
जयपुर। राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के पहले चरण का प्रचार थमने के साथ ही भाजपा और कांग्रेस ने अब अपना पूरा फोकस वोट मैनेजमेंट पर कर दिया है। दोनों दल मतदान से पहले बूथ स्तर पर समीकरण साधने और अधिक से अधिक वोट अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। भाजपा ने कमजोर बूथों की पहचान कर वहां कार्यकर्ताओं का नेटवर्क सक्रिय किया है। वहीं, कांग्रेस ने ऐसे निर्दलीय प्रत्याशियों और स्थानीय प्रभाव रखने वाले नेताओं से संपर्क बढ़ाया है, जो 50 से 100 तक वोट काटने की क्षमता रखते हैं। दोनों दलों की नजर अब अंतिम समय में होने वाले वोटों के ध्रुवीकरण पर है।
प्रचार अभियान थमने के साथ ही भाजपा ने रणनीति का फोकस 'वोटिंग और प्रत्याशी मैनेजमेंट पर कर दिया है। अब समर्थक मतदाताओं को घर से बूथ तक पहुंचाने पर जोर रहेगा। राजस्थान के निकायों में कमजोर बूथों की पहचान से लेकर मतदान के दिन कार्यकर्ताओं की सक्रियता तक की मॉनिटरिंग की जा रही है। निर्दलीय व बागियों की सूची भी तैयार की है, जिन्हें संगठन 'आगे' मान रहा है। जिला संगठनों ने यह सूची प्रदेश संगठन को भेज दी है। सोमवार से इनके साथ संपर्क का दौर भी तेज किया गया है। पार्टी इसे निकायों में बहुमत का आंकड़ा जुटाने की संभावित रणनीति के तौर पर देख रही है।
प्रदेश में पहले चरण का मतदान समाप्त होते ही कांग्रेस ने अब चुनावी प्रबंधन का अगला चरण शुरू कर दिया है। पार्टी ने ऐसे निर्दलीय प्रत्याशियों की सूची पर काम शुरू किया है, जो खुद जीत की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी के वोट काटने की क्षमता रखते हैं। कांग्रेस की रणनीति अब ऐसे उम्मीदवारों को अपने पक्ष में लाने और दूसरे चरण में पार्टी प्रत्याशियों के पक्ष में मतदान का माहौल मजबूत करने की है।
कांग्रेस का मानना है कि निकाय चुनाव में मुकाबला कई वार्डों में बेहद करीबी है। ऐसे में 50 से 100 या इससे अधिक वोट लेने वाला निर्दलीय भी नतीजे को प्रभावित कर सकता है। पार्टी अब खासतौर पर कांग्रेस विचारधारा से जुड़े ऐसे उम्मीदवारों से संपर्क कर रही है। जिला स्तर के नेताओं को इनसे बातचीत की जिम्मेदारी दी गई है। जिलाध्यक्ष, विधायक और वरिष्ठ नेताओं को इन लोगों से संपर्क साधने की जिम्मेदारी दी जा रही है।