24 अक्टूबर 2026,

शनिवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

जयपुर सीरियल बम ब्लास्ट: जेल में ही रहेंगे आतंकी सरवर और शाहबाज, जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्यों माना ‘गंभीर मामला’

जयपुर सीरियल बम ब्लास्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए उम्रकैद की सजा काट रहे दो आतंकियों मोहम्मद सरवर और शाहबाज अहमद को कोई राहत देने से इंकार कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इस प्रकरण को राष्ट्रीय और जन-सुरक्षा से जुड़ा बेहद ‘गंभीर मामला’ माना और दोनों की जमानत व रिहाई याचिकाएं खारिज कर दीं।
4 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जयपुर

•

image

Arvind Rao

•

Updated: 8 Sep 2026, 7:43 AM IST

jaipur serial bomb blasts

आतंकी सरवर और शाहबाज (पत्रिका फोटो)

Jaipur Serial Bomb Blast: सुप्रीम कोर्ट ने साल 2008 के जयपुर सीरियल बम धमाका मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे आतंकी मोहम्मद सरवर आजमी उर्फ ढिल्ला पप्पू और शाहबाज अहमद की रिहाई से इनकार कर दिया है। इस बीच कोर्ट ने कहा कि मामला गंभीर है, इसे किसी सामान्य जमानत मामले की तरह नहीं देखा जा सकता। इसमें राष्ट्रीय सुरक्षा और जनता की सुरक्षा को खतरे का विषय शामिल है।

न्यायाधीश एमएम सुंदरेश और न्यायाधीश प्रसन्ना वी वराले की पीठ ने सोमवार को दोनों आतंकी की अपील खारिज करते हुए यह आदेश दिया। इससे अपील पर सुनवाई के दौरान रिहाई से इनकार करने के हाईकोर्ट के आदेश पर दोनों को राहत नहीं मिल पाई। यह मामला चांदपोल बाजार में मिले जिंदा बम से जुड़ा है। तथ्यों के अनुसार, 13 मई 2008 को जयपुर में नौ जगह बम लगाए, जिनमें से 8 फट गए और एक जिंदा रह गया। विस्फोट में 70 लोगों की मौत हो गई, करीब 186 घायल हुए थे।

2008 जयपुर धमाके: चांदपोल में बम फटता तो जातीं 30-40 और जानें

13 मई 2008 की वह खौफनाक शाम आज भी जयपुरवासियों के जेहन में ताजा है। शहर में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों में 70 बेगुनाहों की मौत हुई थी और 185 लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे। उस भयावह मंजर के बीच यदि एक और नौवां बम समय रहते निष्क्रिय न किया जाता, तो मौतों का यह आंकड़ा और भी भयावह हो सकता था।

जिंदा बम को निष्प्रभावी करने वाले बम निरोधक दस्ते (बीडीएस) के सदस्य सुनील भाटिया ने बताया कि बम चांदपोल में सीतारामजी मंदिर के सामने बेहद व्यस्त और भीड़भाड़ वाले इलाके में रखा गया था। इसे इस तरह डिजाइन किया गया था कि अधिक से अधिक जनहानि हो। यदि वह बम फट जाता तो कम से कम 20 से 25 लोगों की और जान चली जाती।

टाला था एक और बड़ा हादसा

परकोटे के प्रमुख बाजारों में एक के बाद एक आठ धमाके हुए थे। एक तरफ पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां घायलों को संभालने और साक्ष्य जुटाने में व्यस्त थीं। वहीं, दूसरी तरफ जिंदा बम की सूचना मिलते ही बीडीएस टीम ने मौके पर पहुंचकर सूझबूझ के साथ उसे निष्क्रिय किया और एक बड़ी तबाही को रोक लिया।

पीड़ितों के आंसू

आरोपियों को सजा सुनाए जाने के दौरान अदालत में कई पीड़ित मौजूद थे। अदालत में फैसला सुनते ही पीड़िता रमा देवी की आंखों से आंसू छलक पड़े थे। सुप्रीम कोर्ट की ओर से जिंदा बम मिलने के मामले में दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाने पर पीड़ित परिवारों ने इसे न्याय की दिशा में बड़ा कदम माना है। 18 साल बाद आए इस फैसले ने जहां एक ओर पीड़ितों के पुराने जख्म ताजा कर दिए, वहीं दूसरी ओर चांदपोल में मिले बम को निष्क्रिय करना आज भी बीडीएस टीम के साहस की गवाही देता है।

आजमी की ओर से दी गई दलीलें

अपीलार्थियों के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि इसी घटनाक्रम से जुड़े अन्य आठ मामलों में राजस्थान हाईकोर्ट आजमी को पहले ही बरी कर चुका है। चूंकि सभी नौ बम एक ही आपराधिक साजिश का हिस्सा थे, इसलिए जब आठ मामलों में उसे निर्दोष माना जा चुका है, तो इस मामले में भी उसे हिरासत में रखना अनुचित है। इसके अतिरिक्त, उसने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उसे गिरफ्तार करने और चार्जशीट दाखिल करने में 12 साल का लंबा समय लगाया गया। वह पूर्व में ही 15 साल से अधिक की जेल काट चुका है।

राज्य सरकार ने किया तीखा विरोध

राज्य सरकार की ओर से अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने कहा कि नौवें बम का यह मामला अन्य आठ मामलों से पूरी तरह भिन्न है। इसमें बरामद जिंदा बम और साक्ष्य शामिल हैं। एक दुकानदार ने आजमी की पहचान की है, जिसने उसे वह साइकिल बेची थी, जिसका उपयोग बम ले जाने के लिए किया गया था।

एएजी ने स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट के पूर्व में दिए गए बरी के आदेशों के खिलाफ राज्य सरकार की अपीलें सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं, इसलिए उनका लाभ आरोपी को नहीं दिया जा सकता। देरी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि विलंब से हुई गिरफ्तारी का तात्पर्य यह कदापि नहीं है कि मामला झूठा है।

विशेष अदालत ने सुनाई थी सजा

साल 2025 में विशेष अदालत ने मोहम्मद सरवर आजमी, शाहबाज अहमद और अन्य को नौवां बम लगाने की साजिश में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद दोनों ने अपनी सजा के निलंबन के लिए राजस्थान हाईकोर्ट का रुख किया था, लेकिन हाईकोर्ट की ओर से याचिका खारिज किए जाने के बाद उसने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी।

ये रही टाइमलाइन

  • 13 मई 2008: आठ स्थानों पर हुए बम ब्लास्ट, कुल आठ मुकदमे हुए दर्ज।
  • 20 सितंबर 2019: विशेष अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा सुनाई।
  • 29 मार्च 2023: राजस्थान हाईकोर्ट ने जांच को 'त्रुटिपूर्ण, अधूरी और अनुचित' बताते हुए चारों आरोपियों को बरी कर दिया।
  • 24 जुलाई 2023: जिंदा बम मामले में एटीएस ने पूरक आरोप पत्र दाखिल किया।
  • 08 अप्रैल 2025: विशेष अदालत ने जिंदा बम मिलने के मामले में चार आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
  • 1 मई 2026: जिंदा बम मामले में हाईकोर्ट ने सजा स्थगन से किया इनकार।