
सीएम भजनलाल, पूर्व सीएम वसुंधरा और अशोक गहलोत। पत्रिका फाइल फोटो
जयपुर। राजस्थान निकाय चुनाव के परिणामों ने भाजपा-कांग्रेस के मंत्रियों और वरिष्ठ नेताओं के क्षेत्रीय प्रभाव की अलग-अलग तस्वीर सामने रखी है। कई मंत्रियों के विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा ने अध्यक्ष-उपाध्यक्ष और सभापति-उपसभापति दोनों पदों पर कब्जा जमाकर अपना प्रभाव कायम रखा, तो कुछ के क्षेत्रों में कांग्रेस ने चुनौती दी है। उधर, प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय कांग्रेस नेताओं के नगरीय निकाय चुनाव के रिपोर्ट कार्ड में उनके क्षेत्रीय प्रभाव की अलग-अलग तस्वीर सामने आई है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा: गृह शहर भरतपुर नगर निगम में भाजपा को 20 सीटें ही मिलीं, लेकिन निर्दलीयों के सहारे रहे। सभी सातों निकायों में महापौर बनाने में सफल भी भाजपा ने कब्जा जमाया। जयपुर नगर निगम में महापौर का चुनाव 25 सितंबर को होना है।
पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे: विधानसभा क्षेत्र में आने वाली तीन नगर पालिकाओं में से दो में भले ही भाजपा का बोर्ड बना, लेकिन झालावाड़ नगर परिषद में पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। परिषद के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, दोनों पद कांग्रेस के खाते में गए।
उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा: दूदू विधानसभा क्षेत्र में भाजपा दोनों नगरपालिका में बोर्ड नहीं बना सकी। फागी व दूदू नगरपालिका में अध्यक्ष-उपाध्यक्ष दोनों पद कांग्रेस व कांग्रेस समर्थित के खाते में गया। हालांकि, मंत्री का वोट सांगानेर विधानसभा क्षेत्र में है।
केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत: जोधपुर लोकसभा क्षेत्र में फलोदी, बाप, बालेसर और पोकरण निकाय में चुनाव हुए, जिसमें फलोदी, बाप और बालेसर में भाजपा को सफलता मिली, जबकि पोकरण में कांग्रेस विजयी हुई। जोधपुर नगर निगम के चुनाव परिणाम 25 को आएंगे।
स्वायत्त शासन मंत्री झाबर सिंह खर्रा: उनके क्षेत्र श्रीमाधोपुर में दो पालिकाएं हैं। श्रीमाधोपुर में भाजपा और अजीतगढ़ में कांग्रेस जीती।
हीरालाल नागर, ऊर्जा मंत्रीः सांगोद विधानसभा क्षेत्र की सांगोद पालिका में दोनों पदों पर भाजपा प्रत्याशी निर्वाचित हुए।
कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा: सवाईमाधोपुर विधानसभा क्षेत्र की सवाईमाधोपुर नगर परिषद में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष दोनों पद भाजपा के खाते में रहे।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर: रामगंजमंडी में भाजपा ने दोनों पदों पर जीत दर्ज की।
जलदाय मंत्री कन्हैयालाल चौधरी: विधानसभा क्षेत्र मालपुरा-टोडारायसिंह में आने वाली चारों नगर पालिकाओं- मालपुरा, डिग्गी, लाम्बाहरिसिंह और टोडारायसिंह में भाजपा ने कब्जा जमाया।
केन्द्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव: अलवर संसदीय क्षेत्र में 12 शहरी निकायों में से 9 पर भाजपा आगे रही।
ये भी कामयाबः जवाहर सिंह बेढ़म (गृह राज्य मंत्री), सुमित गोदारा (खाद्य मंत्री), अविनाश गहलोत (समाजिक न्याय मंत्री), सुरेश रावत (जल संसाधन मंत्री), जोगाराम पटेल (संसदीय कार्य मंत्री) और गजेंद्र सिंह खींवसर (चिकित्सा मंत्री)।
ये नहीं दिला पाए जीतः राज्यमंत्री विजय सिंह चौधरी, मंजू बाघमार, ओटाराम देवासी, सहकारिता मंत्री गौतम कुमार दक, राजस्व मंत्री हेमंत मीणा और मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग।
