Minimum Income Guarantee Law in Rajasthan : न्यूनतम आय गारन्टी कानून बनाने वाला राजस्थान देश में पहला राज्य बन गया है। 15 दिन में अगर रोजगार नहीं मिला तो बेरोजगारी भत्ते की गारंटी है। पेंशन के पात्र व्यक्ति को हर माह न्यूनतम 1000 रुपए और सालाना 15 प्रतिशत बढ़ोत्तरी मिलेगा।
अब किसी भी प्रदेशवासी को आवेदन करने के 15 दिन में पंचायत या शहरी निकाय काम नहीं दे पाईं तो राज्य सरकार बेरोजगारी भत्ता देगी। इनके अलावा सामाजिक सुरक्षा पेंशन के हकदार को सालाना 12 हजार रुपए और दूसरे साल से सालाना 15 प्रतिशत बढ़ेगी। इसके लिए न्यूनतम आय की गारंटी कानून बन गया है, जिसके इसी सप्ताह से प्रभावी होने की उम्मीद है। राज्य में शिक्षा व स्वास्थ्य की गारंटी का कानून पहले से ही है। न्यूनतम आय की गारंटी देने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य बन गया है। कानून में सभी ग्रामीण व शहरी परिवारों को साल में 125 दिन के रोजगार और वृद्धजनों, विशेष योग्यजनों, विधवा एवं एकल महिलाओं को प्रतिमाह न्यूनतम एक हजार रुपए पेंशन की गारंटी शामिल है। इस पेंशन में जनवरी में 10 और जुलाई में 5 प्रतिशत बढ़ोतरी होगी, जो कुल 15 प्रतिशत होगी। वहीं साल में 125 दिन का रोजगार व बेरोजगारी भत्ता प्राप्त कर लेने पर गारंटी स्वत: समाप्त हो जाएगी।
सीएस की अध्यक्षता में बनेगा बोर्ड
कानून के क्रियान्वयन की मॉनिटरिंग और समीक्षा के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में सलाहकार बोर्ड बनेगा। कानून की पालना के लिए ग्रामीण रोजगार आयुक्त, शहरी रोजगार आयुक्त व पेंशन आयुक्त जिम्मेदार होंगे।
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गफलत के कारण अधिसूचना में देरी
सूत्रों के अनुसार कानून में महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना शामिल होने के कारण पहले सरकार की सलाह पर इसे राष्ट्रपति के पास भेजना तय किया गया, लेकिन बाद में तय हुआ कि राज्य सरकार अपने स्तर पर कानून बनाने में सक्षम है। इस पर राष्ट्रपति के पास भेजने की सिफारिश की टिप्पणी वाला विधेयक सरकार ने राज्यपाल के पास वापस भेज दिया, राज्यपाल ने इसी पर अपनी ओर से मंजूरी दे दी। बाद में विधेयक नए सिरे से राज्यपाल के पास भेज गया। इस कारण अधिसूचना 22 सितंबर को जारी हो पाई है।
पत्रिका ने उठाया था मुद्दा
राजस्थान पत्रिका ने सामाजिक सुरक्षा से जुड़े तीन विधेयकों के राजभवन में अटके होने को लेकर समाचार प्रकाशित किया था, अब इनमें से दो गिग वर्कर्स व न्यूनतम आय की गारंटी से जुड़े विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के बाद कानून बन चुके हैं।
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