
जयपुर। सुप्रीम कोर्ट की अवैध निर्माण के मामलों में सख्ती के बीच जयपुर के चिमनपुरा में जेडीए ने कथित अवैध व्यावसायिक दुकानों को सील कर दिया है। यहां व्यावसायिक गतिविधियों और निर्माण को लेकर पिछले कई महीनों से विवाद चल रहा है। आरोप है कि ऐसी जमीन पर दुकानें और अन्य व्यावसायिक निर्माण किए गए, जहां इस तरह के इस्तेमाल की अनुमति नहीं थी। मामले में जेडीए की कार्रवाई के बाद संबंधित पक्ष जेडीए अपीलीय ट्रिब्यूनल पहुंचे थे। वहां अंतरिम राहत मिलने की बात सामने आई। इसके अलावा राजस्व मंडल और संभागीय आयुक्त स्तर से भी स्टे मिलने का दावा किया गया है। ऐसे में इन आदेशों की वास्तविक सीमा और वर्तमान स्थिति महत्वपूर्ण हो गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में अवैध निर्माण और भूमि उपयोग के उल्लंघन को लेकर अधिकारियों की भूमिका पर सख्त टिप्पणियां की थीं। कोर्ट ने कहा था कि उल्लंघन सामने आने पर केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि कानून के मुताबिक प्रभावी कार्रवाई होनी चाहिए। इसमें सीलिंग और जरूरत पड़ने पर ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई भी शामिल हो सकती है।
जयपुर से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि लगाए गए आरोप सही हैं तो स्थिति नॉट ओनली शॉकिंग बट आलसो अलार्मिंग है। कोर्ट ने जेडीए की कार्रवाई के बाद मामलों के ट्रिब्यूनल में जाने और लंबे समय तक अंतरिम संरक्षण में रहने पर भी चिंता जताई थी। कोर्ट ने लंबित मामलों का दो सप्ताह में निपटारा करने का निर्देश दिया था।
चिमनपुरा मार्केट की सीलिंग के बाद अब अगली कार्रवाई पर नजर है। यदि जांच में निर्माण और जमीन का व्यावसायिक इस्तेमाल कानून के खिलाफ पाया जाता है तो संबंधित नियमों के तहत ध्वस्तीकरण की कार्रवाई का सवाल उठेगा। हालांकि, किसी भी डिमोलिशन से पहले संबंधित आदेशों, स्वीकृतियों और न्यायिक राहत की मौजूदा स्थिति की जांच जरूरी होगी।
चिमनपुरा में केवल मार्केट ही जांच का विषय नहीं है। राजस्व सड़कों और मास्टर प्लान में निर्धारित सड़क की जमीन पर भी निर्माण होने के आरोप हैं। यदि संबंधित खसरों में जमीन सड़क के लिए निर्धारित है तो वहां भवन मानचित्र कैसे स्वीकृत हुआ और निर्माण किस आधार पर खड़े हुए, यह भी जांच का विषय है।
Updated on:
19 Sept 2026 10:00 pm
Published on:
19 Sept 2026 10:00 pm
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