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BबेलगावीB. देश में जहां सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं, वहीं कर्नाटक के बेलगावी जिले के कागवाड़ तहसील के मंगसुली स्थित एमआरएम कर्नाटक पब्लिक स्कूल ने सरकारी शिक्षा की नई मिसाल पेश की है। आधुनिक विज्ञान एवं रोबोटिक्स प्रयोगशाला, स्किल डवलपमेंट, तीन भाषाओं में शिक्षा और लगातार बेहतर बोर्ड परीक्षा परिणामों के दम पर यह स्कूल अब आसपास के निजी स्कूलों को कड़ी टक्कर दे रहा है। करीब आठ एकड़ में फैले परिसर वाले इस सरकारी स्कूल में कन्नड़, मराठी और उर्दू माध्यम से पढ़ाई होती है। स्कूल में विज्ञान प्रयोगशाला, रोबोटिक्स लैब, कंप्यूटर शिक्षा, स्मार्ट क्लासरूम, सीसीटीवी निगरानी, प्रोजेक्टर, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय और खेल सुविधाएं उपलब्ध हैं। परिसर में पेड़ों की छांव में अध्ययन के लिए विशेष व्यवस्था भी की गई है।
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Bशुरुआती स्तर से ही नई तकनीकों से परिचय B
विद्यालय केवल पारंपरिक पढ़ाई तक सीमित नहीं है। यहां विद्यार्थियों को स्पोकन इंग्लिश, कंप्यूटर शिक्षा, ब्यूटीशियन प्रशिक्षण, बेसिक ऑटोमोबाइल मैकेनिक सहित विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों से भी जोड़ा गया है। रोबोटिक्स लैब के माध्यम से बच्चों को शुरुआती स्तर से ही नई तकनीकों से परिचित कराया जा रहा है। स्कूल में पहली से दसवीं कक्षा तक लगभग 450 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं, जबकि तीन वर्ष पहले यह संख्या करीब 300 थी। बेहतर परिणामों और सुविधाओं के कारण लगातार नामांकन बढ़ रहा है। विद्यालय में लगभग 40 शिक्षक कार्यरत हैं, जिससे विद्यार्थियों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन भी मिल रहा है।
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Bजनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों का भी योगदानB
विद्यालय की स्थापना समाजसेवी मल्लप्पा रामप्पा मगदूम की पहल से हुई थी। उन्होंने वर्ष 1978 में वंचित बच्चों की शिक्षा के लिए आठ एकड़ भूमि और 40 हजार रुपए दान दिए थे। बाद में स्कूल का नाम उनके सम्मान में रखा गया। स्कूल के विकास में स्थानीय जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों का भी योगदान रहा है। विधायक भरमगौड़ा (राजू) कागे तथा विधान परिषद सदस्य प्रकाश हुक्केरी ने दो अतिरिक्त कक्षों के निर्माण को स्वीकृति दी है। वहीं पूर्व मंत्री श्रीमंत पाटिल ने शुद्ध पेयजल और व्यायाम उपकरण उपलब्ध कराए हैं।
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Bसरकारी शिक्षा के सफल मॉडल के रूप में उभर रहा B
पिछले वर्ष एसएसएलसी परीक्षा में विद्यालय के एक छात्र ने राज्य स्तर पर पांचवां स्थान प्राप्त किया था। यही उपलब्धि इस सरकारी स्कूल की पहचान को और मजबूत करने वाली साबित हुई। सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद यह विद्यालय आज सरकारी शिक्षा के सफल मॉडल के रूप में उभर रहा है। आधुनिक सुविधाएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास का समन्वय यह संदेश देता है कि यदि सरकारी स्कूलों को संसाधन और बेहतर प्रबंधन मिले तो वे निजी संस्थानों से किसी भी मायने में पीछे नहीं हैं।