इस बार बैंक मैनेजर के घर पर वारदात, चाबी बनाने आए और ले गए 50 लाख के जेवरघरवालों की थी अलमारी में रखे सिर्फ 3 लाख पर नजर, शहर में एक के बाद एक वारदात, फिर भी नहीं ले रहे सबक
जयपुर. सावधान! शहर में ताला-चाबी बनाने वाला गिरोह सक्रिय है। गिरोह के लोग एक के बाद एक वारदात को अंजाम दे रहे हैं। राजधानी में हुई कई घटनाओं के बाद भी लोग ना सबक ले रहे है और ना ही सतर्क हो रहे है। अब झोटवाड़ा थाना इलाके में एक बैंक मैनेजर के घर से करीब 50 लाख के जेवर लेकर फरार हो गए।
इस बार जालसाजी की वारदात जितेन्द्र पाल सिंह के न्यू कॉलोनी सत्य नगर घर में हुई। परिजनों ने बताया कि एक अलमारी का लॉक खराब था। शुक्रवार को कॉलोनी दो युवक ताला-चाबी बनाने की आवाज लगा रहे थे। पोर्च में रखी अलमारी की चाबी बनाने के लिए उन्हें बुला लिया। लेकिन युवक बोले घर के अंदर से किसी दूसरी अलमारी की चाबी लाकर दो। उस चाबी के जरिए इस अलमारी की चाबी बनाएंगे। तब अंदर रखी मुख्य अलमारी की चाबी उन्हें दे दी। युवकों ने कुछ देर में मुख्य अलमारी की चाबी को तोड़ दिया और बोले अंदर वाली अलमारी की भी दूसरी चाबी बना देते हैं। इसके लिए अंदर वाली अलमारी के पास चलना पड़ेगा।
इस बहाने आरोपी अंदर आ गए और अलमारी खोल उसमें रखा जेवर वाला बैग उन्होंने कब निकाल लिया पता ही नहीं चलने दिया। जबकि परिवार वाले अलमारी में रखे तीन लाख रुपयों पर नजर रखे हुए थे। ताला-चाबी बनाने वालों ने भी उन रुपयों को छुआ तक नहीं। पीडि़त जितेन्द्र पाल सिंह हनुमानगढ़ स्थित एक बैंक में मैनेजर हैं। जबकि उनकी पत्नी और दो बेटी व एक बेटा जयपुर आवास पर रह रहे हैं।
गौर करने वाली बात यह है कि ताला-चाबी बनाने वाले श्याम नगर, वैशाली नगर के बाद झोटवाड़ा थाना क्षेत्र में वारदात के लिए पहुंचे हैं। आरोपी थाना क्षेत्र बदल-बदल कर वारदात कर रहे हैं। पुलिस भी फुटेज होने के बावजूद आरोपितों को पकड़ नहीं पा रही है।
महेश नगर में भी बनाया था शिकार
भगवती नगर फस्र्ट निवासी ताराचंद के घर अलमारी की चाबी बनाने वाले जालसाज झोटवाड़ा की तर्ज पर सोने के सिक्के, रखड़ी, टॉप्स, चांदी की पायल, कमरबंद और सवा लाख नकदी निकाल ले गए थे।
यहां कैमरे में कैद हो गए थे आरोपी
न्यू सांगानेर रोड, देवी नगर में भी दो बदमाश चाबी बनाने के बहाने लाखों के जेवर ले उड़े थे। इस मामले में पीडि़त मुकेश कुमार ने श्याम नगर थाने में मामला दर्ज कराया था। आरोपी सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गए थे, फिर भी पकड़ में नहीं आए.