जयपुर. कोयले की कमी और तेज गर्मी के चलते देश में बिजली संकट की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच रेलवे प्रशासन ने ग्रीन (नवीकरणीय) ऊर्जा का दायरा बढ़ाने की तरफ कदम बढ़ा लिए हैं। उत्तर-पश्चिम रेलवे अब राजस्थान के 9 रेलवे स्टेशन का संचालन ज्यादातर सौर ऊर्जा से करेगा। इसमें जयपुर का गांधी नगर रेलवे स्टेशन तो 100 फीसदी सौर ऊर्जा से रोशन होगा। इसके तहत शून्य कार्बन उत्सर्जन (नेट जीरो एनर्जी) की तैयारी है।
जयपुर. कोयले की कमी और तेज गर्मी के चलते देश में बिजली संकट की स्थिति बनी हुई है। इसी बीच रेलवे प्रशासन ने ग्रीन (नवीकरणीय) ऊर्जा का दायरा बढ़ाने की तरफ कदम बढ़ा लिए हैं। उत्तर-पश्चिम रेलवे अब राजस्थान के 9 रेलवे स्टेशन का संचालन ज्यादातर सौर ऊर्जा से करेगा। इसमें जयपुर का गांधी नगर रेलवे स्टेशन तो 100 फीसदी सौर ऊर्जा से रोशन होगा। इसके तहत शून्य कार्बन उत्सर्जन (नेट जीरो एनर्जी) की तैयारी है।
उत्तर-पश्चिम रेलवे जोन में रानी कमलापति रेलवे स्टेशन की तर्ज पर करीब 2 हजार करोड़ की लागत से जयपुर जंक्शन, गांधीनगर (जयपुर), उदयपुर, अजमेर, जोधपुर, बीकानेर, आबू रोड, मारवाड़ जंक्शन (पाली) और जैसलमेर रेलवे स्टेशन के री-डवलपमेंट का खाका तैयार कर लिया है। इसके तहत गांधीनगर रेलवे स्टेशन को पूरी तरह से सौर ऊर्जा से संचालित होगा। जबकि अन्य स्टेशनों की क्षमता री-डवलपमेंट के बाद 15 से बढ़कर क्षमता 45 फीसदी तक पहुंच जाएगी।
100 फीसदी सौर ऊर्जा से संचालित होने वाला उत्तर-पश्चिम रेलवे का पहला स्टेशन
गांधीनगर में पहले से लगे सौर ऊर्जा पैनलों से वार्षिक 60 हजार 509 यूनिट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसके बावजूद भी उसे डिस्कॉम से 3 लाख 48 हजार 371 यूनिट बिजली सालाना लेनी पड़ती है। सोलर पैनल लगने के बाद यहां 1.5 मेगावाट में से 1.3 मेगावाट ऊर्जा का उत्पादन होगा। 100 फीसदी सौर ऊर्जा से संचालित होने वाला उत्तर-पश्चिम रेलवे का पहला स्टेशन होगा। इससे लगभग 5 करोड़ रुपए के राजस्व की बचत हो रही है।
सौर ऊर्जा से राजस्व की बचत और प्रदूषण से भी निजात मिलेगी। यहां रेलमार्गों का विद्युतीकरण कार्य भी अंतिम चरण में है। -कैप्टन शशिकिरण, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, उत्तर-पश्चिम रेलवे