
Ramadan : अल्लाह की इबादत के पाक माह रमजान की शुरुआत इस बार फरवरी के तीसरे सप्ताह में होगी। रमजान माह के रोजे इस साल फरवरी के तीसरे सप्ताह में शुरू होंगे। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार चांद दिखने पर 17 या 18 फरवरी से मुस्लिम समाज के लोग एक माह के लिए रोजे रखना शुरू कर देंगे। खास बात यह है कि यह संयोग करीब 30 साल बाद बन रहा है कि फरवरी माह में रोजे रखे जाएंगे। साल 1995 में 1 फरवरी को रमजान का पहला रोजा रखा गया थ।
इस्लामी जानकारों के अनुसार रमजान लगभग 33 वर्षों में सभी ऋतुओं का एक चक्र पूरा करता है। इस साल रोजे फरवरी में आने से अपेक्षाकृत दिन छोटे और तापमान कम रहेगा। इससे रोजेदारों को न केवल प्यास और थकान से राहत मिलेगी, बल्कि इबादत में भी सहूलियत रहेगी। शहर के मौलवियों और धार्मिक विद्वानों का कहना है कि ठंड के मौसम में रोजे रखना सेहत के लिहाज से भी अपेक्षाकृत आसान रहता है।
रमजान के दौरान शहर की मस्जिदों में तरावीह की नमाज समेत रमजान से जुड़ी तैयारियों को लेकर भी हलचल शुरू हो गई है। मस्जिद कमेटियों के जिम्मेदार तरावीह पढ़ाने के इच्छुक हाफिजों से मीटिंग कर तरावीह की नमाज की तैयारियां कर रहे हैं।
पिछले साल रमजान का महीना एक मार्च 2025 से शुरू हुआ था। चूंकि हिजरी साल 354 या 355 दिनों का होता है, जबकि ईस्वी कैलेंडर 365 दिनों का होता है। इसी वजह से दोनों कैलेंडरों के बीच हर साल 10 से 11 दिनों का अंतर आ जाता है। ऐसे में रमजान सहित अन्य इस्लामी महीने हर साल ईस्वी कैलेंडर में करीब 11 दिन पहले आ जाते हैं।
हिजरी कैलेंडर चंद्र आधारित होने के कारण रमजान हर साल ईस्वी कैलेंडर में लगभग 10–11 दिन पहले आता है। इसी वजह से रमजान करीब 33 वर्षों में सभी ऋतुओं का एक चक्र पूरा करता है। फरवरी में रोजे पड़ने से दिन छोटे रहते हैं और ठंड के कारण रोजेदारों को इबादत में अपेक्षाकृत अधिक सहूलियत मिलती है।
हाजी अनवर शाह इस्लामी विद्वान
रमजान की 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं रात का विशेष महत्व है। इस माह में बंदों को खुदा से खुद दुआ करनी चाहिए। इन रातों में मुस्लिम समाज के लोग मस्जिदों में और महिलाएं व बच्चे घरों में इबादत करते हैं। इन्हीं में से एक रात शब ए कद्र होती है, जिसे हजरत मोहम्मद साहब ने सबसे खुशनसीब रात बताया है।
मोहम्मद जाकिर नोमानी, शहर मुफ्ती