
Rajasthan : राजस्थान में भाजपा और कांग्रेस सहित कई दलों को 21 सितंबर का इंतजार बेसब्री से है। इस वक्त प्रदेश में जो माहौल है उस पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि राजस्थान की जनता को अब साफ-साफ समझ आ रहा है कि भाजपा ने यहां एक अक्षम और कमजोर #पर्ची_मुख्यमंत्री को क्यों बनाया है? जानकारी में आया है कि निकाय चुनाव में सत्ता का जो तांडव बीजेपी कर रही है, उसका वास्तविक संचालन भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से आए कुछ नेताओं के हाथ में हैं, जो CMO में बैठे अधिकारियों के जरिए इसे अंजाम दे रहे हैं, और मुख्यमंत्री सिर्फ उनके आदेशों का पालन कर रहे हैं।
गोविंद सिंह डोटासरा ने सोशल मीडिया अकाउंट X पर लिखा कि अधिकारियों को कहा जा रहा है कि किसी भी तरह कांग्रेस और निर्दलीय पार्षदों पर दबाव बनाओ, मुकदमे लगाओ, उन्हें उठाओ और बहुमत हासिल करके भाजपा के बोर्ड बनाओ। सोचिए.. तानाशाही का आलम इतना बढ़ गया है कि जहां कांग्रेस को बहुमत या मजबूत स्थिति में जनता का समर्थन मिला है, वहां भी भाजपा जनादेश को स्वीकार करने के बजाय सत्ता, मशीनरी और पुलिस के दम पर परिणाम बदलने में लगी है।
गोविंद सिंह डोटासरा ने लिखा कि ये कोई एक शहर या एक निकाय की बात नहीं है। भरतपुर, बीकानेर, जोधपुर, उदयपुर, श्रीगंगानगर, संगरिया, कुचेरा, बहरोड़, बानसूर, दूनी-देवली उनियारा, मंडावा, मांढण, नीमराना, सीकर, लोसल, धोद, कानोड़, भींडर, हर जगह एक जैसी कहानी.. डराओ, धमकाओ, मुकदमा लगाओ, दबाव बनाओ, खरीद-फरोख्त करो और फिर भाजपाई सत्ता का बोर्ड बनाओ।
गोविंद सिंह डोटासरा ने लिखा कि BJP का यही तो वो 'गुजरात मॉडल' है जिसके जरिए वो देश में सरकारें गिराने, एजेंसियों के दुरुपयोग से विपक्ष को कुचलने, झूठे मुकदमों से नेताओं को झुकाने और धनबल से सत्ता हासिल करने का खेल पिछले कई वर्षों से खेल रही है। बहुमत नहीं होने के बावजूद गोवा, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, कर्नाटक और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भाजपा सरकार बनाने से लेकर अलग-अलग समय पर सत्ता के इस्तेमाल, विधायक-सांसदों की खरीद-फरोख्त और राजनीतिक जोड़-तोड़ पूरे देश ने देखी है। अब यही "गुजरात मॉडल" यहां के कमजोर मुख्यमंत्री के जरिए राजस्थान में थोपा जा रहा है जो बेहद गंभीर और चिंताजनक है।
गोविंद सिंह डोटासरा ने लिखा कि मेरा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से सीधा सवाल है.. जिस जनता ने वोट दिया, उसी जनता के फैसले को सत्ताधारी दल अगर पुलिस और प्रशासन के जोर पर बदल दे, तो फिर चुनाव का मतलब क्या रह जाएगा? चुनाव कराने की जरूरत ही क्या है? अगर कुर्सियां पहले ही तय करनी थीं, अगर पार्षदों को डराना-धमकाना, दबाव में लेना और खरीद-फरोख्त ही करनी थी, तो चुनाव का लोकतांत्रिक तमाशा क्यों किया गया? राजस्थान के चुनावी इतिहास पर ये सत्ता के दुरुपयोग का काला धब्बा है जो आपके कार्यकाल में लगा है, जनता आपको इसके लिए कभी माफ़ नहीं करेगी।
गोविंद सिंह डोटासरा ने लिखा कि मैं हमारे नेता राहुल गांधी के बब्बर शेरों से कहना चाहता हूं.. डरने की जरूरत नहीं है, पीछे हटने की जरूरत नहीं है। लोकतंत्र के इन लुटेरों का मुकाबला लोकतांत्रिक तरीके से, पूरी ताकत और पूरी हिम्मत के साथ करना है। जहां किसी अधिकारी या पुलिसकर्मी द्वारा दबाव, धमकी, और सत्ता के दुरुपयोग से दमन किया जाए, उसके तथ्यों के साथ प्रदेश कांग्रेस कमेटी या प्रदेश कांग्रेस वॉर रूम को रिपोर्ट करें। हर नाम, हर घटना और हर शिकायत का रिकॉर्ड रखें, ताकि समय आने पर इनकी जवाबदेही तय की जा सके।