्रकाश डाला। हरमन ओउल्ड व मुल्कराज आनन्द ने हिन्दुस्तान को साहित्य लेखन का बड़ा देश बताया। दोपहर के सत्र की अध्यक्षता जवाहर लाल नेहरू ने की।

21 अक्टूबर 1945
विद्वान ग्रेटर यूडी इमरसन के अलावा भारती सारा भाई, हंसा मेहता, हरमन गैट्ज, भदानी भट्टाचार्य ने भारतीय साहित्य की लोकप्रियता का बखान किया। दोपहर के सत्र में सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन् ने साहित्य के नैतिक मूल्य विषय पर व्याख्यान दिया।

21 अक्टूबर 1945
प्रथम सत्र में आधुनिक भारतीय साहित्य के बारे में डॉ. के.आर. श्रीनिवास आयंगर, हुंमायंू कबीर, डी.वी. पोतदार, एस.एस.पी अय्यर, सोफिया वाडिया, गुलाबदास ब्रोकर, एससी गुहा, एनसी मेहता, डॉ.सी नारायणन मेनन, डीवी गुड्या, वैंकटेशा अयंगर ने साहित्य के आधार भूत महत्व पर प्रकाश डाला।

ये भी रहे मौजूद
लाहौर के जगत सिंह ब्राइट, डीएफ कराका, अमर नाथ झा, पी. शेषाद्रि व खुशवंत सिंह भी मौजूद थे। खुशवंत सिंह के ससुर सर तेजा सिंह मलिक रियासत के सार्वजनिक निर्माण विभाग में मंत्री थे। विद्वानों को केसर हिन्द होटल, न्यू होटल, यादगार, नाटाणी का बाग, खासा कोठी व ऑल इंडिया रेडियो के पार्क हाऊस आदि में ठहराया गया। इसकी एक स्मारिका के.आर श्री निवास आयंगर ने सन 1947 में मुम्बई से प्रकाशित करवाई थी।

गांधी-आजाद का संदेश सुनाया
सरोजनी नायडू ने महात्मा गांधी और कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अब्दुल कलाम आजाद का शुभकामना संदेश सुनाया। नायडू ने उद्बोधन में राजपूतों की वीरता की तारीफ की। विश्व शांति में लेखकों की बड़ी भूमिका बताई। वंदे मातरम नारे के साथ भाषण का समापन किया।

ये भी पढ़ें

VIDEO: साहित्य जगत का कुंभ ‘जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल’ आज से शुरु

Published on:
25 Jan 2018 12:04 pm
Also Read
View All