केन्द्रीय मंत्री अर्जुनराम मेघवाल के लोकसभा क्षेत्र बीकानेर में आने वाले सात निकायों में से चार में भाजपा अध्यक्ष पद हासिल करने में सफल रही, जबकि दो निकायों में कांग्रेस और एक में सीपीआई (एम) ने अध्यक्ष पद पर कब्जा जमाया। हालांकि, सबसे अहम और प्रतिष्ठा में रहे बीकानेर नगर निगम में भाजपा महापौर पद हासिल नहीं कर सकी। यहां कांग्रेस के खाते में महापौर पद गया, जबकि भाजपा ने उपमहापौर पद जीतकर कुछ हद तक भरपाई की।
पूर्व सीएम अशोक गहलोत: सरदारपुरा से विधायक हैं। उनका क्षेत्र जोधपुर निगम में आता है। यहां कुल 100 वार्डों में से भाजपा ने 45 और कांग्रेस ने 44 वार्डों पर जीत दर्ज की है। वहीं अजमेर के पार्षद किलाबंदी के बाद बेंगलूरु से लौटे तो गहलोत से मिले थे।
पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट: टोंक से विधायक हैं, यहां कांग्रेस को बहुमत मिला और कांग्रेस ने अपना सभापति व उप सभापति बना लिया है। यहां कुल 60 वार्डों में से 59 पर चुनाव हुआ था। इसमें से कांग्रेस ने 32 वार्ड जीते, वहीं भाजपा को 19 मिले।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा: लक्ष्मणगढ़ से विधायक हैं। उनकी नगर पालिका में 45 वाडौं में से कांग्रेस को 20, भाजपा को 15 वार्डों में जीत मिली थी। 10 वार्डों में निर्दलीय ने बाजी मारी थी। लेकिन डोटासरा ने जोड़तोड़ कर पालिका पर कब्जा कर लिया।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली: अलवर ग्रामीण से विधायक हैं। उनकी मालाखेड़ा पालिका के 20 वार्डों में से 9 कांग्रेस, 2 भाजपा और 9 निर्दलीय जीते थे। लेकिन जोड़तोड़ के जरिए जूली ने पालिका अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों ही बनाने में सफलता अर्जित की है।
हरीश चौधरीः बाडमेर जिले के बायतु विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं। जिले में बाड़मेर नगर परिषद के अलावा चौहटन नगर पालिका सहित दो ही निकाय हैं। लेकिन यहां दोनों ही निकायों में बहुमत नहीं मिलने से कांग्रेस अपना बोर्ड नहीं बना सकी।
जितेन्द्र सिंहः पूर्व केन्द्रीय मंत्री अलवर से आते हैं। अलवर नगर निगम में कुल 65 वार्डों में से कांग्रेस को 23 वार्डों पर ही जीत मिली थी। यहां भाजपा को भी बहुमत नहीं मिला था। कांग्रेस ने निर्दलीयों के साथ बोर्ड बनाने के लिए जोड़तोड़ की, लेकिन बोर्ड नहीं बना सके।
सी.पी. जोशीः पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सी.पी. जोशी नाथद्वारा विधानसभा क्षेत्र से आते हैं। नाथद्वारा नगर पालिका के कुल 40 वार्डों में से 19 वाडाँ पर ही जीत मिलने से 2 सीट बहुमत से कम थी। लेकिन यहां भाजपा ने 20 सीटें और 1 पर निर्दलीय की जीत हुई थी। लेकिन भाजपा को अपना बोर्ड बनाने के लिए कांग्रेस खेमे में भी सेंध लगाने में सफलता मिली। दोनों पदों पर भाजपा जीती।
रघु शर्माः पूर्व मंत्री रघु शर्मा केकड़ी विधानसभा क्षेत्र से आते हैं। क्षेत्र में चार नगर पालिका केकड़ी, सरवाड़, सावर और टटोती शामिल हैं। लेकिन कांग्रेस केकड़ी पालिका में ही अध्यक्ष बना सकी है। अन्य तीनों नगर पालिकाओं में कांग्रेस को हार मिली है। लेकिन उपाध्यक्ष के चुनाव में कांग्रेस केकड़ी को भी नहीं बचा सकी। यहां आरएलपी ने उपाध्यक्ष पद हथिया लिया।
पूर्व मंत्री बी.डी. कल्ला बीकानेर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से आते हैं। बीकानेर नगर निगम के कुल 80 वार्डों में से कांग्रेस ने 42 पर जीत दर्ज कर पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया था। जबकि भाजपा को 27 वार्डों में ही जीत मिली थी। 10 निर्दलीय थे। लेकिन कांग्रेस ने यहां जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए निर्दलीयों के भी 8 वोट हांसिल करते हुए 50 मतों के साथ महापौर सीट पर कब्जा कर लिया। लेकिन कल्ला अपना बहुमत के बावजूद उप महापौर नहीं बना सके।
Updated on:
23 Sept 2026 10:51 am
Published on:
23 Sept 2026 10:27 am
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