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Rajasthan BJP : रिकॉर्ड तोड़ जीत से पीएम मोदी के भरोसेमंद बनने तक, जानिए राजस्थान भाजपा के नए प्रभारी संजय भाटिया की 10 दिलचस्प बातें 

Sanjay Bhatia : राजस्थान बीजेपी के नए प्रभारी संजय भाटिया के व्यक्तिगत जीवन, उनके राजनीतिक सफर और उन 10 बड़ी बातों के बारे में, जो उन्हें बीजेपी संगठन का एक बेहद खास और असरदार चेहरा बनाती हैं।
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राजस्थान बीजेपी के नए प्रभारी संजय भाटिया

राजस्थान बीजेपी के नए प्रभारी संजय भाटिया

भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने देश भर के 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में संगठनात्मक कसावट लाने के उद्देश्य से एक बड़ा फेरबदल करते हुए राजस्थान बीजेपी के नए प्रदेश प्रभारी और सह-प्रभारियों के नामों का ऐलान कर दिया है। दिल्ली स्थित पार्टी के राष्ट्रीय मुख्यालय से जारी आधिकारिक आदेश के अनुसार, वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय भाटिया को राजस्थान भारतीय जनता पार्टी का नया प्रदेश प्रभारी नियुक्त किया गया है। इस बड़े सांगठनिक फैसले के साथ ही राजस्थान में पार्टी गतिविधियों को निचले स्तर तक मजबूत करने के लिए कविता पाटीदार और कुलजीत चहल को प्रदेश सह-प्रभारी की अहम जिम्मेदारी दी गई है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

कौन हैं संजय भाटिया?

आखिर कौन हैं संजय भाटिया, जिन पर बीजेपी आलाकमान ने राजस्थान जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य का भरोसा जताया है। संजय भाटिया की पहचान एक शांत, अनुशासित और बिना किसी विवाद के पार्टी के फैसलों को धरातल पर लागू करने वाले कुशल रणनीतिकार की रही है। वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के करीबी नेताओं में गिने जाते हैं।

आइए जानते हैं राजस्थान बीजेपी के नए प्रभारी संजय भाटिया के व्यक्तिगत जीवन, उनके राजनीतिक सफर और उन 10 बड़ी बातों के बारे में, जो उन्हें बीजेपी संगठन का एक बेहद खास और असरदार चेहरा बनाती हैं।

1. पानीपत में जन्म, 'कुरुक्षेत्र' से बी.कॉम

संजय भाटिया का जन्म 29 जुलाई 1967 को हरियाणा के ऐतिहासिक शहर पानीपत में एक प्रतिष्ठित पंजाबी परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा पानीपत के स्थानीय स्कूल से पूरी की। इसके बाद उन्होंने पानीपत के प्रसिद्ध आई.बी. कॉलेज से वाणिज्य स्नातक यानी बी.कॉम (B.Com) की डिग्री हासिल की, जो कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से संबद्ध है।

कॉलेज के दिनों से ही उनकी रुचि सामाजिक और राजनीतिक विषयों में गहराई से रही। पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने संगठन निर्माण और जनसेवा की कला सीख ली थी, जिसने आगे चलकर उनके पूरे राजनीतिक जीवन का आधार तैयार किया।

2. ABVP से शुरूआत

संजय भाटिया ने अपनी राजनीति का पहला पाठ छात्र जीवन के दौरान ही पढ़ लिया था। वे साल 1987 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से प्रेरित छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) में शामिल हुए और उन्हें मंडल सचिव की जिम्मेदारी मिली।

छात्रों की समस्याओं के समाधान और राष्ट्रवादी विचारों को आगे बढ़ाने में उनकी सक्रियता को देखते हुए साल 1989 में उन्हें एबीवीपी का जिला महासचिव बनाया गया। एबीवीपी में उनके इस अनुशासित काम ने उन्हें भारतीय जनता पार्टी के युवा मोर्चे के वरिष्ठ नेताओं की नजरों में ला खड़ा किया।

3. BJYM में संभाली बड़ी कमान

एबीवीपी में सफल सांगठनिक काम के बाद संजय भाटिया को मुख्यधारा की राजनीति में लाया गया। साल 1998 में उनकी कार्यकुशलता और निष्ठा को देखते हुए भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) का हरियाणा राज्य महासचिव नियुक्त किया गया।

युवा मोर्चा के दौरान उन्होंने पूरे हरियाणा में घूम-घूमकर युवाओं को पार्टी से जोड़ा और बीजेपी की विचारधारा का विस्तार किया। इस दौरान उन्होंने कई आंदोलनों और रैलियों का सफल संचालन किया, जिससे संगठन में उनकी विश्वसनीयता और ज्यादा मजबूत हो गई।

4. लगातार 6 साल हरियाणा के प्रदेश महासचिव

संजय भाटिया का सांगठनिक ग्राफ लगातार ऊपर बढ़ता गया। साल 2015 से लेकर 2021 तक यानी लगातार 6 वर्षों तक वे बीजेपी हरियाणा के प्रदेश महासचिव के बेहद महत्वपूर्ण पद पर रहे।

इस कार्यकाल के दौरान हरियाणा में बीजेपी की सरकार बनी और संगठन को हर जिले में बूथ स्तर तक मजबूत करने का श्रेय संजय भाटिया को दिया जाता है। इसके अलावा उन्होंने 'हरियाणा खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड' के चेयरमैन के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं और ग्रामीण उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए काम किया।

