
राजस्थान की सियासत और सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने भजनलाल सरकार के शिक्षा मंत्री पर एक बार फिर तीखा हमला बोला है। डोटासरा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए आरोप लगाया है कि राजस्थान के वर्तमान शिक्षा मंत्री मदन दिलावर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कथित एजेंडे को पूरी निष्ठा से लागू करने में जुटे हैं, जिसके तहत राज्य की सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लगातार कमजोर करने वाले फैसले बैक-टू-बैक लिए जा रहे हैं।
डोटासरा ने कहा कि प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और सामान्य वर्ग के बच्चों के भविष्य को पूरी तरह से अंधकार में धकेला जा रहा है और हाल ही में हुई बड़ी स्थानांतरण प्रक्रिया के बाद ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के पद बड़े पैमाने पर खाली हो गए हैं, जिससे बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई है।
अपने खुद के निर्वाचन क्षेत्र का हवाला देते हुए गोविंद सिंह डोटासरा ने बताया कि हाल ही में हुई बड़े पैमाने पर शिक्षकों की स्थानांतरण प्रक्रिया के बाद उनके विधानसभा क्षेत्र की स्थिति बेहद भयावह और चिंताजनक स्तर पर पहुंच गई है। क्षेत्र के लगभग हर सरकारी उच्च माध्यमिक और माध्यमिक विद्यालय में व्याख्याता, प्रधानाचार्य और प्रमुख विषय अध्यापकों के पद पूरी तरह से खाली पड़े हैं।
उन्होंने कहा कि पूरे विधानसभा क्षेत्र के सरकारी स्कूलों का विश्लेषण किया जाए, तो लगभग 50 प्रतिशत शिक्षकों के पद पूरी तरह से रिक्त हो चुके हैं। डोटासरा ने सवाल उठाया कि जब स्कूलों में आधे शिक्षक ही नहीं होंगे, तो बोर्ड परीक्षाओं के इस दौर में बच्चों का कोर्स कैसे पूरा होगा और उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा कैसे मिल पाएगी?
डोटासरा ने सरकार की मंशा पर सीधा संदेह व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसा पूरी तरह से प्रतीत होता है कि इस बड़ी स्थानांतरण प्रक्रिया के माध्यम से अनेक विद्यालयों को जानबूझकर शिक्षकों से पूरी तरह खाली कर दिया गया है।
उन्होंने इसके पीछे का गणित समझाते हुए कहा कि यदि किसी स्कूल में विषय अध्यापक और प्रिंसिपल ही नहीं होंगे, तो स्वाभाविक रूप से वहां पढ़ने वाले बच्चों की संख्या धीरे-धीरे कम होने लगेगी। जब बच्चों का नामांकन घट जाएगा, तो सरकार भविष्य में छात्र संख्या कम होने का बहाना बनाकर इन्हीं सरकारी विद्यालयों को हमेशा के लिए बंद करने या उन्हें मर्ज करने का एक मजबूत प्रशासनिक आधार तैयार कर लेगी। उन्होंने इसे सरकारी शिक्षा ढांचे को जमीनी स्तर पर ध्वस्त करने की एक सोची-समझी रणनीति करार दिया।
पूर्व शिक्षा मंत्री और वर्तमान पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय शुरू किए गए महात्मा गांधी अंग्रेजी माध्यम विद्यालयों को वर्तमान सरकार द्वारा धीरे-धीरे बंद या कमजोर किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चे बिना किसी भारी फीस के अच्छी और आधुनिक अंग्रेजी शिक्षा प्राप्त कर अपने भविष्य को संवारने का सपना देख रहे थे। लेकिन अब सरकार के नए फैसलों के कारण इन बच्चों के सामने पढ़ाई का एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
डोटासरा ने आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर इन सरकारी भवनों के भीतर आरएसएस की गतिविधियां संचालित होने की खबरें भी लगातार सामने आ रही हैं, जो बेहद चिंताजनक हैं।
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कांग्रेस नेता गोविंद सिंह डोटासरा ने एक और गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि पिछले दिनों सरकारी स्कूलों के छोटे-छोटे बच्चों को शैक्षिक भ्रमण और अन्य गतिविधियों के नाम पर आरएसएस की शाखाओं में भेजने के मामले भी सामने आए हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का मूल उद्देश्य बच्चों को वैज्ञानिक सोच और गुणवत्तापूर्ण ज्ञान देना होना चाहिए, न कि उन्हें किसी विशेष वैचारिक एजेंडे की तरफ धकेलना। डोटासरा ने कहा कि सरकारी शिक्षा तंत्र का इस तरह से राजनीतिकरण करना राजस्थान के भविष्य के साथ सीधे तौर पर खिलवाड़ करने जैसा है।
गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि यह लड़ाई केवल उनकी या उनकी पार्टी कांग्रेस की नहीं है। यह राजस्थान के हर उस गरीब और जागरूक माता-पिता की लड़ाई है जो निजी स्कूलों की भारी-भरकम फीस देने में असमर्थ हैं और अपने बच्चों को उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद में गांव के सरकारी स्कूल में भेजते हैं। यह हर उस जिम्मेदार नागरिक की लड़ाई है जो अपने गांव के सरकारी विद्यालय के विकास के लिए प्रयास कर रहा है।
डोटासरा ने कहा कि सरकारी विद्यालय केवल ईंट-पत्थर की इमारतें नहीं हैं, बल्कि वे लाखों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों के सपनों की नींव हैं। सरकार की यह प्राथमिक जिम्मेदारी है कि वह इन स्कूलों को बंद करने या कमजोर करने के बजाय वहां पर्याप्त स्टाफ, संसाधन, बजट और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराए, क्योंकि शिक्षा पर हर बच्चे का समान अधिकार है।