
Jaipur Nagar Nigam Mayor Election - File PIC
Rajasthan Municipal Elections 2026: राजस्थान के नगरीय निकाय चुनाव में अब प्रदेश के तीन बड़े नगर निगमों जयपुर, जोधपुर और कोटा के महापौर चुनाव पर सबकी नजरें टिक गई हैं। इन तीनों निगमों में महापौर का चुनाव 25 सितंबर को होना है और इसी दिन परिणाम भी घोषित किए जाएंगे। पुनर्मतदान के कारण इन निगमों का चुनाव कार्यक्रम आगे बढ़ाया गया था।
इन तीनों निगमों का राजनीतिक गणित अलग-अलग है। जयपुर और कोटा में भाजपा स्पष्ट बहुमत के साथ खड़ी है, जबकि जोधपुर में किसी भी दल के पास अपने दम पर बहुमत नहीं है। ऐसे में जोधपुर में निर्दलीय और अन्य पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
150 सदस्यीय जयपुर नगर निगम में भाजपा के 78, कांग्रेस के 57 और निर्दलीय के 15 पार्षद हैं। बहुमत के लिए 76 पार्षदों का समर्थन जरूरी है। इस लिहाज से भाजपा बहुमत के आंकड़े से दो सीट ऊपर है।
भाजपा ने महापौर पद के लिए सुनील कोठारी को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने सुनीता महावर को मैदान में उतारा है। भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण यहां मुकाबले का मुख्य आधार पार्टी के पार्षदों का एकजुट रहना होगा। जयपुर जैसे बड़े निगम में महापौर पद का चुनाव प्रदेश की राजनीति में भी खास महत्व रखता है।
100 सदस्यीय कोटा नगर निगम में भाजपा के 57 पार्षद हैं, जबकि बहुमत का आंकड़ा 51 है। कांग्रेस के पास 43 पार्षद हैं। भाजपा ने अनुसुईया गोस्वामी और कांग्रेस ने सुनीता सुमन को महापौर पद का प्रत्याशी बनाया है।
कोटा में भी संख्या बल भाजपा के पक्ष में है। इसलिए यहां राजनीतिक मुकाबला मुख्य रूप से दोनों दलों के प्रत्याशियों के बीच रहेगा, लेकिन अंतिम फैसला 25 सितंबर को होने वाली मतदान प्रक्रिया से होगा।
जोधपुर का गणित जयपुर और कोटा से बिल्कुल अलग है। 100 सदस्यीय निगम में भाजपा के 45 और कांग्रेस के 44 पार्षद हैं। इसके अलावा 10 निर्दलीय और एक आरएलपी पार्षद है। बहुमत के लिए 51 पार्षदों की जरूरत है।
भाजपा ने प्रसन्न चंद मेहता को महापौर पद का उम्मीदवार बनाया है। पार्टी ने सात निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया है, जिससे उसका समर्थित संख्या बल 52 तक पहुंचने की बात सामने आई है।
यही वजह है कि जोधपुर का चुनाव सबसे ज्यादा राजनीतिक गतिविधियों वाला नजर आ रहा है। यहां निर्दलीय पार्षदों का समर्थन महापौर चुनाव के समीकरण को सीधे प्रभावित कर सकता है। हालांकि समर्थन के दावों और मतदान के वास्तविक परिणाम में अंतर की संभावना को देखते हुए अंतिम तस्वीर 25 सितंबर को ही साफ होगी।
इन तीन निगमों से पहले प्रदेश के सात नगर निगमों में महापौर चुनाव हो चुके हैं। इनमें भाजपा ने छह और कांग्रेस ने एक महापौर पद जीता है। अजमेर, अलवर, पाली और उदयपुर में भाजपा ने मतदान के जरिए जीत दर्ज की, जबकि भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा प्रत्याशी निर्विरोध चुने गए। बीकानेर में कांग्रेस ने महापौर पद हासिल किया।
अब जयपुर, जोधपुर और कोटा के नतीजों के साथ प्रदेश के सभी 10 नगर निगमों की तस्वीर पूरी हो जाएगी। 25 सितंबर का दिन इसलिए खास होगा कि तीनों शहरों में महापौर की कुर्सी का फैसला होगा, जबकि 26 सितंबर को उपमहापौर चुनाव के बाद इन निगमों की नई राजनीतिक तस्वीर और स्पष्ट हो जाएगी।
Updated on:
23 Sept 2026 11:10 am
Published on:
23 Sept 2026 11:06 am
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