5. 6.56 लाख से ज्यादा वोटों से रचा था इतिहास

संजय भाटिया के चुनावी करियर की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि साल 2019 के लोकसभा चुनावों में आई। बीजेपी ने उन्हें हरियाणा की करनाल लोकसभा सीट से अपना उम्मीदवार बनाया।

इस चुनाव में संजय भाटिया ने कांग्रेस के दिग्गज नेता कुलदीप शर्मा को 6,56,142 वोटों के विशाल अंतर से शिकस्त दी। यह जीत उस समय पूरे देश में दूसरी सबसे बड़ी और हरियाणा के राजनीतिक इतिहास की सबसे बड़ी चुनावी जीत दर्ज की गई थी। इस एक जीत ने उन्हें रातों-रात राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े जननेता के रूप में स्थापित कर दिया।

6. मनोहर लाल खट्टर के लिए सीट का त्याग!

संजय भाटिया की पार्टी के प्रति निष्ठा और समर्पण की मिसाल 2024 के आम चुनावों में देखने को मिली। जब बीजेपी केंद्रीय नेतृत्व ने हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर को केंद्र की राजनीति में लाने का निर्णय लिया, तो उनके लिए एक सुरक्षित सीट की जरूरत थी।

पार्टी के निर्देश पर संजय भाटिया ने बिना किसी व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा या हिचकिचाहट के अपनी बनी-बनाई और रिकॉर्ड जीत वाली करनाल सीट मनोहर लाल खट्टर के लिए छोड़ दी। उनका यह फैसला दिखाता है कि उनके लिए व्यक्तिगत पद से ऊपर हमेशा पार्टी का आदेश और संगठन का हित रहा है।

7. राज्यसभा सांसद बनकर पहुंचे संसद

पार्टी के प्रति इस निसंकोच समर्पण, त्याग और निष्ठा का सम्मान करते हुए बीजेपी आलाकमान ने उन्हें बड़ा इनाम दिया। मार्च 2026 में हुए राज्यसभा चुनावों में बीजेपी ने संजय भाटिया को हरियाणा से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया।

वे बिना किसी विरोध के चुनाव जीतकर अप्रैल 2026 में संसद के उच्च सदन यानी राज्यसभा पहुंचे। राज्यसभा सांसद बनने के बाद उन्होंने संसद में राष्ट्रीय और हरियाणा से जुड़े कई जनहित के मुद्दों को पूरी प्रमुखता के साथ उठाया है।

8. बने बीजेपी के राष्ट्रीय महामंत्री

संजय भाटिया की सांगठनिक क्षमता और केंद्रीय नेतृत्व के प्रति उनकी वफादारी को देखते हुए 17 अगस्त 2026 को बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन में बड़ा प्रमोशन दिया गया। उन्हें बीजेपी का राष्ट्रीय महामंत्री नियुक्त किया गया।

राष्ट्रीय महामंत्री का पद बीजेपी संगठन में नीति निर्धारण और देश भर में पार्टी के विस्तार का काम देखने वाले सबसे ताकतवर पदों में से एक माना जाता है। इस पद पर रहते हुए उन्होंने बीजेपी एससी मोर्चा सहित कई आंतरिक संगठनों के प्रभारी के रूप में काम किया।

9. पीएम मोदी और खट्टर के खास व भरोसेमंद रणनीतिकार

संजय भाटिया को पीएम नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के बेहद करीबी नेताओं में गिना जाता है। जब नरेंद्र मोदी 1990 के दशक में हरियाणा बीजेपी के प्रभारी थे, तब से ही संजय भाटिया उनके सांगठनिक काम के तरीकों से जुड़े रहे हैं।

वे दिल्ली-एनसीआर और हरियाणा की राजनीति में एक मजबूत पंजाबी चेहरे के रूप में भी जाने जाते हैं। राजनीतिक गलियारों में उनकी पहचान 'लो-प्रोफाइल रहकर हाई-इम्पैक्ट' काम करने वाले नेता की है, जो मीडिया की चकाचौंध से दूर रहकर जमीनी स्तर पर चुनावी रणनीति और संगठन को मजबूत करने में माहिर हैं।

10. राजस्थान बीजेपी के प्रभारी के रूप में क्या होंगी मुख्य चुनौतियां?

राजस्थान के नए प्रभारी के रूप में संजय भाटिया के सामने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी। राजस्थान एक विशाल भौगोलिक क्षेत्र वाला राज्य है, जहां 200 विधानसभा सीटें और 25 लोकसभा क्षेत्र आते हैं।

सरकार व संगठन में तालमेल: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व वाली राज्य सरकार और बीजेपी संगठन के बीच तालमेल को और बेहतर बनाना उनकी पहली प्राथमिकता होगी।

स्थानीय निकाय व पंचायत चुनाव: राज्य में आने वाले पंचायती राज और शहरी निकाय चुनावों में बीजेपी को जीत दिलाना।

सह-प्रभारियों के साथ टीम वर्क: सह-प्रभारी कविता पाटीदार (राज्यसभा सांसद, मध्य प्रदेश) और कुलजीत चहल (एनडीएमसी सदस्य, दिल्ली) के साथ मिलकर राजस्थान के सभी संभागों (जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, अजमेर और भरतपुर) में कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना।