4 अगस्त 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

सरकारी अस्पतालों में निजी बीमा के तहत इलाज सबके हित में

बीमाधारकों को सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए प्रेरित करने के जतन करने पड़ेंगे। एबीपीएमजय बीमा योजना सरकारी के साथ निजी अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा प्रदान करती है।
2 min read
Google source verification

जयपुर

image

Opinion Desk

Aug 04, 2026

government hospitals

government hospitals

आर.के. विजय,(लेखक नेशनल इंश्योरेंस कंपनी में वरिष्ठ अधिकारी रहे हैं)

देश के प्रमुख सरकारी मेडिकल संस्थानों में शुमार सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज, जयपुर के 10 प्रमुख सरकारी अस्पतालों में निजी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों के तहत इलाज की सुविधा शुरू करने के प्रस्ताव को प्रारंभिक मंजूरी मिल गई है। सिद्धांतत: यह सभी हितधारकों के लिए लाभकारी उपाय है। सरकारी अस्पतालों में उच्च कोटि की पेशेवर दक्षता उपलब्ध है। निजी अस्पतालों से जटिल मामलों को कई बार इसी वजह से सरकारी अस्पतालों में रेफर किया जाता है। लेकिन कैशलेस मॉडल की सफलता सुनिश्चित करने के लिए इन अस्पतालों में सुविधाओं के वर्तमान स्तर में बड़े सुधार की जरूरत है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबीपीएमजय) जैसी सरकारों की ओर से प्रायोजित बीमा योजनाओं के अलावा अन्य सभी स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियां निजी बीमा की श्रेणी में आती हैं। इसमें ऐसी समूह बीमा पॉलिसियां भी शामिल हैं, जो नियोक्ता अथवा अन्य संस्थाओं की ओर से अपने कार्मिकों या सदस्यों के लिए ली जाती है।

ऐसी निजी बीमा पॉलिसियों के तहत सरकारी अस्पतालों में कैशलेस इलाज की व्यवस्था नहीं है। इसे लागू करने का प्रयास सराहनीय है। बीमाधारक, सरकारी अस्पताल तथा बीमा कंपनियां इस योजना के तीन प्रमुख हितधारक हैं। ऐसे बीमाधारक, जो अधिक राशि का बीमा नहीं करवा पाते हैं या जिनके क्षेत्र में उपयुक्त निजी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, वे इस व्यवस्था से सबसे अधिक लाभान्वित होंगे। निजी के मुकाबले सरकारी अस्पतालों में इलाज की पैकेज दरें निश्चित ही कम रखी जा सकती हैं। इसके चलते कम राशि के लिए बीमित व्यक्ति भी बड़ी बीमारियों का इलाज कम खर्च में करवा सकते हैं, जबकि निजी अस्पतालों में उनकी न्यून बीमा राशि अपर्याप्त साबित हो सकती है और अंतर की राशि उन्हें स्वयं चुकानी पड़ सकती है।

सरकारी अस्पतालों के बड़े पैमाने पर प्रतिस्पर्धा में आने से निजी अस्पतालों की कथित मनमानियों पर कुछ रोक लगने की उम्मीद भी की जा सकती है। इस योजना से दूरदराज के लोगों को निकटवर्ती सरकारी अस्पताल में कैशलेस इलाज मिल सकेगा। सरकारी अस्पतालों को इस व्यवस्था में राजस्व प्राप्त होगा, जिसका उपयोग सुविधाओं के विस्तार तथा गुणवत्ता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। योजना के बड़े पैमाने पर लागू होने पर अपेक्षाकृत कम खर्च के चलते दावों की राशि कम होगी, नतीजतन बीमा प्रीमियम की दरों में कमी की संभावना बनेगी। इससे सभी बीमाधारकों को भी सीधा लाभ होगा। सरकारी अस्पतालों में निजी बीमा के जरिए कैशलेस मॉडल का सफलतापूर्वक संचालन चुनौती है। इसमें न केवल सेवाओं तथा सुविधाओं में ढांचागत सुधार बल्कि विश्वसनीय आइटी सिस्टम के साथ समर्पित और प्रशिक्षित कार्मिकों की भी आवश्यकता होगी। बीमाधारकों को सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए प्रेरित करने के जतन करने पड़ेंगे। एबीपीएमजय बीमा योजना सरकारी के साथ निजी अस्पतालों में भी इलाज की सुविधा प्रदान करती है।

सरकारी अस्पतालों में योजना के तहत हुए इलाज/दावों के आंकड़े निजी बीमा के जरिये सरकारी अस्पतालों में कैशलेस मॉडल की सफलता की संभावनाएं दर्शाते हैं। नेशनल हैल्थ अथॉरिटी की वार्षिक रिपोर्ट 2024-25 के अनुसार योजना की शुरुआत सितंबर, 2018 से ३१ मार्च २०२५ तक कुल 9.19 करोड़ अस्पतालीकरण के मामले दर्ज हुए, जिनमें 48 फीसदी (4.41 करोड़) भर्ती सरकारी अस्पतालों में और 52 फीसदी (4.78 करोड़) निजी अस्पतालों में हुई। इनकी राशि 1,29,386 करोड़ रुपए थी, जिनमें 34 फीसदी (43,991 करोड़) सरकारी अस्पतालों में हुई भर्ती की थी। योजना में सूचीबद्ध 31005 अस्पतालों में 55 फीसदी (17,126) सरकारी थे। इस योजना में यदि सरकारी अस्पतालों ने 4.41 करोड़ मामले निपटाए हैं, तो निजी बीमा के मामले, अपेक्षाकृत कम होंगे, को भी हैंडल किया जा सकता है। अधिकतम लाभ के लिए योजना को देश के सभी जिला अस्पतालों तक लागू करने का लक्ष्य होना चाहिए।