
Fatty Liver Screening: सांकेतिक तस्वीर-एआई जेनरेटेड
जयपुर। राजस्थान में फैटी लिवर की पहचान और रोकथाम के लिए चलाए जा रहे स्क्रीनिंग अभियान के बीच सरकार ने बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर बड़ा फैसला किया है। प्रदेश के सभी स्कूलों में अब 'वॉच जोन' बनाए जाएंगे। इन वॉच जोन में विद्यार्थियों के वजन, ऊंचाई और कमर की माप ली जाएगी। इसका उद्देश्य बच्चों में मोटापे और उससे जुड़े मेटाबॉलिक जोखिम की शुरुआती स्तर पर पहचान करना है।
सरकार इस गतिविधि को राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) और राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (RKSK) से जोड़ेगी। इसके जरिए बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े जोखिमों की नियमित निगरानी की जा सकेगी और जरूरत पड़ने पर समय रहते स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकेंगी।
राजस्थान के सभी स्कूलों में बनने वाले वॉच जोन में विद्यार्थियों का वजन, ऊंचाई और कमर की माप दर्ज की जाएगी। इस जानकारी के आधार पर मोटापे और मेटाबॉलिक जोखिम वाले बच्चों की शुरुआती पहचान की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग इसे RBSK और RKSK से जोड़कर बच्चों की नियमित स्वास्थ्य निगरानी की व्यवस्था विकसित करेगा।
चिकित्सा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने शनिवार को स्वास्थ्य भवन में आयोजित बैठक में स्क्रीनिंग अभियान की प्रगति की जानकारी दी। बैठक की अध्यक्षता इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज, नई दिल्ली के निदेशक डॉ. शिव सरीन ने की।
विभाग के अनुसार वर्ष 2026-27 में अब तक 1.32 करोड़ लोगों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है, जिनमें 17.44 लाख लोग संदिग्ध मिले हैं। वहीं प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों पर 26.54 लाख लोगों की स्क्रीनिंग की गई, जिनमें 2.38 लाख संदिग्ध पाए गए। जिला अस्पताल स्तर पर भी 13,021 लोगों की स्क्रीनिंग की गई है।
विभाग के मुताबिक स्क्रीनिंग के बाद संदिग्ध पाए जाने वाले लोगों को जरूरत के अनुसार आगे की जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा जाएगा। जिला अस्पताल में बीमारी की गंभीरता का आकलन किया जाएगा और उसके आधार पर आगे की उपचार प्रक्रिया तय होगी।
स्वास्थ्य विभाग स्क्रीनिंग और उपचार से संबंधित जानकारी को व्यवस्थित तरीके से दर्ज करने के लिए ऑनलाइन डैशबोर्ड तैयार करेगा। इसके माध्यम से प्रदेश में लिवर डिजीज रजिस्ट्री तैयार करने की योजना है। इससे बीमारी की स्थिति, जांच और उपचार से संबंधित आंकड़ों को एक जगह दर्ज किया जा सकेगा।
बैठक में फैटी लिवर की स्क्रीनिंग के साथ उपचार, स्वास्थ्यकर्मियों के प्रशिक्षण और आगामी कार्ययोजना पर भी चर्चा हुई। प्रदेश में बायो बैंक की संभावना पर भी विचार किया जाएगा। सरकार का फोकस अब केवल बीमारी की पहचान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बच्चों और किशोरों में मोटापे तथा मेटाबॉलिक जोखिम की शुरुआती पहचान के जरिए भविष्य में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
Updated on:
19 Sept 2026 09:20 pm
Published on:
19 Sept 2026 09:20 pm
बड़ी खबरें
View Allजयपुर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
